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मेरठ में बेटियां हो आत्मनिर्भर इसलिए श्रुति जगा रहीं हैं शिक्षा की अलख

झुग्गी

झुग्गी झोपड़ी में बच्चों को पढ़ा रही श्रुति

आप मिलिए मेरठ की श्रुति से जिन्होंने बेटियों को शिक्षित करने का बीड़ा उठाया है. जी हां जहां झुग्गी झोपड़ी में कोई जाने को तैयार नहीं है. वहीं मेरठ शास्त्री नगर में रहने वाली श्रुति रस्तोगी ने अपनी नौकरी छोड़ बच्चों को शिक्षित करना उनकी जिंदगी का मकसद बन गया.

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    मेरठःआप भी मिलिए मेरठ की श्रुति से जिन्होंने बेटियों को शिक्षित करने का बीड़ा उठाया है. जी हां जहां झुग्गी झोपड़ी में कोई जाने को तैयार नहीं है. वहीं मेरठ शास्त्री नगर में रहने वाली श्रुति रस्तोगी ने अपनी नौकरी छोड़ बच्चों को शिक्षित करना उनकी जिंदगी का मकसद बन गया.न्यूज़-18 लोकल की टीम से बात करते हुए श्रुति ने बताया कि उन्होंने छोटी कन्याओं को भीख मांगते हुए देखा.जब उनसे पूछा स्कूल जाने का मन करता है. तो बच्चों ने कहा हां.तब से  उन बच्चों को पढ़ाना शुरू कर दिया.
    5 बच्चों से हुई शुरुआत आज है 60
    श्रुति बताती हैं कि शुरू में बच्चों को पढ़ाने में काफी समस्या उत्पन्न हुई. परिवार वाले पढ़ाने को ही तैयार नहीं थे. लेकिन उन्होंने परिवार वालों को जैसे तैसे समझाया. सिर्फ 5 बच्चों से शुरू हुई पाठशाला में अब लगभग 50 से 60 बच्चे कक्षा में निरंतर शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं. जिसमें बेटे बेटियां दोनों शामिल हैं. इतना ही नहीं पाठशाला में पढ़ने के साथ बच्चे अब सरकारी विद्यालय में भी शिक्षा ले रहें हैं.
    गौरतलब है कि श्रुति रस्तोगी एक स्कूल में टीचिंग करती थी. लेकिन बच्चों को पढ़ाने में जब टाइम सैटिंग नहीं बनी तो उन्होंने अपनी जॉब छोड़ दी. पांच सालो से वह निरंतर बच्चों को झुग्गी झोपड़ी में ही आकर पढ़ाने लगी.

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