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मेरठ: प्राइवेट स्कूलों की मनमानी रोकने को लेकर शुरू हुई जागो अभिभावक जागो मुहिम

मेरठ: प्राइवेट स्कूलों की मनमानी रोकने को लेकर शुरू हुई जागो अभिभावक जागो मुहिम

मेरठ मे प्राइवेट स्कूलों की मनमानी को लेकर अनोखा अभियान शुरू किया गया है.

मेरठ मे प्राइवेट स्कूलों की मनमानी को लेकर अनोखा अभियान शुरू किया गया है.

एक संस्था ने बीच चौराहे पर अभिभावकों और स्कूली बच्चों को रोक-रोककर उन्हें प्राइवेट स्कूलों की मनमानी के खिलाफ आवाज़ बुलंद करने के लिए कहा. संस्था के पदाधिकारियों के अनुसार प्राइवेट स्कूलों की मनमानी के खिलाफ आगामी 2 मार्च को कमिश्नरी चौराहे पर एक बड़ा अभियान भी चलाया जाएगा.

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मेरठ. उत्तर प्रदेश के मेरठ (Meerut) में आज प्राइवेट स्कूलों (Private Schools) की मनमानी रोकने को लेकर अनोखा अभियान शुरू किया गया. एक संस्था ने बीच चौराहे पर अभिभावकों और स्कूली बच्चों को रोक-रोककर उन्हें प्राइवेट स्कूलों की मनमानी के खिलाफ आवाज़ बुलंद करने के लिए कहा. संस्था के पदाधिकारियों का कहना है कि प्राइवेट स्कूल अभिभावकों का शोषण कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि जनता का उत्पीड़न किसी भी तरह से हो समाज में कुरीति है. प्राइवेट स्कूलों की मनमानी के खिलाफ आगामी 2 मार्च को कमिश्नरी चौराहे पर एक बड़ा अभियान भी चलाया जाएगा.

पर्चे बांट कर रख रहे ये मांग
संस्था के लोगों ने मांग की है कि प्राइवेट स्कूलों में हर वर्ष होने वाला एडमिशन और एनुअल चार्ज समाप्त किया जाए. स्कूलों में बुक्स, कॉपी स्टेशनरी और टाई-बेल्ट आदि बेचना बंद किया जाए. हर वर्ष पुस्तकें बदलने का सिलसिला समाप्त किया जाए. हर स्कूल में भारत सरकार की एनसीईआरटी की पुस्तकें ही शामिल की जाएं.

अगर प्राइवेट प्रकाशन की बुक्स बच्चों को दिलाई जाएं तो उसके दाम भी एनसीईआरटी के समकक्ष होने चाहिए. बच्चों की ड्रेस पूरे सप्ताह एक जैसी होनी चाहिए. प्रदेश में सरकारी स्कूलों और माध्यमिक स्कूलों को अंग्रेज़ी माध्यम करने की भी मांग संस्था के सदस्यों ने उठाई है. यही नहीं संस्था के लोगों ने ये भी मांग की है कि निम्न आयवर्ग के परिवारों की फीस प्राइवेट स्कूलों में माफ की जाए और उनके बुक्स व ड्रेस आदि भी मुफ्त मिलना चाहिए.

हर साल चलता है ऐसा अभियान
गौरतलब है कि प्राइवेट स्कूलों में एडमिशन का दौर शुरू हो चुका है. एडमिशन को लेकर अभिभावक मोटी फीस देकर परेशान हैं. अभिभावकों का एक समूह अपनी परेशानी को ज़ाहिर करने के लिए हर वर्ष कमोवेश ऐसी ही आवाज़ बुलंद करने के लिए सड़क पर उतरते हैं. हर वर्ष ऐसे ही प्राइवेट स्कूलों के खिलाफ हल्ला बोल होता है लेकिन वो कुछ दिन के बाद टांय-टांय फिस्स हो जाता है. सवाल ये है कि क्या इस अहम मुद्दे पर घर घर की आवाज़ सुनी जाएगी?

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Tags: Meerut news, Private School, Uttarpradesh news

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