यहां लंगूर पाता है एक कर्मचारी जितनी सैलरी, चौंकाने वाली है इसके पीछे की वजह!

Umesh Srivastava | News18 Uttar Pradesh
Updated: August 24, 2019, 6:12 PM IST
यहां लंगूर पाता है एक कर्मचारी जितनी सैलरी, चौंकाने वाली है इसके पीछे की वजह!
लंगूर के मालिक को चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का वेतन भत्ता दिया जाता है. लंगूर का नाम चंदा है.

मेरठ (Meerut) के चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी (Chaudhary Charan Singh University) में एक लंगूर को एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के बराबर सैलरी मिल रही है. इसके पीछे की वजह चौंकाने वाली है.

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क्या कोई लंगूर (Langur) चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी (chaturth shreni karmchari) के बराबर सैलरी (salary) पा सकता है. आप कहेंगे ये हम क्या कह रहे हैं लेकिन जनाब मेरठ (Meerut) के चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी (Chaudhary Charan Singh University) में एक लंगूर को एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के बराबर सैलरी मिल रही है. दरअसल मेरठ के चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी में बंदरों का आतंक है. यहां बंदरों की संख्या हजारों में पहुंच चुकी है. बंदरों को भगाने के लिए चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के रूप में यहां लंगूर को तैनात किया गया है. इस लंगूर की बाकयदा शिफ्ट लगती है और कभी-कभी तो इसे ओवरटाइमम भी करना पड़ता है.

मेरठ के चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में आजकल लंगूर और बंदरों के बीच ठनी हुई है. हालात यहां तक पहुंच गए हैं कि हज़ारों बंदरों को दूर भगाने का जिम्मा एक लंगूर के भरोसे है. यहां एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के रूप में इस लंगूर को सिर्फ इसलिए तैनात किया गया है ताकि वह विश्वविद्यालय में फैले हुए बंदरों के आतंक को खत्म कर सके. लंगूर को तकरीबन दस हज़ार रुपए से ज्यादा दिए जा रहे हैं ताकि वो बंदरों को दूर भगा सके. आजकल की इस बेरोज़गारी में इस अनोखी नौकरी को पाकर लंगूर के साथ साथ उसका मालिक भी बेहद ख़ुश नज़र आ रहा है.

लंगूर को 24 घंटे कभी भी ड्यूटी पर बुलाया जा सकता है
इस लंगूर का काम है कि विश्वविद्यालय में आए दिन बंदरों से परेशानी को निजात दिलाए. लंगूर के मालिक को चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का वेतन भत्ता दिया जाता है. लंगूर का नाम चंदा है, लंगूर को 24 घंटे कभी भी ड्यूटी पर बुलाया जा सकता है. ताकि वह बंदरों के आतंक से निजात दिला सके. जब से विश्वविद्यालय में इस लंगूर की नियुक्ति हुई है तब से यूनिवर्सिटी में बंदरों का आतंक खत्म हो गया है.

यूनीवर्सिटी कैंपस में लंगूर चंदा


चंदा की तैनाती से बंदरों का आतंक खत्म हो गया
लंगूर को पालने वाले युवक का कहना है कि इस विद्यालय में बंदरों का आतंक इस तरह है कि बच्चों की किताबें लेख उठाकर ले जाते थे. लैब और क्लास में घुसकर आतंक मचाते थे. बंदरों के आतंक से पूरा विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्र काफी परेशान थे. विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले छात्रों का कहना है कि जब भी क्लास खोली जाती थी या पार्क में बैठकर पढ़ते थे तो बंदर किताब व्यवस्था उठाकर ले जाते थे और काफी परेशान कर देते हैं. इससे उनकी पढ़ाई में काफी परेशानी हो रही थी. लाइब्रेरी में और लैब में काम करने वाले छात्रों के शोध में भी काफी परेशानी होती थी. लेकिन अब जब से यहां चंदा नाम की लंगूर को तैनात किया गया है तब से बंदरों का आतंक खत्म हो गया है और आज विश्वविद्यालय में हर कोई बंदर के आतंक से आराम महसूस कर रहा है.
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लंगूर सबकी आंखों का तारा बन गया
बंदरों के आतंक से विश्वविद्यालय प्रशासन भी काफी परेशान था. शिक्षण के साथ-साथ यहां रहने वाले क्वार्टर पर भी बंदरों के आतंक से काफी लोग परेशान थे. भले ही उसको एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के बराबर वेतनमान देना पड़ रहा है लेकिन आज बंदर के आतंक से विश्वविद्यालय कैंपस पूरी तरह मुक्त हो चुका है. इस यूनिवर्सिटी कैम्पस में आजकल ये लंगूर सबकी आंखों का तारा बन गया है. और बने भी क्यों न. आखिर वो अपना काम पूरी निष्ठा से जो कर रहा है.

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First published: August 24, 2019, 5:55 PM IST
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