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कॉरपोरेट हाउस की तरह चलती थी मेरठ की ये 'बदमाश कंपनी', चोरों को मिलती थी सैलरी

News18 Uttar Pradesh
Updated: October 2, 2019, 9:15 PM IST
कॉरपोरेट हाउस की तरह चलती थी मेरठ की ये 'बदमाश कंपनी', चोरों को मिलती थी सैलरी
गिरोह ने गौतमबुद्धनगर में उस गाड़ी को ही लूट लिया था, जो एक कम्पनी के चौदह सौ मोबाइल लेकर आ रही थी.

इस गिरोह ने इसी साल जनवरी में दिल्ली (Delhi) के मैक्स हॉस्पिटल (MAX Hospital) के पास से क्रिकेटर मनोज प्रभाकर (Manoj Prabhakar) की पत्नी का मोबाइल लूटा था.

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मेरठ. शहर में लम्बे समय से चल रही एक 'बदमाश कंपनी' (Badmash Company) का पुलिस ने पर्दाफाश किया है. किसी मल्टीनेशनल कंपनी (Multinational Company) की तरह काम करने वाली इस कंपनी में काम करने वाले लोगों का टारगेट सिर्फ मोबाइल (Mobile) और लैपटॉप (Laptop) चोरी करना रहता था. बताया जा रहा है कि अब तक इस गिरोह ने करोड़ों के मोबाइल फोन चोरी किए थे. ऐसे में जब पुलिस ने इस मामले का पर्दाफाश किया तो पुलिस लाइन्स में बरामद मोबाइल एक गए. जिन्हें देखने के बाद वहां मौजूद लोग हैरान रह गए. पुलिस लाइन्स में एक मोबाइल प्रदर्शनी जैसा नज़र आने लगा. इस लूट और चोरी के लिए गिरोह ने बाकायदा एक कंपनी बना रखी थी.

गिरोह ने एक संगठित तरीके से यहां चोरों का नेटवर्क खड़ा किया. जहां सभी चोर एक एम्पलॉय की तरह काम कर रहे थे. जिनको महीने की तनख्वाह भी दी जाती थी, साथ ही मोबाइल फोन चोरी करने का टारगेट भी दिया जाता था. बताया जा रहा है कि इस पूरे गिरोह के साथ खाकी वर्दी से जुड़े लोग भी शामिल थे, जिसकी वजह से ये नेटवर्क धड़ल्ले से अपना काम कर रहा था. गिरोह का साथ देने में दो पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है. वहीं सहारनपुर में तैनात एक सब इंस्पेक्टर रैंक के ऑफिसर पर भी आरोप लगे हैं.

पुलिस द्वारा बरामद किए गए मोबाइल फोन और लैपटॉप.


पुलिस ने 280 मोबाइल और कई लैपटॉप बरामद किए

पांच साल से चल रहे इस गिरोह से पुलिस ने 280 मोबाइल और कई लैपटॉप बरामद किए हैं, जिनकी कीमत करोड़ों रुपए है. वहीं गिरोह से जुड़े लोग हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, कर्णाटक, तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में सक्रिय थे. जो पलक झपकते ही मोबाइल और लैपटॉप कोरी कर लेते थे. वहीं इस गिरोह को शरद गोस्वामी, मेरठ में बैठकर ऑपरेट करता था. चोरी किये गए इन फोन और लैपटॉप को विदेशों तक बेचा जाता था.

चोरी किये गए इन फोन और लैपटॉप को विदेशों तक बेचा जाता था.


क्रिकेटर मनोज प्रभाकर की पत्नी का मोबाइल लूटा 
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ताज़ा वारदातों की अगर बात करें तो इस गिरोह ने इसी साल जनवरी में दिल्ली के मैक्स हॉस्पिटल के पास से क्रिकेटर मनोज प्रभाकर की पत्नी का मोबाइल लूटा था. जब मनोज प्रभाकर की पत्नी ने इस बावत एफआईआर दर्ज कराई तो उन्हें बाकयदा गिरोह के सरगना ने फोन पर धमकी दी थी. इसका मुकदमा दिल्ली के थाने में पंजीकृत है. मेरठ में एक पत्रकार का भी मोबाइल इस गिरोह ने उड़ाया था. जिसकी बरामदगी नेपाल से हुई थी.

इसी गिरोह ने गौतमबुद्धनगर में उस गाड़ी को ही लूट लिया था. जो एक कम्पनी के चौदह सौ मोबाइल लेकर आ रही थी. वहीं एडीजी मेरठ ज़ोन का कहना है कि इस गिरोह में जिसकी भी सहभागिता पाई जाएगी उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी फिर चाहे वो वर्दीधारी हो या फिर सफेदपोश.

ठक ठग गिरोह भी है यही गैंग
इसी गिरोह के सदस्य गाड़ी में ठक ठक की आवाज़ करके ड्राइवर का ध्यान भटकाकर उनकी कार या किसी अन्य गाड़ी में रखे सामान को लूट लिया करते थे. कभी कहते कि गाड़ी का टायर पंचर हो गया है तो कभी गाड़ी में डीजल निकलने की बात कहकर ये गिरोह लूट की वारदातों को अंजाम दिया करता था. अलग अलग राज्यों में सार्वजनिक जगहों पर इस गिरोह के चोर मेम्बर मौजूद रहते थे. गिरोह के सदस्य प्रति दिन लूट या चोरी किए गए मोबाइल को एकत्र करते थे और फिर रोजा़ना गिरोह का सरगना शरद गोस्वामी अपनी गाड़ी से पहुंचता था और किसी कम्पनी के बॉस की तरह अगले मिशन पर जुट जाता था.

एक महीने में ये गिरोह दो हज़ार से तीन हज़ार मोबाइलों का कंसाइनमेन्ट तैयार कर भारत के विभिन्न प्रदेशों और विदेशों में सप्लाई करता था.


दो हज़ार से तीन हज़ार मोबाइलों का कंसाइनमेन्ट
एक महीने में ये गिरोह दो हज़ार से तीन हज़ार मोबाइलों का कंसाइनमेन्ट तैयार कर भारत के विभिन्न प्रदेशों और विदेशों में सप्लाई करता था. नेपाल और चाइना तक इस गिरोह के तार फैले हुए थे. इसी अंतर्राष्ट्रीय चोर कम्पनी के ज़रिए सरगना शरद गोस्वामी ने करोड़ों रुपए की संपत्ति बनाई.

देश के सभी चोरों को गाड़ी उपलब्ध कराई जाती थी
सरगना शरद गोस्वामी, बिलाल नाम के एक शख्स के संपर्क में था, जिसकी हत्या हो चुकी है. बिलाल के साथ रहकर ही शरद ने इस काम में महारथ हासिल की थी. वहीं मुम्बई में नदीम नाम का एक शख्स शरद गोस्वामी का राइट हैंड बताया जाता है. पहले ये गिरोह किराए की गाड़ी से अपने ऑपरेशन को अंजाम देते थे, लेकिन बाद में किसी एम्पलॉयी की तरह देश के सभी चोरों को गाड़ी उपलब्ध कराई जाती थी.

(रिपोर्ट- उमेश श्रीवास्तव)

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First published: October 2, 2019, 8:53 PM IST
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