रेडलाइट एरिया से गायब हुईं सेक्स वर्कर, हाईकोर्ट में पेश हुए DM और SSP!

अफसरों का दावा है कि रेडलाइट एरिया में देह व्यापार नहीं होता है. जबकि वादी पक्ष दावा कर रहा है कि यहां मानव तस्करी व देह व्यापार का धंधा खुले आम चल रहा है.

News18 Uttar Pradesh
Updated: April 24, 2019, 6:49 PM IST
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Updated: April 24, 2019, 6:49 PM IST
उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर के कबाड़ी बाजार स्थित रेड लाइट एरिया, जहां कभी सड़कें आबाद रहती थी. रेडलाइट एरिया में आने वाले लोगों की निगाहें बरबस ऊपर की ओर उठ जाया करती थी. ऊपर कोठों की खिड़कियों से झांकती सेक्स वर्कर. लेकिन आज इन कोठों में सन्नाटा पसरा हुआ है. मेरठ का यह रेड लाइट एरिया अब मेरठ प्रशासन के गले की फांस बन गया है. भले ही अधिकारी तमाम दावे कर रहे हों, लेकिन पुलिस-प्रशासन पुरानी रिपोर्ट से कैसे आंख बंद कर सकते हैं.

शहर के ब्रह्म्पुरी व देहली गेट थाने के बीच स्थित कबाड़ी बाजार रेडलाइट एरिया दशकों से चल रहा है. यहां लगभग 75 कोठों पर 400 महिलाएं देह व्यापार में लिप्त हैं. कोठे बंद कराने के लिए हाईकोर्ट के अधिवक्ता सुनील चौधरी ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में जनहित याचिका डाली है. जिसको लेकर वर्तमान में पुलिस-प्रशासन में खलबली मची है.



23 अप्रैल को डीएम, एसएसपी व सीएमओ को हाईकोर्ट ने तलब किया. अफसरों का दावा है कि रेडलाइट एरिया में देह व्यापार नहीं होता है. जबकि वादी पक्ष दावा कर रहा है कि यहां मानव तस्करी व देह व्यापार का धंधा खुले आम चल रहा है. उधर, दूसरा पहलू यह भी है कि महिलाओं के लिए पुनर्वास की कोई व्यवस्था नहीं की गई है.

बता दें कि बीते वर्ष 11 जून 2018 को आईजीआरएस पोर्टल पर उनके द्वारा सूचना दी गई कि कबाड़ी बाजार रेड लाइट एरिया 2009 से लगातार चल रहा है. वहां मुफ्त कंडोम और रुटीन हेल्थ चेकअप नियमित कराया जा रहा है.

मई 2018 में पुलिस की रिपोर्ट
मई 2018 में तत्कालीन एसपी सिटी रणविजय सिंह ने आईजीआरएस पोर्टल पर बताया कि कबाड़ी बाजार रेड लाइट एरिया काफी समय से चल रहा है. उसे नारी निकेतन या किसी अन्य जगह शिफ्ट करने में उच्च न्यायालय के आदेशों एवं निर्देशों का पालन किया जाएगा.

यह थी जनहित याचिका
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याचिका कर्ता सुनील चौधरी ने बताया कि पांच माह पूर्व हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की. मांग है कि मेरठ के कबाड़ी बाजार में मानव तस्करी के अड्डे और अनैतिक व्यापार बंद कराया जाए. अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम 1956 की धारा-16 के तहत महिलाओं को मुक्त कराया जाए. धारा-18 के तहत कोठों को सील कराया जाए.

यह किया काउंटर फाइल
इस पर अधिकारियों ने काउंटर दाखिल किया था कि यह रिपोर्ट निराधार है और यहां कोई भी कोठा नहीं है. इस पर न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल व न्यायमूर्ति राजेंद्र कुमार की खंडपीठ ने आदेश किया है कि 23 अप्रैल को डीएम, एसएसपी व सीएमओ हाईकोर्ट में रिपोर्ट के साथ पेश हों. डीएम मेरठ, एसएसपी और सीएमओ अपनी रिपोर्ट के साथ पेशी पर हैं.

(रिपोर्ट- निखिल)

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