Meerut News: महज 3 दिन में कैदियों ने बना डाले 7 हजार मास्क, जानें कितनी मिलती है मजदूरी

बीडी पांडे ने बताया कि जेल में मास्क बनाने का काम युद्धस्तर पर जारी है.

बीडी पांडे ने बताया कि जेल में मास्क बनाने का काम युद्धस्तर पर जारी है.

उन्होंने बताया कि पिछली बार मेरठ जिला कारागार से आसपास की जेलों में भी मास्क (Masks) की सप्लाई हुई थी. और इस बार भी ऑपरेशन मास्क जेल के अंदर शुरु हो गया है.

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मेरठ. देश कोरोना के खिलाफ जंग लड़ रहा है. कोई मास्क लगाकर कोरोना वायरस (Corona virus) को मात दे रहा है तो कोई मास्क बनाकर. मेरठ (Meerut) में तो ज़िला कारागार के बंदी मास्क लगाते भी हैं और बनाते भी हैं. आपको जानकर अच्छा लगेगा कि यहां चालीस बंदी सिर्फ और सिर्फ मास्क बनाने के कार्य में ही घंटों मशक्कत कर रहे हैं. जेल की चारदीवारी में कोरोना का रक्षा कवच कितनी तेज़ी से बन रहा है, इसका अंदाज़ा आप इस बात से भी लगाईए कि मेरठ ज़िला कारागार के बंदियों ने  तीन दिन में सात हजार मास्क बना डाले. वरिष्ठ जेल अधीक्षक बीडे पांडे का कहना है कि 40 बंदी इसी काम में लगे हुए हैं. उन्होंने बताया कि पिछली बार मेरठ जिला कारागार से आसपास की जेलों में भी मास्क (Masks) की सप्लाई हुई थी. और इस बार भी ऑपरेशन मास्क जेल के अंदर शुरु हो गया है.

बीडी पांडे ने बताया कि जेल में मास्क बनाने का काम युद्धस्तर पर जारी है. उन्होंने कहा कि 12 से 15 हजार मास्क बनाकर रिजर्व में रखे जाएंगे. वरिष्ठ जेल अधीक्षक का कहना है कि सूती कपड़े से बने मास्क में तीन लेयर के हैं. इन्हें भाप से सैनिटाइज कर पैक किया जाता है. दिनभर में एक बंदी करीब 100-125 मास्क तैयार कर रहा है. इसके लिए प्रति मास्क बंदी को एक रुपया भी मिलता है.

बार-बार इस्तेमाल किया जा सकता है

वरिष्ठ जेल अधीक्षक ने बताया कि पिछले वर्ष कारागार में तैयार हुए मास्क बागपत और गौतमबुद्धनगर के अलावा अन्य जेलों में भी भेजे गए थे. एक लाख से अधिक मास्क मेरठ जिला प्रशासन को भी वितरित करने के लिए उपलब्ध कराए गए थे. बीडी पांडेय ने बताया कि सभी बंदियों का काम बंटा हुआ है. कोई मास्क बनाने में कपड़े को काटने का काम करता है, तो कोई सिलने का. इसी तरह भाप से करीब 20 मिनट तक सैनिटाइज करने वाले अलग बंदी हैं. उन्होंने कहा कि जरूरत पडऩे पर तीन दिन में 10 हजार मास्क तैयार किए जा सकते हैं. एक मास्क बनाने में करीब सात से आठ रुपये की लागत आती है. इस मास्क को धोकर बार-बार इस्तेमाल किया जा सकता है.
वाकई में ये पहल कमाल की है

उन्होंने बताया कि जेल में सैनिटाइजर भी बनाया जा रहा है. दौराला शुगर मिल से आइसो प्रोपाइल एल्कोहल ले लिया था. इसके बाद विशेषज्ञ की मदद से अन्य सामान मिलाकर सैनिटाइजर को तैयार किया जा रहा है. कैदी-बंदी से लेकर अफसर और कर्मचारी भी उसी सैनिटाइजर का इस्तेमाल करते हैं. वाकई में ये पहल कमाल की है.
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