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रावण की ससुराल में इस साल भी दामाद को 'जलाने' की हो रही तैयारी, सैकड़ों साल पुरानी है दशहरे की यह परंपरा

रावण की ससुराल में इस साल भी दामाद को 'जलाने' की हो रही तैयारी, सैकड़ों साल पुरानी है दशहरे की यह परंपरा

Meerut: रावण की ससुराल में उसके वध की तैयारी शुरू, स्तंभ गाड़ कर किया गया भूमि पूजन

Meerut: रावण की ससुराल में उसके वध की तैयारी शुरू, स्तंभ गाड़ कर किया गया भूमि पूजन

Meerut Dussehra Celebration: ससुराल में दामाद के 'वध' की परंपरा विजयादशमी के त्योहार से जुड़ी है. उत्तर प्रदेश का मेरठ, पौराणिक कथाओं में मयराष्ट्र के नाम से जाना जाता रहा है, जो लंकापति रावण की पत्नी मंदोदरी का मायका है. दशहरे में इस साल भी यहां रावण-वध की तैयारी हो रही है.

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मेरठ. ससुराल में दामाद का सत्कार, उसके खाने-पीने और रहने का विशेष इंतजाम करने की बातें आपने सुनी होंगी. लेकिन क्या ऐसा कभी सुना है कि ससुराल में ‘दामाद का वध’ किया जाता हो, वह भी पूरे ताम-झाम के साथ? उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर की यह कहानी कुछ ऐसी ही है. यहां हर साल शहर के दामाद के रूप में मशहूर रावण का वध किया जाता है. जी हां, ये वही रावण हैं, जिन्हें आपने रामायण में लंकापति के रूप में जाना है. देश के अन्य शहरों की तरह हर साल दशहरे के मौके पर मेरठ में भी लंकापति रावण का पुतला दहन किया जाता है. इसके लिए पूरी तैयारी की जाती है. कहते हैं कि सैकड़ों साल से यह परंपरा चली आ रही है. इस साल भी नवरात्र के नजदीक आने के साथ ही मेरठ के दामाद के वध की तैयारियां शुरू हो गई है.

दरअसल, पौराणिक गाथाओं में मेरठ का नाम मयराष्ट्र के रूप में लिया जाता रहा है. राजा मय की बेटी थी मंदोदरी, जिनका विवाह त्रिलोकविजयी लंकापति रावण के साथ हुआ था. इन्हीं कथाओं के मुताबिक मेरठ, लंका की महारानी मंदोदरी का मायका है और रावण की ससुराल. मेरठ में हर साल रावण का पुतला दहन किया जाता है और वह भी गाजे-बाजे और ढोल नगाड़ों के साथ. मेरठ में रावण के वध की तैयारी शुरू हो गई है, जिसके लिए स्तंभ गाड़ कर भूमि पूजन भी कर दिया गया है.

असत्य पर सत्य की विजय का सबसे बड़ा उदाहरण हिंदुओं के पवित्र ग्रंथ रामायण में दर्ज है, जिसमे बताया गया है कि रावण असुर था, अत्याचारी था, जिसने भगवान श्री राम की पत्नी  सीता का हरण कर लिया था और इसीलिए भगवान श्रीराम ने लंका पर आक्रमण किया और लंकापति रावण का वध कर दिया। लेकिन यह सब बातें त्रेता युग की हैं. आज हम आपको इसी सत्य से रूबरू कराते हैं. दरअसल मेरठ रावण की पत्नी मंदोदरी का मायका है. मेरठ के इसी भैसाली मैदान में पहले तालाब हुआ करता था. कहा जाता है कि मंदोदरी इसी तालाब में नहाने के बाद विल्बेश्वर मंदिर में जाकर भगवान शिव की आराधना करती थी. विल्बेश्वर मंदिर आज भी लाखों लोगों की आस्था का प्रतीक है. हालांकि वक्त के साथ तालाब ग्राउंड में तब्दील हो गया, लेकिन मेरठ के लोग इसी मैदान में सैकड़ों सालों से दशहरे के दिन रावण का पुतला जलाते आये है.

त्रेता युग से चली आ रही परंपरा
मेरठ के कैंट स्थित भैसाली मैदान में ढोल नगाड़े और गाजे बाजे के साथ रावण के वध की तैयारी की जा रही है. जिस जगह पर रावण के वध की लीला की जानी है उस जगह का भूमि पूजन किया जा रहा है. शहर के गणमान्य लोग इस भूमि पूजन का हिस्सा बनकर खुद को गौरवान्वित महसूस करते हैं. लेकिन जब न्यूज़18 ने उनसे सवाल किया कि ससुराल में दामाद के वध की लीला यह कैसी परंपरा है तो उन्होंने कहा कि असत्य पर सत्य की विजय के लिए यह परंपरा त्रेता युग से चली आ रही है और कलयुग में भी इस परंपरा का उसी तरह निर्वाहन किया जा रहा है.

मेरठ के दामाद हैं रावण
वैसे तो रावण का पुतला देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी जलाया जाता है. बुराई पर अच्छाई की विजय का यह सबसे बड़ा प्रतीक है, लेकिन यह घटना उस समय और भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाती है जब इस घटना की लीला का मंचन  रावण की ससुराल यानी मंदोदरी के मायके में किया जाए. सैकड़ों सालों से मेरठ के लोग मेरठ के दामाद रावण के वध का मंचन करते आए हैं.

Tags: Meerut news, Meerut news today, UP news, Up news in hindi

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