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मेरठ:-बॉर्डर पर मानव रहित यह सोलर मशीन गन दुश्मनों को कर देंगी नेस्तनाबूद

मेरठ:-बॉर्डर पर मानव रहित यह सोलर मशीन गन दुश्मनों को कर देंगी नेस्तनाबूद

 श्याम

 श्याम चौरसिया द्वारा बनाई गई मानव रहित सोलर मशीन गन

यह मशीन गन इलेट्रॉनिक है. इसे संचालित करने के लिए किसी इंसान की जरुरत नहीं होगी. इसका इस्तेमाल अति दुर्गम बॉर्डर एरिया तथा आतंकियों से सामना करने के लिए किया जा सकेगा. इसमें लगे सेंसर कैमरे दुश्मनों पर दूर से ही नजर रख सकतें है.आस-पास किसी तरह की आहट होने पर गन जवानों को चौकन्ना करने के साथ खुद निर्णय लेकर दुश्मनों पर गोलियां बरसा देगी.

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    मेरठ: जिस तरीके से आधुनिकता दौर में रिमोट कंट्रोल के माध्यम से ही उपकरणों का संचालन हो रहा है. इसी तरीके से मेरठ के एक कॉलेज के इन्नोवेटर द्वारा ही ऐसी मानवरहित मशीन गन तैयार की है. जो बॉर्डर पर देश की सीमाओं की सुरक्षा करेगी.साथ ही किसी भी प्रकार की कोई दुश्मन हलचल करेगा. तो उसका मौके पर ही मुंह तोड़ जवाब भी देगी. यह दावा एमआईईटी इंजीनियरिंग कॉलेज के इन्नोवेटर श्याम चौरसिया द्वारा किया गया है. उनकी मानें तो बॉर्डर पे तैनात जवानों की सुरक्षा के लिए व आतंकियों का सामना करने के लियें एक ( मानव रहित बॉर्डर सिक्योरिटी सिस्टम ) तैयार किया है. इस डिवाइस को मानव रहित सोलर मशीन गन ) का नाम दिया है .

    इस तरह करेगी मशीन गन काम
    यह मशीन गन इलेट्रॉनिक है. इसे संचालित करने के लिए किसी इंसान की जरुरत नहीं होगी. इसका इस्तेमाल अति दुर्गम बॉर्डर एरिया तथा आतंकियों से सामना करने के लिए किया जा सकेगा. इसमें लगे सेंसर कैमरे दुश्मनों पर दूर से ही नजर रख सकतें है.आस-पास किसी तरह की आहट होने पर गन जवानों को चौकन्ना करने के साथ खुद निर्णय लेकर दुश्मनों पर गोलियों की बौछार भी करने में सक्षम होगी.अभी छात्र ने प्रोटोटाईप तैयार किया है.इसकी मारक छमता तक़रीबन 500 मीटर तक होगी.इस मानव रहित गन को ऑटोमेटिक और मैनुल भी कर सकतें है.ऑटोमेटिक करने पर इसे संचालित करने की जरुरत नहीं पडती. मैनुअल करने पर इसे इंटरनेट या रिमोट से हमारे जवान संचालित कर सकेंगे .गन सोलर से चार्ज होगी और कई महीनें धूप ना मिलने पर भी इसमें लगी बैटरी ये काम कर सकता है .

    इस तरह किया गया मशीन गन का निर्माण
    इस गन को रिमोट व इंटरनेट की सहायता से बिना दुश्मन की नजर में आए कई किलोमीटर दूर से हमारे जवान सुरक्षित रह कर आतंकियों पर गोलीबारी कर सकतें हैं. इस उपकरण के तीन पार्ट है. यह तीनो वायरलैस टेकनोलॉजी की मदद से एक दूसरे के संपर्क में रहते है. जैसे ही कोई आतंकी हमारे बॉर्डर को पार करने की कोशिश करता है. या सेंसर के रेंज में कोई हलचल होती है. तो यह सोलर गन को एक अलर्ट भेजता है. जिससे उस बॉर्डर ऐरिया में मशीन गन एक्टिवेट हो जाएगी तथा टार्गेट पे गोलियां बरसाना शुरू कर देगी. यही नहीं मशीन बनाने वाले श्याम चौरसिया का तो यहां तक दावा है कि मानव रहित मशीन गन से बॉर्डर ऐरिया में किसी जानवर या बेगुनाह की जान को नुकसान ना पहुंचे इसलिए यह गोलियां दागने से पहले कंट्रोल रूम को फोटो भेज कर सूचित करेगी .

    डीडीआरडीओ को को भी भेजा गया पत्र
    एमआईईटी इंजीनियरिंग कालेज के वाइसचेयर मैन पुनीत अग्रवाल ने डीडीआरडीओ को भी इस संबंध में पत्र भेजा है. गौरतलब है कि इसका प्रथम प्रोटोटाईप बनाने में लगभग 25000 का खर्च आया है. यह 360 डिग्री में घूम कर दुश्मनों को टार्गेट कर सकती है. इसका वजन प्रोटोटाईप में 40 किलो ग्राम है. इस उपकरण को बनाने में रेंज का मोशन सेंसर कैमरा, सेंसर ट्रिगर, मेटल पाईप, ट्रांसमीटर रिसिवर, नाईट विजन सेंसर, 12 वोल्ट सोलर प्लेट, जी ऐस एम अलार्म, 6 वोल्ट बैटरी लगायी गई है.

    रिपोर्ट
    विशाल भटनागर
    मेरठ

    Tags: मेरठ

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