मेरठ: वैक्सीनेशन कराने की होड़, टीका लगवाने के लिए स्लॉट बुक कराकर शहर से गांव पहुंच रहे युवा

मेरठ में वैक्सीनेशन कराने के लिए होड़ मची हुई है. यहां पर लोग रजिस्ट्रेशन कराने के बाद वैक्सीन लगवाने गांव जा रहे हैं.

मेरठ में वैक्सीनेशन कराने के लिए होड़ मची हुई है. यहां पर लोग रजिस्ट्रेशन कराने के बाद वैक्सीन लगवाने गांव जा रहे हैं.

मेरठ में वैक्सीनेशन कराने के लिए होड़ मची हुई है, इसका अंदाजा आप इस बात से लगाइए कि अगर लोगों को शहर में स्लॉट बुक कराने में दिक्कतें आ रही हैं तो वो गांवों में अपना शेड्यूल फिक्स कर रहे हैं. खासतौर से युवा गांव पहुंचकर खुद को वैक्सीनेट करा रहे हैं.

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मेरठ. मेरठ में वैक्सीनेशन कराने के लिए युवाओं में होड़ मच गई है. इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि अगर लोगों को शहर में स्लॉट बुक कराने में दिक्कतें आ रही हैं तो वो गांवों में अपना शेड्यूल फिक्स कर रहे हैं. खासतौर से युवा गांव पहुंचकर खुद को वैक्सीनेट करा रहे हैं. मेरठ के सरदार वल्लभ भाई पटेल स्थित वैक्सीनेशन सेंटर पर आलम ये है कि यहां 100 फीसदी टीकाकरण हो रहा है. न्यूज़ 18 की टीम ने जब इस सेंटर का जायज़ा लिया तो मालूम चला लोग दूर दूर से यहां वैक्सीनेट होने के लिए पहुंचे हुए हैं. वैक्सीनेशन के इस महाभियान को लेकर ख़ासतौर से अभिभावक बेहद खुश हैं.

पैरेंट्स का कहना है कि योगी आदित्यनाथ ऐसे बिरले मुख्यमंत्री है जो इस संकटकाल में जनता के बीच फौलाद बनकर खड़े रहे हैं. अभिभावकों ने मुख्यमंत्री से अपील की है कि जल्द से जल्द बच्चों के लिए भी टीके का इंतज़ाम किया जाए ताकि वो तीसरी लहर की आशंका के मद्देनज़र सेफ हो सकें. आलम ये है कि शहर में वैक्सीनेशन सेंटर का स्लॉट पांच मिनट में फुल हो रहा है. ऐसे में लोगों का रुख अब गांव-देहात के वैक्सीनेशन सेंटर की तरफ हुआ है. ग्रामीण क्षेत्र के अस्पतालों में ज्यादातर लोग अपनी गाड़ियों से वैक्सीन लगवाने पहुंच रहे हैं. ऐसे में इन केंद्रों पर भी अब भीड़ उमड़ रही है.

गांवों में शहरवासी लग्जरी गाड़ियों से लोग पहुंच रहे हैं और टीकाकरण करा रहे हैं. ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद और दिल्ली बॉर्डर के रहने वाले भी यहां के गांवों में पहुंचकर टीकाकरण करा रहे हैं. पूछने पर पता चला कि शहरी क्षेत्र में स्लॉट आसानी से नहीं मिल पाता, इसलिए गांव-देहात का सेंटर चुन लिया.

45 प्लस के लिए ग्रामीण क्षेत्र में रोजाना 95-98 फीसदी वैक्सीनेशन हो रहा है. जबकि शहरी क्षेत्र में यह 40-45 फीसदी है. इसकी वजह यह है कि ग्रामीण क्षेत्र का सेंटर चुनने वाले वे लोग होते हैं जिन्हें शहरी क्षेत्र में आसानी से स्लॉट नहीं मिल पाता. ऐसे में जब उन्हें स्लॉट में ग्रामीण क्षेत्र का सेंटर मिल जाता है तो वह वैक्सीन लगवाने का मौका नहीं चूकने देते.
शहरी क्षेत्र की अपेक्षा ग्रामीण क्षेत्रों में वैक्सीनेशन फीसदी ज्यादा है. इसकी वजह यही है कि वहां पर जागरुक लोग पहुंच रहे हैं. अब शहरी क्षेत्र के लोग स्लॉट न मिलने की स्थिति में मवाना, बहसूमा, परीक्षितगढ़ जैसे ग्रामीण इलाकों के सेंटर का स्लॉट बुक कर रहे हैं.

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