मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद क्या सुनील राठी बन जाएगा यूपी का अगला डॉन?

गैंगस्टर सुनील राठी के आपराधिक इतिहास को देखें तो उस पर 25 से 30 मुकदमे दर्ज हैं. जिनमें ज्यादातर मुकदमे रंगदारी वसूली और हत्या के हैं.

SHAHJAD RAJPUT | News18 Uttar Pradesh
Updated: July 12, 2018, 8:01 PM IST
मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद क्या सुनील राठी बन जाएगा यूपी का अगला डॉन?
पश्चिम का कुख्यात गैंगस्टर सुनील राठी की फाइल फोटो
SHAHJAD RAJPUT | News18 Uttar Pradesh
Updated: July 12, 2018, 8:01 PM IST
पश्चिम यूपी में क्राइम करने वाले कुख्यात सुनील राठी की दहशत महज कुछ इलाकों में थी. लेकिन पूर्वांचल के माफिया डॉन मुंन्ना बजरंगी की हत्या बाद से वह अखबारों और टीवी न्यूज चैनलों की हेडलाइन बना हुआ है. जिस कुख्यात अपराधी को अब तक पश्चिम और उत्तरखंड की जनता ही जानती थी, अब उसे पूरे यूपी सहित देश में पहचान मिली है. इसके बाद सवाल उठने लगे हैं कि क्या सुनील राठी का प्लान भी यही तो नही था? यानी मुन्ना बजरंगी को मारकर क्राइम की दुनिया में खुद को डॉन के रूप में स्थापित करना. अगर यह सही है तो मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद जहां एक आतंक का खात्मा हुआ है, वहीं अब यूपी की क्राइम की दुनिया में एक नए आतंक की कहानी शुरू होने जा रही है.

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गैंगस्टर सुनील राठी के आपराधिक इतिहास को देखें तो उस पर 25 से 30 मुकदमे दर्ज हैं. जिनमें ज्यादातर मुकदमे रंगदारी वसूली और हत्या के हैं. जाहिर है सुनील और मुंन्ना बजरंगी के क्राइम करने का तरीका एक जैसा ही है. सुनील पर भी व्यपारियों से हफ्ता वसूली, रंगदारी और हत्या कराने के कई मामले दर्ज हैं. वहीं मुन्ना बजरंगी भी रंगदारी और सुपारी लेकर हत्या करने में माहिर था. अब मुन्ना बजरंगी के खात्में के बाद क्या सुनील राठी उसकी जगह लेगा?

इस मामले में एसपी बागपत जयप्रकाश कहते हैं कि राठी का नेटवर्क उत्तराखंड और पश्चिम यूपी में रहा है. लेकिन अभी यह कहना जल्दबाजी होगा कि बजरंगी की हत्या सियासी थी या फिर क्राइम की दुनिया में वर्चस्व के लिए. उन्होंने कहा कि यह विवेचना का विषय है. उसी के बाद कुछ कहा जा सकता है.

21 साल की उम्र में उठाए थे हथियार

मुन्ना बजरंगी की तरह सुनील राठी ने भी 21 साल की उम्र से ही हथियार उठा लिए थे. बागपत जिला कारागार में आजीवन कारावास की सजा काट रहे कुख्यात अपराधी सुनील राठी ने 21 साल की उम्र से हत्या, लूट और रंगदारी की वारदातों को अंजाम दिया. वर्तमान समय में सुनील राठी की मां एवं पूर्व चेयरपर्सन राजबाला चौधरी भी रंगदारी के मामले में रुड़की जेल में बंद हैं.

टीकरी कस्बा निवासी सुनील राठी के पिता एवं टीकरी के चेयरमैन नरेश राठी सहित तीन लोगों की 12 दिसंबर 1999 को चुनाव की रंजिश में हत्या कर दी गई थी. इस मामले में दिल्ली पुलिस के बर्खास्त सिपाही रणवीर राठी का नाम सामने आया था. रणवीर राठी वही शख्स था, जिसने फूलन देवी के हत्यारोपी शेर सिंह राणा को तिहाड़ जेल से फरार कराया था.
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इसके बाद सुनील राठी की मां राजबाला चौधरी ने वर्ष 2000 नगर पंचायत का चुनाव लड़ा. उनके सामने टीकरी के चेयरमैन सोमपाल राठी के भाई महक सिंह खड़े थे. 21 जून 2000 में सुनील राठी ने अपने साथियों के साथ मिलकर महक सिंह और उसके भाई मोहकम सिंह की हत्या कर दी. इस डबल मर्डर में सुनील राठी आजीवन कारावास की सजा काट रहा है. 18 अगस्त 2000 में सुनील राठी ने दिल्ली में शोरूम लूटा था. विरोध करने पर तीन लोगों की गोली मारकर हत्या की. इसके बाद से वह जुर्म की दुनिया में धंसता चला गया.

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उत्तराखंड, दिल्ली, यूपी समेत अन्य राज्यों में भी नेटवर्क
उत्तराखंड, दिल्ली, यूपी समेत अन्य राज्यों में भी उसने अपना आपराधिक नेटवर्क खड़ा किया. लेकिन वर्ष 2000 में पुलिस ने उसे हरिद्वार के कनखल की शिवपुरी कॉलोनी से गिरफ्तार कर लिया. इसके बाद उसने जेल के अंदर से ही अपना गिरोह सक्रिय रखा. कई सालों तक रुड़की जेल में बंद रहा. जेल से भी वह अपना गैंग चलाता रहा. इसके बाद उसे तिहाड़ जेल में शिफ्ट किया गया. यहां पर भी वह जेल से ही अपराध करता रहा.

तिहाड़ के बाद उसे बागपत जेल में शिफ्ट किया गया. बागपत जेल से उसने रुड़की के चिकित्सक से रंगदारी मांगी. अब वह बागपत जेल से अपना गैंग चला रहा है. जेल में एकतरफा उसका ही राज चलता है. बागपत के भूरा फरारी कांड में भी सुनील राठी का नाम सामने आया और मुकदमा चल रहा है. राठी के गुर्गों ने वर्ष 2011 में रुड़की जेल के बाहर डिप्टी जेलर नरेंद्र सिंह की हत्या की थी. इसके बाद सुपारी लेकर हत्या कराने में उसका नाम चलने लगा.

वर्ष 2014 में रुड़की में जेल के बाहर विरोधी चीनू पंडित गैंग पर गोलीबारी करवाकर अपने वर्चस्व को कायम किया. उसकी गैंग में कई शार्प शूटर हैं, जिनकी मदद से राठी जेल से अपना नेटवर्क ऑपरेट करता है. अब बागपत जेल में माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी की हत्या से वह एक बार फिर सुर्खियों में आया है.

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रंगदारी के लिए एटीएम की तरह होता है राठी के नाम का इस्तेमाल
वर्ष 2000 में पुलिस के हत्थे चढ़े सुनील राठी के कब्जे से तब हेंड ग्रेनेड (बम) बरामद हुआ था, ऐसे में राठी के आपराधिक छवि का अंदाजा साफ-साफ लगाया जा सकता है. कुख्यात सुनील राठी के नाम का इस्तेमाल एटीएम की तर्ज पर होता रहा है. राठी के नाम से हरिद्वार में कारोबारियों, प्रॉपर्टी डीलरों से उगाही का कारोबार बदस्तूर जारी है.

विवादित भूमि के पचड़े भी राठी के नाम पर ही एकदम सुलझते रहे हैं. हरिद्वार में राठी की जमीन बेहद ही मजबूत मानी जाती है. इसका खुलासा समय-समय पर होता भी रहा है और उसके गैंग में नए-नए युवाओं की एंट्री भी होती रही है. राठी के लिए हत्याएं करने वाले शूटरों की टीम अलग होती है, लेकिन उसके नाम को अपराध जगत का ब्रांड बनाकर बेचने वाले चेहरे अलग हैं.

राठी के नाम से ही घबराहट पैदा हो जाती है, लिहाजा पुलिस की शरण में जाने का सवाल ही पैदा नहीं होता. क्योंकि राठी ने कई हत्याएं केवल अपनी निजी दुश्मनी के चलते ही करवाई है. उसी के बूते उसका चौथ का धंधा तरक्की करता चला गया. राठी के नाम को इस्तेमाल करने वाले गुर्गों की भी लंबी चौड़ी फौज है. वे राठी के नाम से धमकी भरे फोन कॉल्स करते या करवाते हैं और फिर रंगदारी वसूलते हैं. या फिर विवादित भूमि के पंगे ‘भाई’ के नाम का इस्तेमाल कर सुलझाते हैं और जमकर वारे न्यारे करते हैं.

शातिर सुनील राठी अपराध को कभी खुद अंजाम नहीं देता, बल्कि अपने गुर्गों से हत्या, फिरौती जैसे बड़े अपराध करवाता है. रियल इस्टेट और अवैध खनन में भी उसका सीधा नाम नहीं जुड़ता है. अलबत्ता खास गुर्गे उसके इशारे पर कारोबार चलाते हैं.

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पुलिस के मुताबिक काफी शातिर है राठी
उसके शातिर अंदाज से कई पुलिस अधिकारी गच्चा खा चुके  हैं. सुनील राठी के खिलाफ दर्ज मामलों की जांच के दौरान उससे हुई पूछताछ कर चुके अफसरों से कुछ इस तरह का फीडबैक मिली है. एक अधिकारी की मानें तो राठी हार्ड क्राइम में माहिर नहीं है, लेकिन बेहद शातिर है. गुर्गों को गैंग में शामिल करने में बेहद सतर्क रहता है. उसके शातिर दिमाग का ही परिणाम है कि उसने 15 दिसंबर 2014 को बागपत पेशी पर ले जाए जा रहे अपने साथी कुख्यात अमित भूरा को देहरादून पुलिस के चंगुल से छुड़ा लिया था.

जेल में तैनात कर्मियों को अपने जाल में फांसने की उसे महारत है. वह जेल से ही रंगदारी का बड़ा नेटवर्क चलाता है. रुड़की के चिकित्सक से 50 लाख की रंगदारी मांगने के आरोप लगे थे. इस मामले में राठी की मां राजबाला को गिरफ्तार किया गया था.

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अफसरों की मानें तो राठी कभी क्रोधित नहीं होता. पूछताछ में घिर जाता है तो अफसरों के पैर पकड़ने से भी नहीं हिचकता. कुख्यात सुनील राठी अपनी सुरक्षा को लेकर बेहद सजग है. उसे पुलिस सुरक्षा पर बिल्कुल भी भरोसा नहीं है. जब भी रुड़की कोर्ट में पेशी के लिए गया तो चप्पे-चप्पे पर उसके गुर्गे तैनात रहे. खुफिया विभाग के पास भी इसकी जानकारी है कि जेल से निकलने से पहले राठी सुनिश्चित कर लेता है कि गुर्गे तैनात रहें.

नवंबर 2017 में देवपाल राणा की रुड़की रामनगर कोर्ट परिसर में हत्या के बाद राठी और सतर्क हो गया है. राठी को सबसे ज्यादा खतरा रुड़की के कुख्यात चीनू पंडित से है. अपने खास गुर्गे देवपाल राणा की हत्या के बाद राठी काफी हद तक कमजोर हो गया था. देवपाल ही राठी के प्रापर्टी के कारोबार को जेल में रहकर संचालित कर रहा था.

देवपाल की हत्या के बाद से राठी ने गुर्गों को और भी सजग कर दिया है. अपराध की दुनिया में कुख्यात सुनील राठी का दुश्मन कभी उसका चेला रहा चीनू पंडित ही है, लेकिन मुन्ना बजरंगी के कत्ल से अब उसने मुख्तार गैंग को चुनौती दी है. जिसके बाद यह कहा जा रहा है कि सुनील राठी शायद अब यूपी का नया डॉन बनने का सपना देख रहा है.
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