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गणतंत्र दिवस: मेरठ में तिरंगा बनाने वाले परिवारों का जुनून बोले-'आखिरी सांस तक करेंगे ये काम'
Meerut News in Hindi

News18 Uttar Pradesh
Updated: January 25, 2020, 11:22 PM IST
गणतंत्र दिवस: मेरठ में तिरंगा बनाने वाले परिवारों का जुनून बोले-'आखिरी सांस तक करेंगे ये काम'
गणतंत्र दिवस 2020

देश की राजधानी दिल्ली (Delhi) समेत कई राज्यों में सरकारी, गैर-सरकारी, राजनीतिक और सामाजिक संगठनों के दफ्तरों पर मेरठ (Meerut) में ही तैयार खादी के तिरंगे (National Flag) फहरते हैं...

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मेरठ. क्या आप जानते हैं पूरे देश में फहराया जाता है मेरठ का बना खादी का तिरंगा (Tricolor). तिरंगे पर मेरठ से News 18 की ख़ास रिपोर्ट- पूरे देश में गणतंत्र दिवस का पर्व उल्लास और उमंग के साथ मनाया जाता है. लेकिन कम ही लोग जानते हैं कन्याकुमारी से लेकर कश्मीर तक मेरठ का बना हुआ तिरंगा ही फहराया जाता है. शांति, त्याग और समृद्धि के रंगों को ख़ुद में समेटे मेरठ का तिरंगा देशभर में लहरा रहा है.

बजट की कमी से प्रभावित हुआ है काम!
गणतंत्र दिवस के मौके पर भी मेरठ के गांधी आश्रम की ओर से तैयार कराए गए तिरंगे देशभर के सरकारी दफ्तरों में लहराएंगे. गांधी आश्रम के संचालक के मुताबिक इस गणतंत्र दिवस के लिए दस हज़ार से ज्यादा तिरंगे तैयार किए गए हैं. जिन्हें देश के विभिन्न राज्यों से आई डिमांड पर भिजवाया गया है. क्रान्ति की नगरी मेरठ के गांधी आश्रम की ओर से तिरंगे बनाने का काम बड़े पैमाने पर होता है. पिछले कुछ वर्षों से स्टाफ की कमी और बजट की वजह से काम में कमी ज़रुर आई है. लेकिन तिरंगा बनाने वालों के जज्बे में कमी नहीं आई है. मेरठ में गांधी आश्रम के ऑर्डर पर सुभाषनगर के नत्थे सिंह का परिवार तिरंगा बनाने के काम में जुटा हुआ है. आपको बता दें कि नत्थे सिंह का निधन हो चुका है लेकिन तिरंगों को बनाने का काम उनके परिवार ने संभाल रखा है. उनके परिवार के सदस्यों का कहना है कि वो आखिरी सांस तक ये काम करते रहना चाहते हैं.

tricolor, national flag
मेरठ के गांधी आश्रम में बनाया जाता है तिरंगा


देश की राजधानी दिल्ली समेत कई राज्यों में सरकारी, गैर-सरकारी, राजनीतिक और सामाजिक संगठनों के दफ्तरों पर मेरठ में ही तैयार खादी के तिरंगे फहरते हैं. मेरठ में तिरंगा बनाने के कार्य में जुटे कारीगरों ने news 18 से बातचीत में कहा 'हम बस यही दुआ करते हैं कि हमारा सारा जीवन तिरंगा बनाने में ही समर्पित रहे'. जबकि  आपको यह जानकर हैरत होगी कि यही कारीगर आज रोज़ी-रोटी के संकट से जूझ रहे हैं बावजूद इसके तिरंगा बनाने के उनके जज्बे में कमी नहीं आई है.

गांधी आश्रम के पदाधिकारी बताते हैं कि गणतंत्र दिवस के मौके पर हजारों की संख्या में तिरंगे मेरठ के गांधी आश्रम में तैयार किए गए हैं. कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक मेरठ के बने हुए तिरंगे ही फहर रहे हैं. जम्मू-कश्मीर, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश में भी यहीं से ध्वज भेजे जाते हैं. मेरठ में ही राष्ट्रीय ध्वज तैयार होता है. उनका कहना था कि गांधी आश्रम में काम कर रहे लोग बस यही गीत गुनगुनाते हैं, 'मेरी जान तिरंगा है'. मेरठ के गांधी आश्रम में आज भी पहले की तरह ही तिरंगा लकड़ी के सांचे से बनाया जाता है. फिर सांचे के बीच में कपड़ा रखकर उस पर चक्र बनाया जाता है, इसके बाद कपड़े को केसरिया और हरे रंग से रंगा जाता है. निश्चित तौर पर देश का हर नागरिक तिरंगे को अपनी सांस में महसूस करता है.


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First published: January 25, 2020, 11:20 PM IST
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