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उधार के धनुष से बनी राष्ट्रीय स्तर की तीरंदाज, अब ओलंपिक में निशाना लगाने के लिए कर रही मजदूरी

मनीषा मजदूरी कर एक दिन में ढाई सौ रुपये कमा रही है.
मनीषा मजदूरी कर एक दिन में ढाई सौ रुपये कमा रही है.

मनीषा गागट तीरंदाजी (Archery) में राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर कई पदक जीत चुकी है. लेकिन उसके पास प्रैक्टिस के लिए खुद का धनुष भी नहीं है. उधार के धनुष से मनीषा प्रैक्टिस करती है.

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मेरठ. यूपी के मेरठ में राष्ट्रीय स्तर की तीरंदाज (Archer) बिटिया दिहाड़ी मजदूरी करने को मजबूर है. चौकीदार की होनहार बेटी इसलिए मजदूरी कर रही है कि एक दिन वो अपने पैसे से धनुष खरीद सकेगी. और ओलंपिक मेडल (Olympic Medal) जीतने का सपना पूरा कर पाएगी.

मेरठ की बेटी मनीषा गागट तीरंदाजी में राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर कई पदक जीत चुकी है. लेकिन उसके पास प्रैक्टिस के लिए खुद का धनुष भी नहीं है. उधार के धनुष से मनीषा प्रैक्टिस करती है. उसके पिता चौकीदार हैं. घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है. इसलिए मनीषा खुद का धनुष खरीदने के लिए मजदूरी कर रही है. रोज़ाना प्रैक्टिस के बाद मनीषा दिहाड़ी मजदूरी करने निकल पड़ती है.

मनीषा का कहना है कि वह अपना सपना हर हाल में पूरा करेगी, फिर चाहे इसके लिए उसे ईंट गारा ही क्यों न करना पड़े.



जीत चुकी है कई पदक  
मनीषा राज्य स्तर पर एक स्वर्ण पदक, चार रजत और चार कांस्य पदक जीत चुकी है. खेलों इंडिया में भी वो कांस्य पदक जीत चुकी है. जूनियर सीनियर नेशनल चैंपियनशिप में भी वो प्रतिभागी रह चुकी है. अब उसका सपना ओलम्पिक में पदक जीतना है.

सरकार से मदद की आस नहीं 

मनीषा मजदूरी कर रोजाना ढाई सौ रुपए कमा ले रही है. उसका कहना है कि इन्ही पैसों को जमाकर एक दिन वह अपने लिए धनुष खरीदेगी. और फिर उसी धनुष से ओलम्पिक के मेडल पर निशाना लगाएगी. मनीषा को सरकार से किसी मदद की आस नहीं है. उसे बस एक मात्र धनुष की जरूरत है.

परिवारवालों का कहना है कि मनीषा अपने दम पर अपना मुकाम बनाना चाहती है. हालांकि उसके रास्ते में आर्थिक परेशानी है. पर उसका हौसला बुलंद है. अगर सरकार चाह ले तो उसके हौसले को लंबी उड़ान भरने का मौका मिल जाएगा.
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