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न्यूरोकाॅन में जुटे देश के नामी सर्जन, मेरठ मेडिकल कॉलेज में सेमिनार का आयोजन
Meerut News in Hindi

News18 Uttar Pradesh
Updated: February 22, 2020, 11:28 PM IST
न्यूरोकाॅन में जुटे देश के नामी सर्जन, मेरठ मेडिकल कॉलेज में सेमिनार का आयोजन
मेरठ के लाला लाजपतराय मेडिकल कॉलेज में न्यूरोकॉन का आयोजन

मेरठ मेडिकल कॉलेज में आज से आयोजित किये जाने वाले इस सेमिनार में पूरे देश के प्रख्यात न्यूरोसर्जन (neuro surgeon) और न्यूरोफिजीशियन (neuro physician) सम्मिलित हो रहे है...

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मेरठ. जनपद के लाला लाजपतराय मेडिकल कॉलेज (Lala Lajpat Rai Medical College) में आज से न्यूरोकॉन (Neurocon) का आगाज हुआ. न्यूरो साइंस सोसाइटी (Neuro Science Society) की ओर से आयोजित यह छब्बीसवां वार्षिक सेमिनार 23 फरवरी तक चलेगा. मेरठ न्यूरो क्लब के बैनर तले चल रहे इस सेमिनार में देश के अलग अलग हिस्सों से आए प्रख्यात न्यूरोसर्जन्स ने अपनी बात रखी.

सफाई से भी जुड़ी है न्यूरो की समस्या
डॉक्टरों ने इस दौरान लोगों को सलाह दी कि हरी सब्जियों को अट्ठाईस डिग्री (28°) तापमान वाले पानी में धोकर खाना चाहिए नहीं तो पैरासाइट सिस्टीसिरकोसिस (Parasitic cysticercosis) दिमाग में पहुंचकर मिर्गी का खतरा पैदा कर सकते हैं. बड़ोदरा से आए डॉक्टर चतुर्भुत राठौर ने मिर्गी के विभिन्न कारणों पर चर्चा करते हुए बताया कि सलाद जैसे पत्तागोभी, गाजर और जमीन के नीचे पैदा होने वाली सब्जियों से बीमारी का रिस्क ज्यादा रहता है इसलिए यह आवश्यक है कि इन सब्जियों को अच्छी तरह धुलकर ही खाया जाए. डॉक्टर चतुर्भुज ने कहा कि भारत में यूपी और तमिलनाडु में न्यूरोसिस्टीसिरकोसिस (Neurocysticercosis) के मरीजों की संख्या बहुत अधिक है.

मेरठ मेडिकल कॉलेज में आज से आयोजित किये जाने वाले इस सेमिनार में पूरे देश के प्रख्यात न्यूरोसर्जन और न्यूरोफिजीशियन (Neuro Physician) सम्मिलित हो रहे हैं. डॉक्टरों ने कहा कि सब्जियों, गंदे पानी, प्रदूषित फूड चेन और अन्य वजहों से दिमाग में पहुंचने वाले सिस्टीसिरकोसिस परजीवी दिमाग में पहुंचकर अनियमित करंट पैदा करने लगता है जिसका सीटी स्कैन और एमआरआई (CT Scan & MRI) में ही पता चलता है. उन्होंने कहा कि ये कीड़ा हरी सब्जियों में खासकर पत्तागोभी में ज्यादा मिलता है जो सलाद के साथ पेट में पहुंच सकता है. डॉक्टरों ने साफ किया कि सफाई की वजह से ये बीमारी यूरोप और संयुक्त राज्य अमेरिका में नहीं होती है जबकि भारत, चीन, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिकी देशों में इसके मरीज काफी ज्यादा संख्या में मिलते हैं.



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First published: February 22, 2020, 11:28 PM IST
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स्रोत: स्वास्थ्य मंत्रालय, भारत सरकार
अपडेटेड: April 09 (05:00 PM)
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स्रोत: जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी, U.S. (www.jhu.edu)
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