10 साल बाद फांसी पर लटाकाया जाएगा निठारी का 'नरपिशाच', मेरठ जेल में तैयारियां शुरू

निठारी कांड के नरपिशाच सुरेंद्र कोली को गाजियाबाद सीबीआई कोर्ट की विशेष अदालत द्वारा छठे मामले में भी फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद अटकलें तेज हैं कि उसे मेरठ के चौधरी चरण सिंह जिला कारागार में सूली पर लटकाया जा सकता है.
निठारी कांड के नरपिशाच सुरेंद्र कोली को गाजियाबाद सीबीआई कोर्ट की विशेष अदालत द्वारा छठे मामले में भी फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद अटकलें तेज हैं कि उसे मेरठ के चौधरी चरण सिंह जिला कारागार में सूली पर लटकाया जा सकता है.

निठारी कांड के नरपिशाच सुरेंद्र कोली को गाजियाबाद सीबीआई कोर्ट की विशेष अदालत द्वारा छठे मामले में भी फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद अटकलें तेज हैं कि उसे मेरठ के चौधरी चरण सिंह जिला कारागार में सूली पर लटकाया जा सकता है.

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निठारी कांड के नरपिशाच सुरेंद्र कोली को गाजियाबाद सीबीआई कोर्ट की विशेष अदालत ने छठे मामले में भी फांसी की सजा सुनाया है. इसके साथ ही अटकलें तेज हैं कि सुरेंद्र कोली को मेरठ के चौधरी चरण सिंह जिला कारागार में सूली पर लटकाया जा सकता है.

कोली को फांसी की सजा के बाद मेरठ की चौधरी चरण सिंह जिला कारागार को अलर्ट कर दिया गया है. दरअसल गाजियाबाद में फांसी देने की सुविधा न होने के कारण कोर्ट के आदेश के बाद मेरठ में नरपिशाच कोली को फांसी दी जा सकती है.

आपको बता दें कि दो साल पहले भी सुरेंद्र कोली को डासना जेल से मेरठ जेल लाया गया था. उस वक्त फांसी की तैयारी भी पूरी हो गई थी, लेकिन उससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने उसकी फांसी की सजा पर रोक लगा दी थी.



आपको बता दें कि मोनिंदर सिंह पंढेर की अय्याशी देखकर नरपिशाच सुरेंद्र कोली आपे से बाहर हो जाता था और जब तक किसी बच्चे या महिला को अपना शिकार न बना लेता, उसे शांति नहीं मिलती थी. कोली किसी को कोठी में बुलाने के बाद पहले गला घोटकर बेहोश कर देता था. इसके बाद उसके साथ दुष्कर्म करता था. फिर कलेजे और बाजू का मांस काटकर खाता था.
उसका इतने से भी मन नहीं भरता था. वह फिर शव को चाकू और कुल्हाड़ी की मदद से टुकड़े-टुकड़े कर उन्हें ठिकाने लगाता था. कोले ने करीब दर्जन भर बच्चों और युवतियों को अपना शिकार बनाया था.

दुष्कर्म और अपहरण के छठे मामले में फांसी की सजा सुनाए जाने से पहले सुरेंद्र कोली ने अदालत में अपने आप को बेक़सूर साबित करने की भरपूर कोशिश की. सातवीं पास कोली एक अधिवक्ता की तरह अपने मामलों में पूरी बहस भी करता रहा और लगाए गए आरोपों को निराधार साबित करने की भी कोशिश करता रहा.

सीबीआई की विशेष कोर्ट से फांसी की सजा सुनाई जाने के बाद मेरठ जिला कारागार के वरिष्ठ जेल अधीक्षक संतलाल यादव का कहना है कि शाषन से जो आदेश प्राप्त होगा उसके अनुरूप कार्य किया जायेगा. फ़िलहाल कोली के आने की कोई सूचना नहीं मिली है, लेकिन कोली को लेकिन हम पूरी तरह तैयार हैं.
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