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यूपी चुनाव जीतने लिए गांधी-भगत को बनाया प्रस्तावक तो पुतिन को बेस्ट फ्रेंड

यूपी चुनाव जीतने लिए गांधी-भगत को बनाया प्रस्तावक तो पुतिन को बेस्ट फ्रेंड

File Photos: PTI

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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में नामांकन करने वाले प्रत्याशी वोटरों को लुभाने के लिए अजब-गजब तरीके अपना रहे हैं, जो किसी का भी सिर चकरा सकते हैं. नोएडा विधानसभा सीट से नामांकन करने वाले निर्दलीय प्रत्याशी विनोद पवार ने महात्मा गांधी और शहीद भगत सिंह को प्रस्तावक बना दिया.

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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में नामांकन करने वाले प्रत्याशी वोटरों को लुभाने के लिए अजब-गजब तरीके अपना रहे हैं, जो किसी का भी सिर चकरा सकते हैं.

मसलन, इस बार नोएडा विधानसभा सीट से नामांकन करने वाले निर्दलीय प्रत्याशी विनोद पवार ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और महान क्रांतिकारी शहीद भगत सिंह को अपना प्रस्तावक बना दिया.

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यही नहीं विनोद पवार ने रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन को अपना बेस्ट फ्रेंड बताते हुए उनका नाम भी प्रस्तावकों की सूची में शामिल कर दिया. जांच के बाद निर्दलीय प्रत्याशी का नामांकन रद्द कर दिया गया.

प्रस्तावकों में 21 महान हस्तियों के नाम
दिलचस्प बात यह है कि नामांकन पत्र में विनोद पवार ने नाम के कॉलम में शेरो-शायरी लिखी है. प्रस्तावकों की लिस्ट में शहीद भगत सिंह, महात्मा गांधी, स्वामी विवेकानंद, मार्टिन लूथर, डॉ. भीमराव अंबेडकर, डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम, नेल्सन मंडेला, सुभाष चंद्र बोस, गौतमबुद्ध, राजगुरु, अशफाक उल्ला खां, जॉन एफ केनेडी, मोहम्मद रफी समेत 21 महान हस्तियों के नाम दिए हैं.

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जिला निर्वाचन अधिकारी एनपी सिंह ने बताया कि निर्वाचन व्यवस्था का मजाक उड़ना गलत है. नामांकन पत्र में निर्वाचन व्यवस्था की खिल्ली उड़ाने वाले के खिलाफ मामला दर्ज कराया जाएगा. इसकी तैयारी की जा रही है. जल्द ही मुकदमा दर्ज होगा.

गौतमबुद्ध नगर जिले में इस बार कुल 36 प्रत्याशी चुनावी समर में एक दूसरे के खिलाफ संघर्ष करते दिख रहे हैं. इसमें नोएडा से 14, दादरी से 14, और जेवर से कुल 8 प्रत्याशी विधायक बनने की रेस में शामिल हैं. पहले चरण के लिए गौतमबुद्धनगर की तीन सीटों पर 11 फरवरी को मतदान होना है.

यूपी में सात चरणों में वोटिंग
उत्तर प्रदेश में 11 फरवरी से 8 मार्च के बीच सात चरणों में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं. कांग्रेस, राष्ट्रीय लोक दल और समाजवादी पार्टी के अखिलेश धड़े के बीच गठबंध के बावजूद बहुकोणीय मुकाबला देखने को मिलेगा.

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केंद्र में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने के बाद जिस तरह से बीजेपी को दिल्ली और बिहार में करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा है, वैसे में उत्तर प्रदेश का चुनाव प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है. मुख्यमंत्री चेहरे को सामने न लाकर एक बार फिर बीजेपी ने पीएम मोदी के चेहरे पर दांव खेला है. इसका कितना फायदा उसे इन चुनावों में मिलेगा वह 11 मार्च को सामने आ ही जाएगा.

ये होंगे मुद्दे
इस बार उत्तर प्रदेश चुनावों में समाजवादी पार्टी में मचे घमासान के अलावा प्रदेश की कानून-व्यवस्था, सर्जिकल स्ट्राइक, नोटबंदी और विकास का मुद्दा प्रमुख रहने वाला है. जहां एक ओर बीजेपी और बसपा प्रदेश की कानून व्यवस्था को लेकर अखिलेश सरकार को घेर रही हैं, वहीँ विपक्ष नोटबंदी के फैसले को भी चुनावी मुद्दा बना रहा है.

यूपी विधानसभा में कुल 403 सीटें हैं. 2012 के विधानसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी ने 224 सीट जीतकर पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी. पिछले चुनावों में बसपा को 80, बीजेपी को 47, कांग्रेस को 28, रालोद को 9 और अन्य को 24 सीटें मिलीं थीं.

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