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... तो CM योगी की गंगा यात्रा से 'द्रौपदी के श्राप' से मुक्त होगी हस्तिनापुर!

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की की पहल पर अब सूबे के मरीजों को रविवार को भी OPD सेवाएं मिलेंगी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की की पहल पर अब सूबे के मरीजों को रविवार को भी OPD सेवाएं मिलेंगी

इतिहासकारों की मानें तो ये एक ऐसा श्राप है जो पांच हज़ार साल पुराना है. एक ऐसा श्राप जो कभी विकास नहीं होने देता.

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मेरठ. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) के प्रस्तावित दौरे के मद्देनजर मेरठ (Meerut) के महाभारत कालीन (Mahabharat Era) हस्तिनापुर (Hastinapur) के कायाकल्प की तैयारी में प्रशासनिक अमला जुटा हुआ है. दरअसल, हस्तिनापुर के बारे में कहा जाता है कि इसे द्रौपदी (Draupadi) का एक श्राप (Curse) मिला हुआ है. जिसका असर आज भी दिखता है. इतिहासकारों की मानें तो ये एक ऐसा श्राप है जो पांच हज़ार साल पुराना है. एक ऐसा श्राप जो कभी विकास नहीं होने देता. लेकिन अब  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल से हस्तिनापुर को श्रापमुक्त मुक्त कराने की तैयारी है.

गंगा यात्रा को लेकर मुख्यमंत्री के संभावित हस्तिनापुर आगमन की ख़बर मात्र से ही आजकल हस्तिानपुर को सजाया संवारा जा रहा है. दीवारों पर पेंटिंग की जा रही है. व्यवस्थाओं को दुरुस्त किया जा रहा है. रोज़ाना प्रशासनिक अमला हस्तिनापुर पहुंच रहा है और यहां के कायाकल्प को लेकर रोज़ मंथन हो रहा है. संभावना जताई जा रही है कि आगामी सत्ताइस जनवरी को सीएम योगी आदित्यनाथ यहां गंगा यात्रा को लेकर पहुंचेंगे और रात्रि विश्राम भी करेंगे.

ये है सीएम का कार्यक्रम

उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रस्तावित गंगा यात्रा और हस्तिनापुर यात्रा का कार्यक्रम लगभग तय हो चुका है. संभावना जताई जा रही है कि आगामी 27 जनवरी को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हस्तिनापुर में रात्रि विश्राम करने के साथ शाम और सुबह गंगा आरती में शामिल होंगे. मेऱठ के बहसूमा और गणेशपुर में योगी आदित्यनाथ का स्वागत कराने का प्रस्ताव है. योगी आदित्यनाथ की गंगा यात्रा 27 जनवरी को बिजनौर के सबलगढ से सुबह 9.30 बजे गंगा पूजन के साथ शुरू होने की बात कही जा रही है. इसके बाद वह सड़क मार्ग से रामराज, बहसूमा होते हुए हस्तिनापुर आएंगे. यहां पर शाम 6.30 बजे वह जनसभा को संबोधित करने के बाद गंगा आरती में शामिल होंगे. रात्रि विश्राम के बाद 28 जनवरी की सुबह 8.30 बजे गंगा आरती के बाद सड़क मार्ग से मवाना, परीक्षितगढ़, किठौर होते हुए गढ़मुक्तेश्वर ब्रजघाट पहुंचंगे. 28 जनवरी को उनका रात्रि विश्राम वशीघाट नरौरा बुलंदशहर में होगा. हालांकि प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि इसमें बदलाव हो सकता है. मुख्यमंत्री के आगमन की ख़बर से आजकल अधिकारी रोज़ाना हस्तिनापुर के चक्कर लगा रहे हैं. यहां दीवारों को पेंट किया जा रहा है. व्यवस्थाएं दुरुस्त की जा रही हैं. और हर वो कार्य किया जा रहा है जिससे हस्तिनापुर चमकता हुआ नज़र आए.

सजाने-संवारने में जुटा प्रशासनिक अमला

मुख्यमंत्री की हस्तिनापुर में संभावित जनसभा की तैयारियों का निरीक्षण करने के लिए जिलाधिकारी अनिल ढींगरा व मुख्य विकास अधिकारी ईशा दुहन भी पहुंचीं. हस्तिनापुर के जंबूद्वीप में वीवीआईपी कमरों का मुख्य विकास अधिकारी ने निरीक्षण किया. सीएम के दौरे से पूर्व गंगा यात्रा के लिए गंगा किनारे के गांवों को भी तैयार किया जा रहा है. इसमें गांव की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. कस्बे की सभी सरकारी बिल्डिंगों को भी सजाया गया है. लोकसभा चुनाव 2019 के दौरान रामराज के मॉडर्न इंटर कॉलेज में हुई जनसभा को सीएम योगी आदित्यनाथ ने संबोधित किया था. तब उन्होंने कहा था कि उनका मन भी हस्तिनापुर की ऐतिहासिक भूमि को नमन करने का है. जल्द ही भगवान श्री कृष्ण की कर्म भूमि और कौरव-पांडव की जन्मभूमि हस्तिनापुर की पावन धरती पर आएंगे. मुख्यमंत्री अपने इसी वादे को पूरा करेंगे.

Hastinapur
हस्तिनापुर के कायाकल्प में जुटा प्रशासन


ये है श्राप की कहानी

हस्तिनापुर के बारे में कहा जाता है कि इसे द्रौपदी का एक श्राप मिला हुआ है. जिसका असर आज भी दिखता है. इतिहासकारों की मानें तो ये एक ऐसा श्राप है जो पांच हज़ार साल पुराना है. एक ऐसा श्राप जो कभी विकास नहीं होने देता. मेरठ से पैंतालिस किलोमीटर दूर महाभारतकालीन हस्तिनापुर को लेकर कहा जाता है कि हस्तिनापुर द्रौपदी के श्राप के कारण आजतक आगे नहीं बढ़ सका है. यह श्राप इस जगह के लिए नासूर है. आज भी पांडवों की राजधानी हस्तिनापुर वीरान पड़ी है. रोजगार और उद्योग से कोसों दूर है हस्तिनापुर. लेकिन मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर अब इतिहासकारों को भी उम्मीद जगी है कि ये ऐतिहासिक जगह अब अपना वही मुकाम हासिल करेगा जिसके लिए ये हमेशा जाना गया है.

पहले भी हुई है विकास की कोशिश, लेकिन मिली नाकामी

सैकड़ों साल से हस्तिनापुर बदहाली की मार झेल रहा है. यहां विकास के लिए न जाने क्या-क्या किया गया लेकिन स्थानीय लोगों की मानें तो द्रौपदी के श्राप की वजह से हस्तिनापुर आगे नहीं बढ़ पाया. चीरहरण के समय द्रौपदी ने हस्तिनापुर को श्राप दिया था कि जहां नारी का सम्मान नहीं होता वो जगह पिछड़ जाती है. महाभारत काल में श्रीकृष्ण ने द्रौपदी के सम्मान की रक्षा की थी. 1949 में हस्तिनापुर को बड़ा पर्यटन स्थल बनाने की कवायद जारी की थी और वो कवायद आजतक जारी है. उत्‍तर प्रदेश के मेरठ से पैंतालिस किलोमीटर दूर हस्तिनापुर वही जगह है जहां पर श्रीकृष्ण ने पांडवों को कर्म का संदेश दिया था. कौरवों और पांडवों की राजधानी हस्तिनापुर कान्हा की कर्मभूमि थी. ब्रज का यमुनातट कान्हा की अटखेलियों का गवाह है तो मेरठ से तकरीबन पैंतालिस किलोमीटर दूर हस्तिनापुर का गंगा तट श्रीकृष्ण के अर्जुन को कर्म का संदेश दिए जाने का साक्षी है. लेकिन ऐतिहासिक हस्तिनापुर आज भी अपने वजूद की जंग लड़ रहा है. लेकिन अब मुख्यमंत्री के आगमन के बाद यहां के लोगों को उम्मीद जगी है कि अब हस्तिनापुर के दिन बहुरेंगे और ये जगह फिर से नया इतिहास लिखेगी.

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