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Meerut: केंद्रीय राज्यमंत्री संजीव बालियान का बड़ा बयान, बोले-कभी न कभी तो हमें हरित प्रदेश मिलेगा

डॉ. संजीव कुमार बालियान इस समय मोदी सरकार में केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी राज्य मंत्री हैं.

डॉ. संजीव कुमार बालियान इस समय मोदी सरकार में केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी राज्य मंत्री हैं.

Meerut News: केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. संजीव कुमार बालियान ने मेरठ में बड़ा बयान दिया है. उन्‍होंने पश्चिमी यूपी के 17 हजार डेयरी किसानों के जरिए बनाई गई 'हरित प्रदेश दुग्ध उत्पादक कंपनी' के उद्घाटन पर कहा कि हरित प्रदेश दुग्ध उत्पादक कंपनी का नाम बहुत अच्छा है. उन्हें उम्मीद है कि भविष्य में नाम दूसरी वजह से भी चमकेगा और कभी न कभी तो हरित प्रदेश हमें मिलेगा.

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मेरठ. पश्चिमी यूपी के 17 हजार डेयरी किसानों के जरिए बनाई गई ‘हरित प्रदेश दुग्ध उत्पादक कंपनी’ के उद्घाटन पर पहुंचे केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी राज्य मंत्री डॉ. संजीव कुमार बालियान ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि हरित प्रदेश दुग्ध उत्पादक कंपनी का नाम बहुत अच्छा है. इसके साथ उन्होंने कहा, ‘उन्हें उम्मीद है कि भविष्य में नाम दूसरी वजह से भी चमकेगा और कभी न कभी तो हरित प्रदेश हमें मिलेगा. ये कोई कम्पनी नहीं है बल्कि इसके मालिक किसान हैं. बता दें कि नब्बे के दशक में कांग्रेस नेता निर्भय पाल शर्मा और इम्तियाज खान ने हरित प्रदेश का नाम देकर आंदोलन शुरू किया. इसमें आगरा, मथुरा, मेरठ, सहारनपुर, मुरादाबाद तथा बरेली मंडलों को मिलाकर हरित प्रदेश बनाने की मांग की गई थी.

इसके साथ केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. संजीव कुमार बालियान ने कहा कि सरकार किसानों द्वारा खुद का संगठन बनाने की पहल में उनका समर्थन करेगी. इसके साथ उन्‍होंने क्षेत्र के 7 जिलों के किसानों को सशक्तिकरण और उद्यमिता के अर्थ को सही मायने में प्रदर्शित करने के लिए बधाई दी. बालियान ने कहा कि यह एक नई सहकारी संस्था की तरह है. यह एक कंपनी नहीं बल्कि वास्तव में एक किसान संगठन है. इसमें राजनीति या भ्रष्टाचार के लिए कोई जगह नहीं है. ऐसी संस्थाओं पर ध्यान दिया जाएगा जिससे वे किसानों के हित में काम करें.

सरकार किसानों को देगी ये बड़ा फायदा
केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. संजीव कुमार बालियान ने कहा कि सरकार का ध्यान देशी दूध देने वाले पशुओं से उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने पर है. इस उद्देश्य के लिए पूरे देश में किसानों को मुफ्त में कृत्रिम गर्भाधान प्रदान किया जाएगा. सरकार 4500 पशु चिकित्सा एम्बुलेंस भी उपलब्ध कराएगी, जिनमें से एक बड़ी संख्या उत्तर प्रदेश की होगी. राज्य के किसानों के उत्थान के लिए उत्तर प्रदेश में ऐसी 4 अन्य संस्थाओं- वाराणसी, अमेठी, रायबरेली और बुंदेलखंड की सुविधा के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड की सराहना करते हुए डॉ. बालियान ने कहा कि केंद्र सरकार का ध्यान कृषि क्षेत्रों के विकास पर है जहां बजटीय आवंटन 2014 में 22000 करोड़ रुपये से 132000 करोड़ रुपये है. दूध पशुओं की स्वदेशी नस्लों की उत्पादकता बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया गया है.

जानें एचपीएमपीसी के बारें में
अपने सदस्यों/शेयरधारकों से गुणवत्तापूर्ण दूध प्राप्त करने के उद्देश्य से एचपीएमपीसी की स्थापना 26 अक्टूबर, 2021 को की. यह पहल कंपनी अधिनियम, 2013 में निहित प्रावधानों के आधार पर है जिसमें व्यावसायिक उद्यम को सहकारिता के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहकारी गठबंधन द्वारा अपनाए गए सिद्धांतों के समान पारस्परिक सहायता सिद्धांतों पर चलने में सक्षम बनाता है. जबकि 9 राज्यों में किसानों के जरिए बनाई गई ऐसी संस्थाओं की सूची में यह हरित प्रदेश दुग्ध उत्पादक कंपनी ऐसा 19वां संगठन है. ये उत्पादक कंपनियां सामूहिक रूप से लगभग 7.5 लाख डेयरी किसानों के स्वामित्व में हैं, जो प्रति दिन 40 लाख लीटर से अधिक दूध संकलन करती हैं. एचपीएमपीसी ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 7 जिले मुजफ्फरनगर, मेरठ, बुलंदशहर, सहारनपुर, हापुड़, शामली और बिजनौर के 1400 से अधिक गांवों में अपना विस्तार कर वर्तमान में प्रतिदिन 150,000 लीटर दूध एकत्र कर रही है. अगले 5 वर्षों में यह संस्था 1.5 लाख दूध किसानों को जोड़ते हुए प्रतिदिन 5 लाख लीटर दूध संकलित करते हुए 1000 करोड़ रुपयों के व्यापार लक्ष्य को प्राप्त करेगी.

इसके साथ राष्ट्रीय डेरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक एनडीडीबी डेयरी सर्विसेज (एनडीएस) ने इस नए संगठन को सुविधा और तकनीकी सहायता प्रदान की है. राष्ट्रीय डेरी विकास बोर्ड के अध्यक्ष मीनेश शाह ने कहा कि एनडीडीबी परिवार डेयरी किसानों के लिए आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत बनाने और उनके चेहरे पर एक स्थायी मुस्कान लाने के लिए हर दिन तत्पर है. देश भर के राज्यों जैसे राजस्थान गुजरात, आंध्र प्रदेश, पंजाब, बिहार और उत्तर प्रदेश में किसानों के स्वामित्‍व वाली 19 संस्थाएं बनायीं हैं. जबकि विगत वर्ष के दौरान इन संस्थाओं ने लगभग 40 लाख लीटर दूध का प्रतिदिन संकलन करते हुए लगभग 5600 करोड़ रुपयों का दुग्ध व्यापर किया है.

Tags: Meerut news, Sanjeev Balyan

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