निर्भया के 4 गुनहगारों को फांसी पर चढ़ाकर पवन जल्लाद ने तोड़ा अपने दादा का रिकॉर्ड
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निर्भया के 4 गुनहगारों को फांसी पर चढ़ाकर पवन जल्लाद ने तोड़ा अपने दादा का रिकॉर्ड
पवन जल्लाद (File Photo)

पवन जल्लाद (Pawan Jallad) ने बताया कि फांसी देने की कला उन्होंने अपने दादा से सीखी है. उनके साथ वह पहली बार आगरा जेल गए थे. ये 1988 की बात है. उस समय दादा कालूराम ने रेप के दोषी जुम्मन को फांसी पर चढ़ाया था.

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मेरठ. निर्भया केस (Nirbhaya Case) के चार दोषियों को फांसी पर चढ़ाकर मेरठ (Meerut) के पवन जल्लाद (Pawan Jallad) ने अपने दादा कालूराम का रिकॉर्ड (Record) तोड़ दिया है. दरअसल कालूराम ने एक साथ 2 दोषियों को फांसी दी थी, वहीं अब पवन ने एक साथ चार दोषियों को फांसी पर चढ़ा दिया है. बता दें कि मेरठ के रहने वाले पवन की चार पीढ़ियां फांसी देती आ रही हैं. पवन के परदादा लक्ष्मण राम अंग्रेजी हुकूमत के समय परिवार से पहले जल्लाद बने.

इसके बाद लक्ष्मण राम के बेटे और पवन के दादा कालू राम ने जिम्मेदारी संभाली. दिल्ली के जीसस मेरी कॉलेज की स्टूडेंट्स गीता चोपड़ा और उनके भाई संजय चोपड़ा की हत्या करने वाले कुख्यात अपराधी रंगा-बिल्ला को कालूराम ने फांसी पर लटकाया था. यह पहली बार था जब दो लोगों को एक साथ फांसी दी गई थी. इसके बाद कालूराम ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या करने वाले सतवंत सिंह और षड्यंत्र रचने वाले केहर सिंह को भी फांसी पर चढ़ाया.

दादा ने ही सिखाए पवन को फांसी पर चढ़ाने के गुर
इसके बाद कालूराम ने यह काम बेटे मम्मू सिंह को सौंप दिया. मम्मू ने आखिरी बार साल 1997 में जबलपुर के कांता प्रसाद तिवारी को फांसी दी थी. इसके बाद उनकी मौत हो गई. मम्मू की मौत से पहले ही दादा कालूराम ने अपने पोते पवन को जल्लाद के लिए तैयार कर लिया था.
आगरा जेल में पहली बार दादा के साथ पहुंचे


पवन ने बताया कि फांसी देने की कला उन्होंने अपने दादा से सीखी है. उनके साथ वह पहली बार आगरा जेल गए थे. ये 1988 की बात है. उस समय दादा कालूराम ने रेप के दोषी जुम्मन को फांसी पर चढ़ाया था.

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