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यहां एक नहीं बल्कि 55 तरह की गजक होती है तैयार, तस्वीरें देख खाने से रोक नहीं पाएंगे

बुढ़ाना गेट गजक बाजार

बुढ़ाना गेट गजक बाजार

UP News: वेस्ट यूपी के मेरठ की बात की जाए तो मेरठ में बनी गजक लोगों की पहली पसंद है, जैसे ही मेरठ में गजक बनने शुरुआत ह ...अधिक पढ़ें

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    विशाल भटनागर

    मेरठ: अगर आप गजक खाने के शौकीन हैं. ऐसे बाजार को ढूंढ रहे हैं, जहां आपको स्वादिष्ट गजक खाने के लिए मिले, तो आज हम आपको ऐसे ही गजक बाजार के बारे में बताने जा रहे हैं. जहां पर एक नहीं बल्कि 55 तरह की गजक तैयार की जाती .

    दरअसल, जैसे ही गुलाबी ठंड की शुरुआत होती है. तो मेरठ के बूढ़ाना गेट बाजार में आपको गजक के बाजार सजे हुए दिखाई देंगे. गजक की महक गजक प्रेमियों को अपनी ओर खींच लाती है. चाहे बात काजू वाली का गजक की हो, पट्टी वाली गजक या फिर रामकला गजक चॉकलेट गजक, मशरूम गजक यही नहीं पिज्जा गजक, मूंगफली गजक और मक्खन की बनी खास गजक सहित 55 तरह की गजक यहां बनाई जाती हैं

    आपके शहर से (मेरठ)

    मेरठ की बनी गोल गजक की खास डिमांड रहती है. जहां यह खाने में स्वादिष्ट होती है. वहीं इसके रेट की बात की जाए तो इसके रेट भी काफी सहूलियत के होते हैं. ₹300 प्रति किलो से आपको यह गजक खाने के लिए मिल जाएगी.

    वहीं दूसरी ओर बच्चों की बात की जाए तो बच्चों को चाकलेट गजक बहुत पसंद आती है. इसलिए बच्चों के लिए खास तौर पर चॉकलेट बनाई जाती है. यह इतनी करारी होती है कि बच्चे इंजॉय करते हुए इसको खाते हैं.

    सर्दी के मौसम की बात की जाए तो डॉक्टरों द्वारा ड्राई फ्रूट खाने की सलाह दी जाती है. इसलिए यहां पर ड्राई फ्रूट से तैयार काजू रोल भी मिलता है. जिसमें सभी मेवा को मिक्स कर बनाया जाता है. वेस्ट यूपी की बात की जाए तो यहां गुड़ भी काफी मात्रा में बनाया जाता है. गजक के अंदर भी आपको गुड़ का सेवन देखने को मिलेगा. इसलिए गुड़ गजक भी तैयार की जाती है. जोकि मूंगफली की गिरी को मिलाकर बनाई जाती है.

    बताते चलें कि मेरठ की बनी गजक का राजनीतिक गलियारों में भी काफी महत्व है. जब भी कोई राजनेता मेरठ से दिल्ली के लिए जाता है. तो खास तौर पर यहां से बनी हुई गजक को लेकर जाता है. इतना ही नहीं जब बाहर से कोई राजनीतिक विशेष या फिर कोई व्यक्ति विशेष आता है. तो उन्हें भी यहां की बनी हुई गजक दी जाती है.

    गजक के रेट की बात की जाए तो ₹200 से लेकर ₹1000 प्रति किलो तक के अलग अलग रेट हैं. रामचंद्र सहाय द्वारा 1904 में गजक बनाने की शुरुआत की गई थी. तब से लेकर अब तक लगातार यह गजक बनाने का सिलसिला चल रहा है. यह भी कह सकते हैं कि, मेरठ की पहचान अब स्पोर्ट्स सिटी के साथ-साथ खाने-पीने में गजक के साथ भी की जाती है.

    Tags: Meerut news, UP news

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