मेरठ का प्राइमरी स्कूल बना मिसाल, अब पब्लिक स्कूलों के बच्चे ले रहे एडमिशन

Umesh Srivastava | News18 Uttar Pradesh
Updated: August 23, 2019, 1:05 PM IST
मेरठ का प्राइमरी स्कूल बना मिसाल, अब पब्लिक स्कूलों के बच्चे ले रहे एडमिशन
मेरठ का प्राथमिक विद्यालय फफूंडा ने नया मुकाम हासिल किया है.

मेरठ का प्राथमिक विद्यालय फफूंडा ने नया मुकाम हासिल किया है. स्कूल की प्रिंसिपल कौसर जहां ने स्कूल की सूरत बदलकर रख दी है.

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सरकारी प्राइमरी स्कूलों (Government Primary Schools) की जो छवि एक आम इंसान के दिमाग में होती ही उससे अलग मेऱठ (Meerut) के एक प्राइमरी स्कूल ने अपना नया मुकाम बनाया है. आलम यह है कि पब्लिक स्कूलों को छोड़कर बच्चे अब इस सरकारी स्कूल में आऩे लगे हैं. इतना ही नहीं स्कूल को बेसिक शिक्षा (Basic Education) की बेस्ट प्रैक्टिसेस की किताब में भी स्थान मिला है. आखिर इस स्कूल में ऐसा कौन सा करिश्मा हो गया कि अभिभावक अपने बच्चों को पब्किल स्कूल से निकालकर इस सरकारी स्कूल में दाखिला करा रहे हैं?

प्रिंसिपल कौसर जहां ने स्कूल की सूरत बदल दी

यूपी में प्राइमरी स्कूल की दशा क्या है, ये सब जानते हैं. कहीं प्राइमरी स्कूल भूत बंगला बना हुआ है तो कहीं टीचर्स को मोबाइल चैट से ही फुर्सत नहीं है. कई-कई प्राइमरी स्कूल तो ऐसे हैं जहां टीचर अपनी भैंसों को भी साथ लेकर आते हैं. एक तरफ बच्चे पढ़ रहे हैं तो दूसरी तरफ उन्हें अपने जानवरों की भी चिंता रहती है. ऐसे माहौल में मेरठ का प्राथमिक विद्यालय फफूंडा ने नया मुकाम हासिल किया है. स्कूल की प्रिंसिपल कौसर जहां ने स्कूल की सूरत बदलकर रख दी है. उन्हें राज्य स्तरीय पुरस्कार से भी नवाज़ा जा चुका है और ख़ुद यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनके कार्यों को सराहा है.

बेस्ट प्रैक्टिसेस की किताब में भी इस स्कूल का जिक्र

अब बेसिक शिक्षा की बेस्ट प्रैक्टिसेस की किताब में भी इस स्कूल का जिक्र किया गया है. स्कूल की प्रिंसिपल कौसर जहां का लेख इस किताब में रहेगा कि कैसे उन्होंने एक प्राइमरी स्कूल की हालत इतनी बदल दी कि बच्चे पब्लिक स्कूल छोड़कर सरकारी स्कूल में दाखिला ले रहे हैं.

meerut model school
मेरठ के इस स्कूल में बच्चों को मिल रही बेहतरीन शिक्षा


बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से स्कूलों में न्यूनतम संसाधनों के बीच सर्वोत्तम शिक्षा प्रदान करने वाले शिक्षकों के अनुभवों पर आधारित एक मॉड़ल पुस्तक तैयार की जा रही है. इस पुस्तक के लिए ज़िले से प्राथमिक विद्यालय फफूंडा एक की प्रधानध्यापिका कौसर जहां के आलेख को चिन्हित किया गया है. प्रदेश भर से चयनित 36 शिक्षकों के अनुभवों से सुसज्जित किताब को प्रदेश भर के स्कूलों में बेस्ट प्रैक्टिसेस के मॉडल के तौर पर पेश किया जाएगा. जिससे अन्य स्कूल भी इन शिक्षकों के अऩुभवों से अपने अपने स्कूल में शिक्षण के स्तर को सुधार सकें.
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स्कूल में अंग्रेजी, हिंदी और उर्दू की होती है पढ़ाई

परिषदीय स्कूलों में हर जगह ही संसाधनों की कमी रही है. ऐसे में बहुत से शिक्षकों ने भौतिक परिवेश को आकर्षक बनाने और कला शिक्षण में परिश्रम करते हुए स्कूलों में शिक्षा के माहौल को बेहतर बनाने में अहम योगदान दिया है. साथ ही शिक्षकों ने साथ मिलकर स्थानीय लोगों को भी जोड़ने में अहम योगदान दिया है. ऐसे ही शिक्षकों से इस पुस्तिका के लिए आलेख मांगे गए थे. जिनमें से एक स्कूल मेरठ का भी है.

meerut modle school
इस स्कूल में बच्चों का भी पढने में मन लग रहा है.


स्कूल में हिन्दी अंग्रेज़ी और उर्दू भी पढ़ाई जाती है. बच्चों का कहना है कि जब वो पब्लिक स्कूल में पढ़ते थे. तो उन्हें पढ़ाई बोझ लगती थी, लेकिन यहां पढ़ने के बाद वो खेल खेल में पढ़ रहे हैं. शायद यही कारण है कि इस स्कूल में पिछले साल नो एडमिशन तक का बोर्ड लग गया था. वर्तमान में इस स्कूल में तीन सौ बासठ बच्चे हैं, जो पूरी लगन और निष्ठा के साथ यहां पढ़ाई कर रहे हैं. .हमें उम्मीद है कि इस स्कूल से और प्राइमरी स्कूल भी प्रेरणा लेंगे और अपने अपने सरकारी स्कूल की सूरत बदलेंगे.

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First published: August 23, 2019, 1:05 PM IST
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