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पुलवामा आतंकी हमला: 'एक मां का बेटा हुआ है शहीद, देश के लिए तैयार खड़े हैं 10 बेटे'

News18 Uttar Pradesh
Updated: February 15, 2019, 11:48 AM IST

प्रदीप के परिजनों के मुताबिक, बृहस्पतिवार की शाम करीब 8:40 बजे सीआरपीएफ के अधिकारियों द्वारा फ़ोन कर प्रदीप की शहादत की जानकारी दी गई. जिसकी सूचना पाकर परिजनों में कोहराम मच गया.

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जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले में शामली के दो जवान शहीद हो गए. एक का नाम प्रदीप कुमार है तो दूसरे शहीद का नाम अमित कुमार है. प्रदीप 2003 में मथुरा से सीआरपीएफ में भर्ती हुआ था, जिसके बाद प्रदीप की ट्रेनिंग बरेली में हुई. प्रदीप उसी समय से सीआरपीएफ में बखूबी ड्यूटी निभा रहा था. हाल ही में प्रदीप की ड्यूटी श्रीनगर में चल रही थी. लेकिन जम्मू कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ जत्थे पर हुए हमले में प्रदीप शहीद हो गए. प्रदीप के शहीद होने पर उनके भाई ने कहा कि एक मां का लाल शहीद हुआ है लेकिन देश पर मर मिटने के लिए 10 बेटे तैयार खड़े हैं.

दरअसल शहीद जवान प्रदीप शामली जनपद के गांव बनत का निवासी हैं, जो सीआरपीएफ की 21 बटालियन में तैनात था. हालांकि शहीद जवान प्रदीप 3 दिन पूर्व एक सप्ताह की छुट्टी पर अपने घर आया हुआ था. छुट्टी खत्म हो जाने के बाद प्रदीप वापस अपनी ड्यूटी पर लौट गया. प्रदीप के परिजनों के मुताबिक, बृहस्पतिवार की शाम करीब 8:40 बजे सीआरपीएफ के अधिकारियों द्वारा फ़ोन कर प्रदीप की शहादत की जानकारी दी गई. जिसकी सूचना पाकर परिजनों में कोहराम मच गया.

अपने पीछे छोड़ गए दो बेटे
शहीद प्रदीप कुमार के दो बेटे हैं. छोटे बेटे का नाम विजयंत है, जो कक्षा 9 का छात्र है. वहीं बड़े लड़के का नाम सिद्धार्थ है, जो कक्षा 11 का छात्र है. प्रदीप की शादी सन 2002 में हुई थी. प्रदीप के अलावा घर में उसके दो भाई भी हैं. जिनमें से बड़ा भाई आर्मी के रिटायर्ड ऑफिसर हैं. वहीं छोटा भाई इंजीनियर बताया जा रहा है. प्रदीप के पिताजी गन्ना मिल में कर्मचारी पद पर कार्यरत थे, जो रिटायर हो गए हैं.

शहीद प्रदीप कुमार


देश पर मर मिटने के लिए 10 लाल तैयार
शहीद प्रदीप कुमार के परिजनों ने प्रदीप की शहादत पर गर्व जताया है. शहीद प्रदीप कुमार के चचेरे भाई उमेश कुमार का कहना है कि एक मां का लाल शहीद हुआ है, लेकिन देश पर मर मिटने के लिए 10 लाल तैयार खड़े हैं. आतंकियों ने जो तुच्छ हरकत की है. उसका हमारे देश की सरकार मुंहतोड़ जवाब दे. शहीद के परिजनों का कहना है कि इस आतंकी हमले में शहीद हुए जवानों की शहादत जाया नहीं जाने दिया जाए. सरकार आतंकी हमले का किसी भी तरह बदला ले. वही शहीद जवानों को सच्ची श्रद्धांजलि होगी.
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शहीद अमित शामली के रेलपार कॉलोनी के निवासी हैं. अमित की शहादत की सूचना पर परिजनों में कोहराम मच गया. अमित 2017 में रामपुर से सीआरपीएफ में भर्ती हुआ था. अमित के अलावा परिवार में 4 भाई एक बहन है. अमित घर में सबसे छोटा था. अमित एक सप्ताह की छुट्टी पर घर आया हुआ है, जो तीन दिन पहले ही छुट्टी काटकर ड्यूटी पर लौट गया था. अमित कुमार की उम्र 22 साल है.

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First published: February 15, 2019, 10:06 AM IST
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