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मेरठ बुलेटिन मान्यता इस कुएं के पानी से हो जाता है कुष्ठरोग ठीक

परीक्षित

परीक्षित गढ़ स्थित नवलदे कुआं

हमारी भारतीय संस्कृति के अनुसार पौराणिक कथाओं का असर आज भी देखने को मिलता. कुछ इसी तरह का नजारा आपको किला परीक्षितगढ़ में भी देखने को मिलेगा

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    मेरठ-:पौराणिक कथा और मान्यताओं का असर आज भी देखने को मिलता है.जिसकी बानगी आपको पश्चिम उत्तर प्रदेश के मेरठ (Meerut) से 25 किलोमीटर दूर किला परीक्षितगढ़ (kilaParikshitgarh) में भी देखने को मिलेगी. जहां पौराणिक कथाओं के अनुसार आज भी लोग उनका अनुसरण करते हैं. जिसमें सबसे ज्यादा कुएं को लेकर अलग-अलग प्रकार का वर्णन है. किसी कुएं का पानी मीठा तो किसी कुएं का पानी अन्य लोगों के काम आता है. इसी तरह से कुष्ठ रोग को लेकर काफी लोग परेशान रहते हैं. लेकिन किला परीक्षितगढ़ के मान्यताओं की माने तो एक ऐसा कुआं है. जिस कुएं के पानी से पुराने से पुराना कुष्ठरोग(Leprosy)भी ठीक हो जाता है. हालांकि अब यह कुआं बंद कर दिया गया है. लेकिन लोगों की आस्था अभी इसमें उसी तरह बनी हुई है. जिस प्रकार पौराणिक कथाओं में इस कुएं का वर्णन किया गया है.

    रानी नवलदे ने किया था अपने पिता का कुष्ठ रोग ठीक
    पौराणिक कथाओं के अनुसार राजा परीक्षित से इसका इतिहास जुड़ा हुआ है.कहा जाता है कि एक बार पाताल लोक की रानी नवलदे अपने पिता वासुकि (बासत) के कुष्ठ रोग ठीक करने के लिए इस कुएं के ही पानी को लेने के लिए आई थी. तब राजा परीक्षित ने उनसे कहा था कि तुम्हें एक वचन निभाना होगा जो तुम्हारे पिता ने मेेरे पिता को दिया. तब रानी ने कहा कि इस वचन को निभाएगी. कहा जाता है कि इस वचन को निभाने के लिए जब वह अपने पिता को पानी से स्नान करा रही थी. तब उन्होंने अपने पिता के अंगूठे पैर रख दिया था. जिससे उनके पिता वासुकि के शरीर से कुष्ठरोग तो ठीक हो गया था. लेकिन अंगूठे पर कुष्ठ रह गया था. जिसके लिए पुनः रानी को आना पड़ा था.
    रानी नवलदे ने विवाह कर निभाया था वचन
    गौरतलब है कि अर्जुन और नागलोक के राजा वासुकि में गहरी दोस्ती थी. वह इस दोस्ती को रिश्ते में बदलना चाहते थे. इसीलिए दोनों ने कहा था कि उनके यहां जो भी बच्चा जन्म लेगा उन दोनों का विवाह कराया जाएगा. लेकिन कथाओं के अनुसार नागलोक के राजा वासुकि के जब पुत्री हुई थी तो वह अर्जुन के यहां विवाह करना नहीं चाहते थे. इसीलिए वासुकि ने यह खबर भिजवा दी कि उनके जो बेटी हुई है उसकी मृत्यु हो गई. इस बात को लेकर दोनों में मतभेद भी नही हुए. लेकिन बाद में जब वासुकि को कुष्ठ रोग हुआ तो जब रानी नवलदे कुएं से पानी लेने आई थी. तब जैसे ही राजा परीक्षित को पता चला तो उन्होंने रानी को रोक लिया. उन्होंने राजा वासुकि और राजा अर्जुन के बीच जो वचनबद्ध वादा हुआ था उसे निभाने के लिए विवाह का प्रस्ताव रखा. उस वचन को पूूूरा करने के लिए वह अपने पिता को बिना बताए ही परीक्षितगढ़ आई थी और राजा परीक्षित से विवाह किया था.

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