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meerut rapid rail rrts corridor to be joined with metro service work going on full force at partapur

मेरठ RRTS : रैपिड रेल कॉरिडोर से जुड़ेगी मेट्रो लाइन, परतापुर में तेज़ी से चल रहा काम

परतापुर स्टेशन मेरठ मेट्रो सेवा के लिए समर्पित स्टेशन है. यह लगभग 75 मीटर लंबा और 34 मीटर चौड़ा है.

परतापुर स्टेशन मेरठ मेट्रो सेवा के लिए समर्पित स्टेशन है. यह लगभग 75 मीटर लंबा और 34 मीटर चौड़ा है.

दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ आरआरटीएस कॉरिडोर (Delhi-Ghaziabad-Meerut RRTS) में कुल 25 स्टेशन हैं, जिसमें से 13 स्टेशन मेरठ में स्थित हैं. इन्हीं स्टेशनों के जरिये ही मेरठ में लोकल मेट्रो की ट्रांसिट सेवा मिल सकेगी. मेरठ साउथ स्टेशन से लोकल मेट्रो की सेवा प्रारंभ होगी और परतापुर, रिठानी, शताब्दी नगर, ब्रह्मपुरी के एलिवेटेड भाग से आगे भैसाली, मेरठ सेंट्रल और बेगमपुल में भूमिगत हो जाएगी. आगे यह फिर से एलिवेटेड होकर एमईएस कॉलोनी, दौरली, मेरठ नॉर्थ व मोदीपुरम होते हुए मोदीपुरम डिपो तक जाएगी, जहां मोदीपुरम डिपो में ट्रेनों के रखरखाव का प्रबंध किया जाना है.

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मेरठ. उत्तर प्रदेश के मेरठ में आरआरटीएस कॉरिडोर (RRTS Corridor) के इंफ्रास्ट्रक्चर पर ही मेरठ मेट्रो (Meerut Metro) की लोकल ट्रांसिट सेवाएं भी प्रदान की जाएंगी और परतापुर स्टेशन का निर्माण इसी कार्ययोजना का अंग है. इससे स्थानीय लोगों को मेरठ मेट्रो की लोकल सेवा के साथ-साथ आरआरटीएस कॉरिडोर के द्वारा सम्पूर्ण राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (Delhi-NCR) में कहीं भी आने-जाने की सुविधा मिलेगी.

दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ आरआरटीएस कॉरिडोर (Delhi-Ghaziabad-Meerut RRTS) में कुल 25 स्टेशन हैं, जिसमें से 13 स्टेशन मेरठ में स्थित हैं. इन्हीं स्टेशनों के जरिये ही मेरठ में लोकल मेट्रो की ट्रांसिट सेवा मिल सकेगी. मेरठ साउथ स्टेशन से लोकल मेट्रो की सेवा प्रारंभ होगी और परतापुर, रिठानी, शताब्दी नगर, ब्रह्मपुरी के एलिवेटेड भाग से आगे भैसाली, मेरठ सेंट्रल और बेगमपुल में भूमिगत हो जाएगी. आगे यह फिर से एलिवेटेड होकर एमईएस कॉलोनी, दौरली, मेरठ नॉर्थ व मोदीपुरम होते हुए मोदीपुरम डिपो तक जाएगी, जहां मोदीपुरम डिपो में ट्रेनों के रखरखाव का प्रबंध किया जाना है.

ट्रैफिक के लिए खास इंतज़ाम
मेरठ में आरआरटीएस का सारा निर्माण कार्य निर्धारित बैरिकेडिंग क्षेत्र में ही किया जा रहा है और महत्वपूर्ण स्थानों पर ट्रैफिक मार्शल भी नियुक्त किए गए हैं, जिससे रोड पर आवागमन बाधित ना हो. यातायात सुचारू रूप से चले इसके लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं की जा रही हैं. स्थानीय सरकारी एजेंसियों के सहयोग से जगह-जगह पर यू-टर्न दिए गए हैं. इसके अलावा ज़िम्मेदारी के साथ पर्याप्त संख्या में ट्रैफिक मार्शल भी नियुक्त किए गए हैं. इन सभी व्यवस्थाओं में निरंतर ज़रूरत के अनुसार बदलाव भी होते रहते हैं, ताकि किसी भी प्रकार की समस्या को रोका जा सके.

एनसीआरटीसी का निर्माण कार्य व्यस्त रोड के बीच बहुत बड़े पैमाने पर किया जा रहा है. निर्माण से जुड़े जोखिम को देखते हुए सभी निर्माण कार्य बैरीकेडिंग जोन के अंदर ही किए जाते हैं. साथ ही सभी निर्माण स्थलों पर सुरक्षा और सरंक्षा का बहुत ही ध्यान रखा जाता है और छोटी से छोटी बातों का ध्यान रखा जाता है.

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2025 तक पूरा हो जाएगा RRTS कॉरिडोर
एनसीआरटीसी द्वारा निर्माणाधीन 82 किलोमीटर लंबे दिल्ली-गाज़ियाबाद-मेरठ कॉरिडोर पर साहिबाबाद से दुहाई के बीच 17 किलोमीटर के प्राथमिकता वाले खंड को 2023 तक और पूरे कॉरिडोर को 2025 तक शुरू करने का लक्ष्य है. मेरठ में एनसीआरटीसी द्वारा निर्माणाधीन परतापुर स्टेशन के प्लेटफॉर्म लेवल का निर्माण कार्य प्रारंभ भी हो गया है, जिसके अंतर्गत ट्रैक लेवेल बनाने का कार्य तेजी से चल रहा है. इसके पहले इस स्टेशन के कॉनकोर्स लेवेल का कार्य पूरा कर लिया गया था, जो ग्राउंड से 7 मीटर ऊंचा बनाया गया है.

परतापुर के प्लैटफ़ार्म लेवेल की ऊंचाई ग्राउंड से लगभग 13 मीटर की होगी. परतापुर स्टेशन मेरठ मेट्रो सेवा के लिए समर्पित स्टेशन है. यह लगभग 75 मीटर लंबा और 34 मीटर चौड़ा है. इस स्टेशन पर आरआरटीएस की ट्रेनों के लिए बीच में ट्रैक बनाए जा रहे हैं, जिससे होकर आरआरटीएस ट्रेनें सीधे निकल जाएंगी. मेट्रो ट्रेन की ट्रैक किनारों पर बनाई जाएगी जहां मेरठ मेट्रो की ट्रेन अपनी सेवाएं देंगी. यात्रियों के लिए प्लैटफ़ार्म, इस स्टेशन के दोनों किनारों पर बनाए जाएंगे. इसलिए इस स्टेशन पर टोटल चार ट्रैक होंगे.

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दिल्ली-मेरठ मुख्य मार्ग के बीच में बनाया जा रहा परतापुर स्ट्रेशन 
परतापुर स्टेशन दिल्ली-मेरठ मुख्य मार्ग के बीच में बनाया जा रहा है. इस स्टेशन पर प्रवेश और निकास के लिए दोनों ओर दो द्वार बनाए जाएंगे. कोनकोर्स लेवेल पर आने के लिए लिफ्ट और एक्सेलटर की व्ययस्था की जाएगी. कॉनकोर्स लेवेल पर यात्रियों के लिए सुरक्षा जांच किओस्क और टिकट काउंटर के अलावा प्लेटफार्म लेवल पर जाने के लिए एएफसी (ऑटोमेटिक फेयर कलेक्शन) गेट आदि होते हैं.

इसके साथ ही यात्री केंद्रित सुविधाएं जैसे आधुनिक सूचना डिस्प्ले बोर्ड (ऑडियो-वीडियो सहित), स्टेशन के आसपास के प्रमुख स्थान दर्शाने वाले सिस्टम मैप, सीसीटीवी कैमरे, अग्निशामक प्रणाली और वॉशरूम आदि जैसी सुविधाएं भी कॉनकोर्स लेवल पर ही बनाई जाती हैं. कॉनकोर्स लेवल से यात्री सीढ़ियों, लिफ्ट या एस्केलेटर की मदद से प्लेटफार्म लेवल पर पहुंचकर अपने गंतव्य स्थान के लिए ट्रेन ले सकते हैं.

Tags: Bullet train, Meerut Metro, Meerut news

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