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मेरठ था रावण का ससुराल, पढ़िए- किस मंदिर में मंदोदरी करती थीं पूजा

मेरठ था रावण का ससुराल, पढ़िए- किस मंदिर में मंदोदरी करती थीं पूजा

नवरात्र में आजकल हर जगह भक्ति रस की धारा बह रही है. हर ओर जय माता दी की धूम है. इस पावन अवसर पर आज हम आपको ऐसे मंदिर के दर्शन कराएंगे, जहां रावण की पत्नी मंदोदरी पूजा के लिए आया करती थीं. आपको जानकर आश्चर्य होगा, लेकिन ये सच है कि क्रान्ति की नगरी मेरठ रावण की ससुराल भी है.

नवरात्र में आजकल हर जगह भक्ति रस की धारा बह रही है. हर ओर जय माता दी की धूम है. इस पावन अवसर पर आज हम आपको ऐसे मंदिर के दर्शन कराएंगे, जहां रावण की पत्नी मंदोदरी पूजा के लिए आया करती थीं. आपको जानकर आश्चर्य होगा, लेकिन ये सच है कि क्रान्ति की नगरी मेरठ रावण की ससुराल भी है.

नवरात्र में आजकल हर जगह भक्ति रस की धारा बह रही है. हर ओर जय माता दी की धूम है. इस पावन अवसर पर आज हम आपको ऐसे मंदिर के दर्शन कराएंगे, जहां रावण की पत्नी मंदोदरी पूजा के लिए आया करती थीं. आपको जानकर आश्चर्य होगा, लेकिन ये सच है कि क्रान्ति की नगरी मेरठ रावण की ससुराल भी है.

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नवरात्र में आजकल हर जगह भक्ति रस की धारा बह रही है. हर ओर जय माता दी की धूम है. इस पावन अवसर पर आज हम आपको ऐसे मंदिर के दर्शन कराएंगे, जहां रावण की पत्नी मंदोदरी पूजा के लिए आया करती थीं. आपको जानकर आश्चर्य होगा, लेकिन ये सच है कि क्रान्ति की नगरी मेरठ रावण की ससुराल भी है.

नवरात्र में मां के मंदिरों में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा है. क्या बच्चे क्या बुजुर्ग, क्या महिलाएं और क्या पुरुष सभी मां के दर्शन करके अपनी मनोकामना पूर्ण करने का आशीर्वाद मांग रहे हैं. नवरात्र के अवसर पर आज हम आपको ऐसे मंदिर के दर्शन करा रहे हैं, जहां रावण की पत्नी मंदोदरी पूजा के लिए आया करती थीं.

जी हां मेरठ रावण की ससुराल भी है. आपको ये सुनकर आश्चर्य हो रहा होगा लेकिन ये सच है. मेरठ को रावण की ससुराल माना जाता है. रावण की पत्नी मंदोदरी मेरठ की ही रहने वाली थीं. यहां आज भी वो मंदिर मौजूद है जहां मंदोदरी पूजा के लिए जाया करती थीं.

रावण की पत्नी मंदोदरी जिस मंदिर में पूजा करने जाया करती थीं. वो बिल्लेश्‍वर नाथ महादेव का मंदिर आज भी मेरठ में मौजूद हैं. मान्यता है कि भगवान भोलेनाथ ने मंदोदरी की तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें इस मंदिर में दर्शन दिए थे. मंदोदरी ने वरदान मांगा था कि उनका पति इस धरती पर सबसे बड़ा विद्वान और शक्तिशाली हो. इसी मंदिर के पास मां काली का भी ऐतिहासिक मंदिर है. जहां श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है. सभी को पूर्ण विश्‍वास है कि इस सिद्धपीठ में ईश्‍वर से जो भी वरदान मांगा जाएगा, वो अवश्य पूर्ण होगा.

मेरठ का प्राचीन नाम मयदन्त का खेड़ा था. यह मय दानव की राजधानी थी. मय दानव की पुत्री का ही नाम मंदोदरी था. मंदोदरी का विवाह रावण से हुआ था. इसलिए मेरठ को रावण की ससुराल कहा जाता है. उधर, मेरठ के प्रसिद्ध कालीदेवी मंदिर में तिल भर पैर रखने की आज जगह नहीं है.

सुबह से ही यहां श्रद्धालुओं की भीड़ है. मान्यता है कि इस मंदिर में पूजा अर्चना करने से न केवल मन की मुराद पूरी होती है, बल्कि जीवन सुख शान्ति से व्यतीत होता है. मंदिर की मान्यता है कि यहां जो भी सच्चे मन से आता है उसकी मुराद पूरी हो जाती है और मां उसके हर दुख को दूर कर देती हैं.

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