मेरठ के वैज्ञानिकों ने प्लास्टिक कचरे से बना दिया खास रसायन, होंगे ये फायदे

चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ के वैज्ञानिकों ने प्लास्टिक कचरे से शीशा जोड़ने वाला पाउडर बना लिया है. अभी तक इस महंगे रसायन को विदेशों से आयात करना पड़ता था.

Umesh Srivastava | News18 Uttar Pradesh
Updated: August 7, 2019, 6:56 PM IST
मेरठ के वैज्ञानिकों ने प्लास्टिक कचरे से बना दिया खास रसायन, होंगे ये फायदे
मेरठ विवि के वैज्ञानिकों ने बनाया विशेष रसायन
Umesh Srivastava | News18 Uttar Pradesh
Updated: August 7, 2019, 6:56 PM IST
प्लास्टिक हमारी ज़िन्दगी आसान करता है उसका वेस्टेज उतना ही हानिकारक भी है. लेकिन मेरठ के चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने प्लास्टिक के वेस्टेज से एक ऐसा रसायनिक पाउडर तैयार किया है, जिसे अभी विदेशों से आयात करना पड़ता था. यहां के वैज्ञानिकों ने दरअसल प्लास्टिक के कचरे से शीशा जोड़ने वाला पाउडर बना लिया है.

प्लास्टिक कचरे से बनाया कांच जोड़ने वाला पाउडर
प्लास्टिक की बोतल को की सालों तक मिट्टी में दबाकर रखा जाए तब भी इसका प्लास्टिक नष्ट नहीं होता. ऐसे प्लास्टिक वेस्टेज का इस्तेमाल कर मेरठ के चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने कांच जोड़ने का पाउडर तैयार किया है. विश्वविद्यालय के रसायन विज्ञान विभाग में लेमिनेटेड ग्लास और कंड्यूट पाइप के निर्माण में इस पाउडर का प्रयोग किए जाने की तकनीक का सफल परीक्षण किया गया है. एक निजी कंपनी इस तकनीक के लिए विश्वविद्यालय को लाखों रुपये देने को तैयार है.

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अब तक इस रसायन को विदेशों से आयात करना पड़ता था


पिछले 3 सालों से चल रहा था शोध
चौधरी चरण सिंह विवि के रसायन विज्ञान विभाग में भारत सरकार के डिपार्टमेंट आफ साइंस एवं टेक्नोलाॅजी द्वारा अनुमोदित रिसर्च प्रोजेक्ट पर पिछले तीन साल से शोध चल रहा है. प्लास्टिक की बोतलों और ट्यूब को एकत्र करने के बाद साफ करके छोटे टुकड़ों में काटा गया. इन्हें अलग-अलग जार में विभिन्न प्रकार के रसायनों के माध्यम से री-साइकल किया गया. विभाग की रिसर्च साइंटिस्ट डा. मीनू तेवतिया ने बताया कि पीईटी वेस्ट को अमिनोलिसिस और एल्कोहोलिसिस प्रक्रिया द्वारा टेरी थेलमाइजस नाम के पाउडर में बदला गया है. वहीं शोध विद्यार्थी इस प्रयोग से बेहद ख़ुश नज़र आ रहे हैं.

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वैज्ञानिकों ने प्लास्टिक कचरे से बनाया शीशा जोड़ने वाला पावडर

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मेरठ के वैज्ञानिकों की बड़ी उपलब्धि
​इस रिसर्च की सफलता का अंदाज़ा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि तीन सौ रुपए का पाउडर मात्र बीस रुपए के प्लास्टिक कचरे से तैयार किया गया है. इस तकनीक को हस्तांतरित करने के लिए एक कम्पनी ने पचास लाख रुपए का प्रस्ताव दिया है. विश्वविद्यालय की प्रयोगशाला में ही इस पाउडर से एक लिक्विड फार्मूलेशन बनाया गया है, जिसका इमारतों और कारों में प्रयोग होने वाले लेमिनेटेड ग्लास को परस्पर जोड़ने में इंटरलेयर के रूप में इस्तेमाल किया गया है. उद्योगों में यह इंटरलेयर विदेशों से आयात होता है. हर साल लेमिनेटेड ग्लास से जुड़ी कंपनियां इस पर लाखों डालर व्यय करती हैं.

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First published: August 7, 2019, 6:18 PM IST
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