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Meerut News: शहीद डिप्टी जेलर के पिता बोले- अखिलेश ने नहीं निभाया वादा, योगी सरकार पर जताया भरोसा

शहीद डिप्टी जेलर के पिता बोले- अखिलेश यादव ने नहीं निभाया वादा

शहीद डिप्टी जेलर के पिता बोले- अखिलेश यादव ने नहीं निभाया वादा

राजेंद्र त्यागी कहते हैं कि मुझे योगी सरकार (Yogi Government) पर पूरा भरोसा था कि मेरे इकलौते बेटे की हत्या का बदला जरुर लेगी.

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मेरठ. प्रयागराज (Prayagraj) में अरैल में सोमेश्वरनाथ मंदिर के पास एनकाउंटर में मारे गए वकील पांडेय उर्फ राजीव पांडेय उर्फ राजू पुत्र रामसहस पांडेय ने वर्ष 2013 में वाराणसी में सरेराह अंधाधुंध फायरिंग कर वाराणसी जिला जेल के डिप्टी जेलर अनिल त्यागी की हत्या कर पूरे प्रदेश में सनसनी फैला दी थी. एसटीएफ के साथ हुई मुठभेड़ में 50 हजार के इनामी वकील पाण्डेय उर्फ राजीव पाण्डेय उर्फ राजू और उसका साथी शार्प शूटर एचएस अमजद उर्फ अंगद उर्फ पिंटू को मारा गिराया गया. मेरठ (Meerut) जिले के रहने वाले शहीद अनिल त्यागी के पिता राजेंद्र त्यागी ने यूपी एसटीएफ को धन्यवाद देते हुए कहा कि घर के इकलौते चिराग का बदला पुलिस ने योगी राज में लिया.

उन्होंने कहा कि मुझे दिल को अब सुकून पहुंचा है. शहीद के पिता ने योगी सरकार से गुहार लगाते हुए कहा कि अखिलेश सरकार में 20 लाख रुपये आर्थिक मदद का एलान किया था, लेकिन आजतक सरकारी मदद नहीं मिली. राजेंद्र त्यागी कहते हैं कि मुझे योगी सरकार पर पूरा भरोसा था कि मेरे इकलौते बेटे की हत्या का बदला जरुर लेगी. वहीं शहीद अनिल त्यागी की पत्नी मेरठ ज़िला कारागार में ओएसडी के पद पर कार्यरत हैं.

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बता दें कि 23 नवंबर 2013 में वाराणसी के डिप्टी जेलर अनिल कुमार त्यागी की हत्या हुई थी. दोनों बदमाशों पर हत्या का आरोप था. माफिया मुख्तार अंसारी और मुन्ना बजरंगी के इशारे पर दोनों ने यह हत्या की थी. मुठभेड़ में ढ़ेर दोनों बदमाशों का लंबा आपराधिक इतिहास भी है. पिछले वर्ष भदोही के बाहुबली विधायक विजय मिश्रा ने भी राजीव पाण्डेय से खुद की जान का खतरा बताया था.
किसी की हत्या के फिराक में थे दोनों
सीओ एसटीएफ नवेंदु ने जानकारी देते हुए बताया कि दोनों बदमाश प्रयागराज वारदात को अंजाम देने की फ़िराक में थे. मुखबिर से जब इसकी सूचना मिली तो एसटीएफ ने उनकी घेराबंदी की. अरैल इलाके में एसटीएफ की घेराबंदी को देखकर उन्होंने फायरिंग कर दी. इसके बाद जवाबी फायरिंग में दोनों को मार गिराया गया. उन्होंने बताया कि दोनों ने रांची के किसी जेल के अधिकारी को मारने की सुपारी ली थी. प्रयागराज में वे किसी राजनीतिक या संभ्रांत व्यक्ति की हत्या करने के लिए पहुंचे थे.
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