Home /News /uttar-pradesh /

see for hundreds of years the message of brotherhood is seen in this fair of meerut

देखिए:- सैकड़ों वर्षो से मेरठ के इस मेले में देखने को मिलता है भाईचारे का संदेश

नौचंदी

नौचंदी मेले में लगे झूले

इतिहासकार नवीन गुप्ता का कहना है कि वर्ष 1672 में जब इस मेले की शुरुआत हुई थी.तब यह मेला एक दिन का लगता था.उसके पश्चात यह मेला 3 दिन का लगने लगा.नवरात्रों में इस मेले का आयोजन होता था.जिसमें नवचंडी मंदिर में घूमने आने वाले श्रद्धालु इस मेले का भी आनंद उठाते थे.अब इस मेले की अग

अधिक पढ़ें ...

    रिपोर्ट विशाल भटनागर, मेरठ

    मेरठ:-पश्चिम उत्तर प्रदेश मेरठ West Uttar-pradesh Meerut का ऐतिहासिक नौचंदी मेला historical Nauchandi fair अपने आप में ही एक मिसाल है.जहां यह मेला आपसी भाईचारे की मिसाल पेश करता है तो वहीं दूसरी ओर इस मेले का ऐतिहासिक महत्व भी है.इतिहासकारों का कहना है कि ऐतिहासिक नौचंदी मेला 1672 से निरंतर चलता आ रहा है.जिसमें मेरठ ही नहीं बल्कि देशभर के विभिन्न राज्यों के लोग घूमने के लिए आते हैं.सिर्फ वर्ष 1858 और 2020- 2021 में मेले का आयोजन नहीं हो पाया था.इतिहासकारनवीन गुप्ता का कहना है कि वर्ष 1672 में जब इस मेले की शुरुआत हुई थी.तब यह मेला एक दिन का लगता था.जिसमें पशुओं की खरीदारी होती थी.उसके पश्चात यह मेला 3 दिन का लगने लगा.नवरात्रों में इस मेले का आयोजन होता था.जिसमें नवचंडी मंदिर में घूमने आने वाले श्रद्धालु इस मेले का भी आनंद उठाते थे.अब इस मेले की अगर बात की जाए तो यह मेला निरंतर एक माह तक चलता है.जिसमें लोग घूमने के लिए आते हैं.

    आपसी भाईचारे की भी मिसाल है नौचंदी मेला
    नौचंदी मेले की एक खासियत यह भी है कि यह एक ऐसा स्थानभी है जहां पर चाहे मंदिर में आरती हो या मस्जिद, मजार में अजान हो दोनों की जगह आपसी भाईचारे के साथ तालमेल बैठाकर सैकड़ों वर्षों से भाईचारे की मिसाल कायम है.यह कहना हमारा नहीं बल्कि खुद मंदिर के मुख्य पुजारी और दरगाह के मुफ्ती का है.दरअसल नौचंदी मैदान में जहां मां चंडी देवी Maa chandi devi का मंदिर Temple और बाले मियां की मजार Bale Mian Mazar आमने-सामने बने है.जिसे कौमी एकता की मिसाल कहा जाता है.गौरतलब है कभी दोनों एक ही परिसर में हुआ करते थे.लेकिन अब दोनों के बीच में एक सड़क बनी हुई है.लेकिन दरवाजे आमने-सामने है.मंदिर में खड़े होकर मजार की तरफ देख सकते हैं और मजार में खड़े होकर मंदिर की तरफ देख सकते है.कभी यहां किसी बात को लेकर विवाद देखने को नहीं मिलता.

    आपसी तालमेल के कार्यक्रम के समय भी कर लेते हैं बदलाव
    बात चाहे रमजान की हो या नवरात्रों की हो मंदिर के मुख्य पुजारी संजय कुमार शर्मा और दरगाह के मुफ्ती मोहम्मद अशरफ मुफ्ती का कहना है कि आरती के समय अजान में थोड़ा बदलाव कर लिया जाता है.वहीं अजान के समय आरती में बदलाव कर दिया जाता है.इतना ही नहीं दोनों जगह अगर कोई बड़े आयोजन होते हैं.चाहे जागरण हो या कव्वाली हो या किसी भी प्रकार का कोई कार्यक्रम हो तो दोनों ही धर्मों के लोग प्रतिभाग करते हैं.बताते चलें कि नौचंदी मेले का एक बार नगर निगम और एक बार जिला पंचायत द्वारा आयोजन किया जाता था.लेकिन अब इस मेले को प्रांतीय घोषित कर दिया गया है.प्रांतीय मेला घोषित होने के पश्चात अब जिला प्रशासन द्वारा मेले की भव्यता के लिए विभिन्न कार्य किए जा रहे हैं.जिससे मेले में घूमने आने वाले लोगों को किसी भी प्रकार की परेशानी ना हो.

    विज्ञापन
    विज्ञापन

    राशिभविष्य

    मेष

    वृषभ

    मिथुन

    कर्क

    सिंह

    कन्या

    तुला

    वृश्चिक

    धनु

    मकर

    कुंभ

    मीन

    प्रश्न पूछ सकते हैं या अपनी कुंडली बनवा सकते हैं ।
    और भी पढ़ें
    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज

    अधिक पढ़ें

    अगली ख़बर