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सोतीगंज के चोर बाजार की पूरी कहानी, जहां मिनटों में कार को बना देते थे कबाड़

सोतीगंज के चोर बाजार की पूरी कहानी, जहां मिनटों में कार को बना देते थे कबाड़

मेरठ का सोतीगंज बाजार दशकों से चोरी की गाड़ियों के कटान के लिए कुख्यात रहा है. (प्रतीकात्मक)

मेरठ का सोतीगंज बाजार दशकों से चोरी की गाड़ियों के कटान के लिए कुख्यात रहा है. (प्रतीकात्मक)

मेरठ का सोतीगंज बाजार (Sotiganj Bazaar) दशकों से चोरी की गाड़ियों के कटान के लिए कुख्यात रहा है, लेकिन आजकल यहां की तस्वीर जुदा है. यहां अब या तो कबाड़ माफियाओं के घर पर कुर्की के बाद सील लगी हुई है या फिर दुकानों पर ताले जड़े हैं. और तो और अब यहां कुछ दुकानदारों ने अपनी दुकान के आगे लिख दिया है- 'मेरी दुकान में चोरी का सामान न बेचा जाता है न खरीदा.'

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मेरठ. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शाहजहांपुर में गंगा एक्सप्रेस-वे (Ganga Express way) के शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान मंच से बोलते हुए मेरठ के सोतीगंज बाजार (Sotiganj Bazaar) का नाम लिया था. दशकों से ये इलाका चोरी की गाड़ियों के कटान (Car Scrap) के लिए कुख्यात रहा है, लेकिन आजकल यहां की तस्वीर जुदा है. यहां अब या तो कबाड़ माफियाओं के घर पर कुर्की के बाद सील लगी हुई है या फिर दुकानों पर ताले जड़े हैं. और तो और अब यहां कुछ दुकानदारों ने अपनी दुकान के आगे लिख दिया है- ‘मेरी दुकान में चोरी का सामान न बेचा जाता है न खरीदा.’

इस कुख्यात इलाके का नाम भले ही सोतीगंज है, लेकिन यह हमेशा चोरी के वाहन कटान के लिए दशकों से जागता आ रहा था. मेरठ तो मेरठ, देश के कोने कोने में अगर किसी की गाड़ी कभी चोरी होती थी तो उसे सोतीगंज याद आता था कि कहीं उसकी गाड़ी यहां कट न गई हो. बताते हैं कि यहां मिनटों में बड़े से बड़े ट्रक के पुर्ज़े-पुर्ज़े अलग कर दिए जाते थे. ऐसे कुख्यात सोतीगंज पर जब योगी सरकार में पुलिस ने एक्शन शुरू किया, तो देखते ही देखते यहां की तस्वीर बदल गई. यहां कबाड़ माफियाओं की अब तक करोड़ों की सम्पत्ति कुर्क की जा चुकी है. एक से बढ़कर एक आलीशान कोठियों पर पुलिस का पहरा है. यही नहीं यहां कई दुकानदारों ने तो अब अपनी दुकान पर यह लिख दिया है कि मैं पहले कबाड़ का काम करता था. मेरी दुकान में न तो चोरी का सामान बेचा जाता है, न खरीदा और न ही भविष्य में खरीदूंगा. दुकानदारों ने इसके साथ ही लिखा है कि अगर मार्केट में कोई चोरी का काम करेगा तो उसकी सूचना उच्च अधिकारियों को देगा.

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ऑन डिमांड होने लगीं चोरियां
सोतीगंज में यूपी, हरियाणा, दिल्ली, पंजाब, राजस्थान और उत्तराखंड से आए चोरी व लूट के वाहन अवैध तरीके से काटे जाते थे. 90 के दशक में सोतीगंज में शुरू हुआ गाड़ियों के पुराने पार्ट्स का कारोबार काले बाजार में बदलता चला गया. चोरी करने वाले गिरोह तैयार हो गए. यहां ऑन डिमांड चोरियां होने लगीं. मेरठ से दिल्ली होते हुए यह कारोबार देशभर के कई राज्यों तक पहुंच गया. किसी को गाड़ी का कोई भी पार्ट्स लेना हो तो पूरे देश में भले न मिले, लेकिन मेरठ में मिल जाता था.

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31 साल के इस काले कारोबार के बीच तमाम पुलिस प्रशासनिक अधिकारी मेरठ में आए, लेकिन कोई भी इस काले कारोबार पर लगाम नहीं कस सका था. सरकारें बदलती रहीं, अफसर आते-जाते रहे, संसद तक में मामला गूंजता रहा, लेकिन सोतीगंज में चोरी की गाड़ियों के पार्ट्स बिकने का काला धंधा चलता रहा.

संसद में गूंजा सोतीगंज का नाम
मेरठ से सांसद राजेंद्र अग्रवाल ने वर्ष 2016 और 2018 में यह मामला संसद में भी उठाया. हालांकि यहां एसएसपी प्रभाकर चौधरी के सख्त फैसले ने आज मेरठ का नाम बदनामी की जगह शाबाशी में ला दिया है. जिस सोतीगंज बाजार को लेकर लखनऊ तक गूंज रहती थी उसे उन्होंने एक ही दिन में बंद करा दिया. उन्होंने लोगों को साफ मैसेज दे दिया कि यहां पर आप अब जूते-कपड़े बेचिए वाहनों के पुराने पार्ट्स नहीं बिकेंगे.

यही वजह रही कि शाहजहांपुर की रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेरठ के पुलिस प्रशासन की सराहना करते हुए कहा कि सोतीगंज ऐसा बाजार जहां पूरे देश से चोरी की गाड़ियां कटने के लिए आती थीं, उसे सिर्फ योगी राज में ही बंद किया जा सकता है.

Tags: Meerut news, UP police

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