Lockdown में गौरैया को आई घर की याद, फिर लौटी, देखें Video

मेरठ के शताब्दीनगर में जीवन सिंह बिष्ट का घर आजकल गौरैया चिड़िया का परमानेंट एड्रेस हो गया है.
मेरठ के शताब्दीनगर में जीवन सिंह बिष्ट का घर आजकल गौरैया चिड़िया का परमानेंट एड्रेस हो गया है.

Lockdown के बीच उत्तर प्रदेश के मेरठ (Meerut) में एक शख्स के घर दर्जनों गौरैया (Sparrow) ने ठिकाना बना लिया है. गौरैया इस परिवार के लोगों के साथ खेलती हुई भी नज़र आती है.

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मेरठ. लॉकडाउन (Lockdown) ने कुछ तो कमाल किया ही है. जैसे कि गौरैया (Sparrow) की घर वापसी. लगता है विलुप्त हो रही गौरैया की लॉकडाउन के दौरान घर वापसी हो गई है. कम से कम मेरठ के एक घर की तस्वीर देखकर तो आप यही कहेंगे. मेरठ (Meerut) में एक शख्स के घर गौरैया ने डेरा जमा लिया है. इस शख्स के घर एक दो नहीं, बल्कि दर्जनों गौरैया ने अपना घर बना लिया है. ये चिड़िया यहां इतना सेफ महसूस करती है कि वह इस परिवार के लोगों के साथ खेलती हुई भी नजर आती है. गौरैया के किसी घर में ऐसी हंसती-खेलती चहचहाती तस्वीरें जो भी देखता है, वो इस घर की तारीफ किए बगैर नहीं रहता है.

मेरठ के शताब्दीनगर में जीवन सिंह बिष्ट का घर आजकल गौरैया चिड़िया का परमानेंट एड्रेस हो गया है. यहां लॉकडाउन के दौरान ऐसी ख़ूबसूरत तस्वीरें देखने को मिल रही हैं, जिनको देखे आपको भी ज़माना हो गया होगा. एक ज़माने में गौरैया के चहचहाने की मधुर ध्वनि सुबह उठते ही सुनाई पड़ती थी, लेकिन प्रदूषण की आंधी में ये चहचहाहट विलुप्त हो गई थी.





प्रदूषण में कमी से चिड़िया को मिली संजीवनी
लॉकडाउन के कारण पर्यावरण प्रदूषण में भारी कमी से ऐसा लगता है कि इस ख़ूबसूरत चिड़िया को संजीवनी मिल गई है. जीवन सिंह बिष्ट बताते हैं कि उनके यहां गौरैया इतना फेमिलियर हो गई है कि वह उनके पोते-पोतियों के साथ भी खेलती हुई नजर आती है. कभी वह बिस्तर पर बैठ जाती है, तो कभी बच्चों की हथेलियों पर नज़र आ जाती है. कभी जीवन सिंह बिष्ट के सिर पर बैठ जाती है तो कभी एकाएक फुर्र हो जाती है. जीवन सिंह बिष्ट का कहना है कि वो सौभाग्यशाली हैं कि उनके यहां गौरैया ने अपना घर बसाया है.

लॉकडाउन का है असर
आसपास के लोग अब जीवन सिंह बिष्ट के घर को गौरैया वाला घर भी कहने लगे हैं. अगर आपको जीवन सिंह बिष्ट के यहां जाना है तो आपको उनके मोहल्ले में गौरैया वाले घर के बारे में पूछना पड़ेगा. लोग भले ही जीवन सिंह बिष्ट को नाम से न जानें, लेकिन वे गौरैया वाला घर जरूर जानते हैं. जीवन सिंह बिष्ट का कहना है कि वे इस चिड़िया को लेकर बीते 25वर्षों से कृत्रिम घोसला बनाते आए हैं. साल में कभी-कभार ये चिड़िया आ जाती थी, लेकिन लॉकडाउन ने तो कमाल कर दिया. पिछले 25 वर्ष में पहली बार इतनी गौरया एक साथ उनके यहां आई हैं.

अपनी मर्ज़ी से यहां आती है गौरैया
जीवन सिंह का कहना है कि चिड़िया अपनी मर्ज़ी से उनके घर रहती हैं. अपनी मर्ज़ी से खेलती कूदती हैं, जहां चाहे वहां फुदकती हैं और जब उसका मन करता है तो वह आकाश में उड़ जाती है. वह अपनी मर्ज़ी से यहां आती है और अपनी मर्ज़ी से चली भी जाती है. जीवन सिंह बिष्ट मेरठ के आयकर आयुक्त कार्यालय में कार्य करते हैं. मूल रूप से उत्तराखण्ड के रहने जीवन सिंह बिष्ट इससे पहले भी कई ऐसे कार्य कर चुके हैं, जिसके लिए उनकी काफी सराहना हुई है. मसलन नशामुक्ति को लेकर वे एक बड़ा अभियान भी चला आ रहे हैं, जिसे लेकर उन्हें कई बार सम्मानित किया जा चुका है. यही नहीं उनका नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में भी दर्ज हो चुका है.

 

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