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MEERUT NEWS: बिना एंट्रेंस के रिसर्च स्नातक 4 वर्षीय कोर्स का मौका, लेकिन...

UP News: नई शिक्षा नीति-2020 के तहत जो छात्र-छात्राएं स्नातक के साथ शोध वर्क करेंगे, अर्थात 4 वर्ष का स्नातक कोर्स करें ...अधिक पढ़ें

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    रिपोर्ट- विशाल भटनागर, मेरठ

    मेरठ: अधिकांश युवाओं का स्नातक, परास्नातक करने के बाद पीएचडी करने का सपना होता है. लेकिन देखा जाता है कि, एंट्रेंस एग्जाम के दौरान अधिकतर छात्र-छात्राओं का यह सपना पूरा नहीं हो पाता. लेकिन अब में एनईपी के तहत जो छात्र-छात्राएं 4 वर्ष का स्नातक-शोध के साथ करेंगे उन सभी को पीएचडी एंट्रेंस एग्जाम देने की आवश्यकता नहीं है. वह सीधे पीएचडी में प्रवेश ले सकते है. हालांकि इसके लिए कुछ नियम और शर्तें लागू हैं.

    नई शिक्षा नीति-2020 के तहत यूजीसी द्वारा गाइडलाइन जारी की गई है. ऐसे में एनईपी सेमेस्टर प्रणाली के अंतर्गत जो छात्र-छात्राएं 4 वर्ष का यूजी विद रिसर्च करेंगे तो उन्हें सीधे पीएचडी में प्रवेश का मौका मिलेगा. इसके लिए यदि स्टूडेंट्स यूजी में 75% से अधिक नंबर लाते हैं. तो उनको पीजी करने की आवश्यकता नहीं है. डायरेक्ट पीएचडी में प्रवेश ले सकते हैं. वहीं स्नातक में 75% से कम नंबर हैं. ऐसे छात्र-छात्राएं पीजी करने के बाद अगर दो वर्ष या चार सेमेस्टर पीजी में 55% नंबर आते हैं, तो उनको भी डायरेक्ट पीएचडी में प्रवेश मिलेगा.

    शिक्षा की गुणवत्ता में होगा सुधार
    सीसीएसयू तिलक पत्रकारिता एवं जनरलिज्म स्कूल के डायरेक्टर प्रोफेसर प्रशांत कुमार ने इस संबंध में NEWS 18 LOCAL से बात की. प्रोफेसर प्रशांत जी का कहना है कि, एनईपी और यूजीसी के इस नियम के अंतर्गत शिक्षा में भी गुणवत्ता का सुधार देखने को मिलेगा. जब छात्र-छात्राएं पहले से विषय में अध्ययन करते हुए पीएचडी करेंगे. तो वह अपने विषय पर अच्छी पकड़ रख पाएंगे. क्योंकि, जिस तरीके से इसके लिए स्नातक में 75% का नियम बनाया है. उसमें स्टूडेंट को क्लास करनी होंगी. इससे स्टूडेंट को पहले से ही कोर्स का पूरा ज्ञान हो जाएगा.

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    अभी यह है नियम
    अभी तक के नियमों की बात करें तो स्टूडेंट को यूजी-पीजी करने के बाद पीएचडी के लिए एंट्रेंस एग्जाम देना होता था. जिसके लिए पीज में 55% अंक अनिवार्य होते थे. ऐसे में जब कोई स्टूडेंट्स पीएचडी एंट्रेंस में अगर पास होता है तभी उसको पीएचडी में प्रवेश मिलता था. टेस्ट में अधिकांश छात्र पास नहीं हो पाते हैं. वहीं दूसरी ओर जो नेट जेआरएफ किए होते हैं उन छात्रों को भी डायरेक्ट एडमिशन का अवसर मिलता था. लेकिन नेट भी बहुत टफ है और अधिकांश छात्र मेरिट में नहीं आ पाते. ऐसे में जो युवा भविष्य में पीएचडी करना चाहेगा. उसके लिए बेहतर अवसर है कि वह पहले से ही इसकी अच्छे से तैयारी करें.

    Tags: Meerut news, UP news

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