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मेरठः-संस्कृत बने बोलचाल की भाषा इसलिए विद्वान कर रहे हैं मंथन

मेरठः-संस्कृत बने बोलचाल की भाषा इसलिए विद्वान कर रहे हैं मंथन

सीसीएसयू

सीसीएसयू में आयोजित संस्कृत महासम्मेलन

भले ही संस्कृत को भाषाओं की जननी कहा जाता हो. लेकिन आज के दौर की बात की जाए तो युवा संस्कृत का अध्ययन करने से बचते हैं.संस्कृत भाषा पूजा पाठ तक सीमित ना रहे यह भी अन्य भाषाओं की तरह बोलचाल की भाषा बन सके.जो युवा संस्कृत को कठिन समझते हैं.उन सभी युवाओं को ध्यान में रखते हुए अब संस्कृत (sanskrit )को सरल भाषा बनाया जाएगा.

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    मेरठ:-संस्कृत भाषा पूजा पाठ तक सीमित ना रहे यह भी अन्य भाषाओं की तरह बोलचाल की भाषा बन सके.जो युवा संस्कृत को कठिन समझते हैं.उन सभी युवाओं को ध्यान में रखते हुए अब संस्कृत (sanskrit )को सरल भाषा बनाया जाएगा.जिससे युवा संस्कृत का अध्ययन कर सकें.इसके लिए चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के नेताजी सुभाष चंद्र बोस सभागार में संस्कृत भारती के राष्ट्रीय सम्मेलन में चिंतन मंथन किया जा रहा है.इसमें देशभर के सभी जिलों से विद्वान प्रतिभाग कर रहे हैं. न्यूज़ 18 मेरठ की टीम से बातचीत करते हुए विद्वानों ने बताया कि संस्कृत काफी सरल भाषा है.ऐसे में युवा संस्कृत का अध्ययन करते हुए आगे बढ़े इसके लिए यहां पर अध्ययन किया जा रहा है.

    तीन साल की कार्य योजना होगीतैयार
    पंडित भारती द्वारा आयोजित किए गए शिविर में सभी योजनान्तर्गत काम किया जा रहे है.संस्कृत भारतीय अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख ने बताया कि संस्कृत सबसे सरल और आम भाषा है. ऐसे में सभी युवा संस्कृत का अध्ययन करें. इसके लिए यह कार्य किया जा रहा है.

    मंत्रोच्चारण तक सीमित ना रहे संस्कृत इसलिए विद्वान कर रहे मंथन
    संस्कृत सिर्फ मंत्र उच्चारण तक सीमित ना रहे.इसी वजह से संस्कृत भारती के हजारों कार्यकर्ता युवाओं को संस्कृत सीखा रहे हैं.गौरतलब है कि संस्कृत भारती द्वारा इस तरह का विशेष शिविर हर साल आयोजित किया था.लेकिन गत दो वर्षो में कोरोना काल के कारण यह शिविर आयोजित नहीं हुआ था.ऐसे में अबकी बार मेरठ में यह आयोजित किया गया.जिसमें देश भर के संस्कृत के विद्वान जो युवाओं तक संस्कृत पहुंचाने में लगे हुए हैं.वह मंथन चिंतन कर रहे हैं. साथ ही साथ जो चुनौतियां सामने आ रही हैं उसको एक दूसरे के साथ साझा कर रहे हैं.

    रिपोर्टविशाल भटनागरमेरठ

    Tags: मेरठ

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