रहस्यों से भरी हुई है कांवड़ यात्रा, जानिए- दालराम, चावलराम की दिलचस्प कहानी...

पहली नजर में आपको सिर्फ कांधे पर कांवड़ रखे कांवड़िए दिखाई देते हैं. केसरिया सैलाब दिखाई देता है, लेकिन कांवड़ की दुनिया रहस्यों से भरी हुई है.

Umesh Srivastava | News18 Uttar Pradesh
Updated: July 28, 2019, 12:05 AM IST
रहस्यों से भरी हुई है कांवड़ यात्रा, जानिए- दालराम, चावलराम की दिलचस्प कहानी...
जानिए कावड़ियों का सच
Umesh Srivastava | News18 Uttar Pradesh
Updated: July 28, 2019, 12:05 AM IST


क्या आपने दालराम, चावलराम, राममिर्च,पूड़ीराम खीरराम सुना है. आज हम आपको बताएंगे दालराम, चावलराम पूड़ीराम और राममिर्च की दिलचस्प कहानी. आप जानते हैं आजकल कांवड़ यात्रा का निराला रंग वेस्ट यूपी में दिख रहा है. कांवड़ यात्रा रहस्यों से भरी हुई है. पहली नजर में आपको सिर्फ कांधे पर कांवड़ रखे कांवड़िए दिखाई देते हैं. केसरिया सैलाब दिखाई देता है, लेकिन कांवड़ की दुनिया रहस्यों से भरी हुई है.




इन्हीं रहस्यों में से एक होता है भंडारा. सामान्य भंडारा और कांवड़ के भंडारे में बड़ा फर्क होता है. सामान्य भंडारे में आप पूड़ी और सब्ज़ी को पूड़ी और सब्जी ही बोलेंगे लेकिन कावंड़ के भंडारे में  दाल दालराम के नाम से जानी जाती है. पूड़ी, पूड़ीराम के नाम से जानी जाती है. सब्ज़ी, सब्ज़ीराम के नाम से जानी जाती है और फल फलराम के नाम से जाना जाता है. यानि जो भी भंडारे में प्रसाद रूपी भोजन बनता है उसमें रामशब्द जुड़ा होता है.


भंडारे में कांवड़ियों को कुछ ऐसे ही भोजन का प्रसाद दिया जाता है. प्रसाद परोसने वाले बच्चे बड़े कांवड़ियों से यही पूछते हुए नज़र आते हैं कि क्या उनको पूड़ीराम चाहिए.दालराम चाहिए या फिर रोटीराम चाहिए. हर भोजन के नाम के आगे रामशब्द लगाया जाता है. कांवड़ियों को जिन चीज़ों की ज़रूरत होती है वो उस भोजन के आगे राम लगाकर ही मांगते हैं.

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पूड़ी को कहते है पूड़ीराम
पूड़ी को कहते है पूड़ीराम



आमतौर पर कुम्भ में ये परम्परा देखी जाती है लेकिन कांवड़ यात्रा के दौरान भी भंडारे में आस्था का यही रंग देखा जा रहा है. आजकल वेस्ट यूपी में कांवड़ यात्रा अपने चरम पर है. कांवड़ यात्रा के दौरान जगह जगह पर लोग भंडारा लगाते हैं. एक साथ हज़ारों कांवड़ियों को भोजन कराया जाता है. कांवड़िए इन भंडारों में रुकते हैं विश्राम करते हैं और भोजन करने के बाद आगे बढ़ जाते हैं. शायद इसीलिए हिन्दुस्तान की आस्था के सामने पूरा विश्व नत्मस्तक होता है.


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First published: July 27, 2019, 11:11 PM IST
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