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वाह! हिन्दी भले न समझें पर संस्कृत फर्राटे से बोलते हैं तमिलनाडु से लेकर त्रिपुरा तक के ये विद्वान

वाह! हिन्दी भले न समझें पर संस्कृत फर्राटे से बोलते हैं तमिलनाडु से लेकर त्रिपुरा तक के ये विद्वान

मेरठ में संस्कृत भारती की ओर से आयोजित अखिल भारतीय सम्मेलन में देश की तेरह भाषाओं में संस्कृत सिखाने का अनूठा संकल्प लिया गया.

मेरठ में संस्कृत भारती की ओर से आयोजित अखिल भारतीय सम्मेलन में देश की तेरह भाषाओं में संस्कृत सिखाने का अनूठा संकल्प लिया गया.

तमिलनाडु से मेरठ पहुंचे संस्कृत के एक विद्वान (Sanskrit Scholar) से सवाल किया गया तो उन्हें हिंदी से संस्कृत में समझने के लिए ट्रांसलेटर की आवश्यकता हुई, लेकिन जैसे ही उन्होंने सवाल समझ लिया तो धाराप्रवाह संस्कृत में ऐसा जवाब दिया, जिसे सुनकर सभी आश्चर्यचकित हो गए. इस विद्वान ने न्यूज़18 से ख़ास बातचीत में कहा कि संस्कृत सभी भाषाओं की जननी है और वे तमिलनाडु में संस्कृत के प्रचार-प्रसार के लिए जुटे हुए हैं.

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मेरठ. मेरठ में सम्पन्न हुए संस्कृत सम्मेलन (Sanskrit Sammelan) में देश के कोने-कोने से विद्वानों ने हिस्सा लिया. इनमें त्रिपुरा, गुजरात, तमिलनाडु, जम्मू-कश्मीर, केरल और मणिपुर के विद्वान भी शामिल थे. इस दौरान कुछ ऐसे भी विद्वान मिले, जो हिंदी तो ठीक से नहीं समझ पा रहे थे लेकिन संस्कृत धारा प्रवाह बोल रहे थे. तमिलनाडु से मेरठ पहुंचे संस्कृत के एक विद्वान (Sanskrit Scholar) से सवाल किया गया तो उन्हें हिंदी से संस्कृत में समझने के लिए ट्रांसलेटर की आवश्यकता हुई, लेकिन जैसे ही उन्होंने सवाल समझ लिया तो धाराप्रवाह संस्कृत में ऐसा जवाब दिया, जिसे सुनकर सभी आश्चर्यचकित हो गए. इस विद्वान ने न्यूज़18 से ख़ास बातचीत में कहा कि संस्कृत सभी भाषाओं की जननी है और वे तमिलनाडु में संस्कृत के प्रचार-प्रसार के लिए जुटे हुए हैं.

देश भर से आए संस्कृत के विद्वानों ने बताया कि अब गृहणियों को पहले संस्कृत भाषा सिखाई जाएगी, जिससे घर-घर बालक बालिकाएं आसानी से सभी भाषाओं की जननी संस्कृत सीख सकें. संस्कृत भारती के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख पुणे के श्रीश जी ने बताया कि संस्कृत भाषा को आम लोगों तक विस्तारित करने के लिए पूरे देश में बड़े पैमाने पर कार्य किए जा रहे हैं. उन्होंने बताया कि कोरोना महामारी के दौरान भारत समेत 40 देशों में ऑनलाइन संस्कृत शिक्षण और प्रशिक्षण के लिए व्यवस्था की गई थी. इस दौरान विशेष रूप से अमेरिका, रूस, जापान, ऑस्ट्रेलिया, यूरोप के अलावा संयुक्त अरब अमीरात, ओमान और कतर जैसे खाड़ी देशों में भी बड़ी संख्या में प्रतिभागी संस्कृत सीखने के लिए ऑनलाइन माध्यम से जुड़े.

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उन्होंने बताया कि ऑनलाइन माध्यम से संस्कृत संभाषण का प्राथमिक प्रशिक्षण लेने वाले करीब एक लाख संस्कृत प्रेमियों को निरंतर संस्कृत से जोड़े रखने और उन्हें प्राथमिक संभाषण से आगे संस्कृत भाषा सिखाने का प्रयास किया जाएगा. इसके लिए 3 वर्षीय योजना बनाई गई है. योजना के तहत देश के 550 जिलों में संस्कृत प्रेमियों के समूह का गठन किया गया है, इन समूहों में 5 से 6 कार्यकर्ता संस्कृत सिखाने का बीड़ा उठा रहे हैं और इसका विस्तार आने वाले वर्षों में तहसील स्तर तक किया जाएगा.

इस योजना को मूर्त रूप देने के लिए आने वाले वर्ष में देश के हर प्रांत में संस्कृत सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे. इन सम्मेलनों में विशेष रूप से शिक्षण प्रमुखों से आग्रह किया जाएगा कि वह संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार को आगे बढ़ाएं और आम लोगों कभी संस्कृत पहुंचाएं. इसके लिए सभी 39 प्रांतों में शिक्षण प्रमुख तय कर दिए गए हैं. संस्कृत का प्रशिक्षण निशुल्क दिया जा रहा है. संस्कृत के प्रशिक्षण का कार्य ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों माध्यमों से किया जा रहा है और आगे भी जारी रहेगा. लोग अपनी सुविधानुसार प्रशिक्षण माध्यम का चयन कर सकते हैं.

संस्कृत भारती की ओर से 13 भाषाओं में संस्कृत के प्रशिक्षण की सुविधा प्रदान की जा रही है. हिंदी अंग्रेजी के अलावा अन्य भारतीय भाषाएं जैसे तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, ऊड़िया, असमिया, बांग्ला आदि भाषाएं भी शामिल हैं. संस्कृत भारती का प्रयास है कि लोग अपनी मातृभाषा में संस्कृत सीख सकें.

Tags: Meerut news, Sanskrit, Uttar pradesh news

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