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देखिए मेरठ के इस स्थान पर आकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने युवाओं से असहयोग आंदोलन में जुड़ने की थी अपील

राष्ट्रपिता

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की याद में लगाया गया था यह पेड़ 

महात्मा गांधी जी ने भी मेरठ में आकर युवाओं से असहयोग आंदोलन में जुड़ने की अपील की थी. जिसके बाद मेरठ कॉलेज के युवाओं ने बढ़ चढ़कर आंदोलन में हिस्सा लिया था.

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    मेरठ: पश्चिम उत्तर प्रदेश का शहर (Meerut) मेरठ अपने अंदर आजादी की अनेकों गाथाओं को संजोए हुए है. 1857 से लेकर 1947 जितने भी क्रांति के लिए आंदोलन हुए. उसमें मेरठ के लोगों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया.महात्मा गांधी जी ने भी मेरठ में आकर युवाओं से असहयोग आंदोलन में जुड़ने की अपील की थी. जिसके बाद मेरठ कॉलेज के युवाओं ने बढ़ चढ़कर आंदोलन में हिस्सा लिया था.
    22 जनवरी 1920 को पहली बार मेरठ आए थे बापू
    राष्ट्रपिता महात्मा गांधी पहली बार 22 जनवरी 1920 में मेरठ आए थे. मेरठ के कई स्थानों पर सभाओं को संबोधित करते हुए मेरठ की जनता से असहयोग आंदोलन में सहयोग करने का सभी वर्गो के लोगों से आवाहन किया था.जिसके बाद मेरठ के सभी धर्मों के लोगों ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था.
    मेरठ कॉलेज के छात्रों ने दी थी चांदी की प्लेट 
    इतिहासकार केडी शर्मा ने बताया कि मेरठ कॉलेज के छात्रों से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने सहयोग मांगा था. जिसमें हॉस्टल के छात्रों ने चांदी के प्लेट उन्हें गिफ्ट की थी.साथ ही अपनी पॉकेट मनी से भी धन एकत्रित करते हुए उस वक्त छात्रों ने जन सहयोग आंदोलन में आर्थिक मदद की थी.
    21 दिन का अनशन सफल होनेेे पर लगाया था यह पेड़ 
    महात्मा गांधी के 21 दिन के अनशन सफल होने के बाद जिस स्थान पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी मेरठ आए थे. वहीं उनकी स्मृति में एक बरगद का पेड़ भी लगाया गया था.उसी जगह पर एक स्तंभ में इस बात का उल्लेख हिंदी, इंग्लिश, संस्कृत और उर्दू भाषा में किया गया है.
    देवनागरी पाठशाला में रुके थे महात्मा गांधी  
    डीएन कॉलेज के प्राचार्य डॉ बीएस यादव बताते है कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जब 1920 में मेरठ आए थे. तो वह देवनागरी पाठशाला में रुके थे. वहीं पर एक सभा में हिंदू मुस्लिमों को एक साथ क्रांति में सहयोग करने की अपील की थी. राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की अपील का असर इतना पड़ा कि लोगों ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी द्वारा दिखाए मार्ग पर चलने का प्रण लिया था. इसी तरह से टाउन हॉल सहित अन्य स्थानों पर भी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी कई बार आए थे.

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