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गंभीर बीमारी के बाद भी नहीं मानी हार आज युवाओं के लिए प्रेरणा बने हैं मेरठ के जुड़वा भाई

गंभीर बीमारी के बाद भी नहीं मानी हार आज युवाओं के लिए प्रेरणा बने हैं मेरठ के जुड़वा भाई

सेरेब्रल

सेरेब्रल पाल्सी से ग्रस्त जुड़वा भाई आयुष पियूष गोयल

विषम परिस्थितियों के सामने युवा हार मान जाते हैं. लेकिन आज हम आपको ऐसे युवाओं के बारे में बताएंगे जो सेरेब्रल पाल्सी जैसी असाधारण बीमारी से ग्रसित होने के बावजूद भी उन्होंने हार नहीं मानी.वह अन्य युवाओं के लिए प्रेरणा बन गए.जी हां पश्चिम उत्तर प्रदेश के मेरठ स्थित बलवंत नगर में रहने वाले दो जुड़वा भाई सेरेब्रल पाल्सी नामक असाध्य रोग से ग्रस्त है.

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    मेरठ: विषम परिस्थितियों के सामने युवा हार मान जाते हैं. लेकिन आज हम आपको ऐसे युवाओं के बारे में बताएंगे जो सेरेब्रल पाल्सी जैसी असाधारण बीमारी से ग्रसित होने के बावजूद भी उन्होंने हार नहीं मानी.वह अन्य युवाओं के लिए प्रेरणा बन गए.जी हां पश्चिम उत्तर प्रदेश के मेरठ स्थित बलवंत नगर में रहने वाले दो जुड़वा भाई (twin brother) सेरेब्रल पाल्सी
    (cerebral palsy) नामक असाध्य रोग से ग्रस्त है. जिसमें युवा मानसिक रूप से भी नहीं सोच सकते.उनके शरीर के अंग भी काम नहीं करते. इन कठिनाइयों के बावजूद भी दोनों युवाओं ने हार नहीं मानी.बीमारी से संघर्ष करते हुए समाज सेवा के माध्यम से समाज को जागरूक कर रहे हैं.विषम परिस्थितियों में हार ना मानकर उनका सामना करना चाहिए.

    जन्म के बाद ही 3 महीने तक दोनों भाई को लेना पड़
    था इनक्यूबेटर का सहारा
    आयुष के पिता बताते है कि जब दोनों जुड़वा भाइयों का जन्म हुआ तो जैसे ही पता चला दो जुड़वां लड़के हुए हैं. तो परिवार में खुशी लहर दौड़ गई.लेकिन दोनों भाइयों का वजन सिर्फ 900-900 ग्राम था.वहीं ऑक्सीजन की कमी के कारण उन्हें तीन महीने तक इनक्यूबेटर में रहना पड़ा था.लेकिन माता-पिता ने हार नहीं मानी और बच्चों की बीमारी का इलाज कराते रहें.

    अपील के बाद भी कई स्कूलों ने नहीं दिया एडमिशन
    जैसे ही दोनों युवा भाई बड़े हुए स्कूल में एडमिशन के लिए माता-पिता ने फार्म जमा किए तो स्कूल वालों ने एडमिशन करने मना कर दिया.तब जाकर माता-पिता ने एक छोटे से स्कूल में उनका एडमिशन कराया.आयुष और पीयूष ने बताया कि कक्षाओं में बच्चे उनकी काफी मजाक बनाते थे. उसके बावजूद भी उन्होंने अपनी पढ़ाई पर निरंतर ध्यान दिया. जब इंटर में आयुष के 75.8 प्रतिशत और पीयूष के 68 % प्रतिशत नंबरों से पास हुए तब तत्कालीन शिक्षा मंत्री स्मृति ईरानी ने उन्हें प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया था.

    मंडलायुक्त ने किया मार्गदर्शन शुरू की समाज सेवा
    दोनों युवाओं की सक्रियता को देखते हुए तत्कालीन मंडलायुक्त मेरठ आलोक सिन्हा ने उनका मार्गदर्शन किया.जिसके बाद उन्होंने पेंटिंग बनाकर अपना एक वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया.उसके बाद आलोक सिन्हा के मार्गदर्शन में युवाओं ने अपना एक क्लब बनाया और उसके माध्यम से समाज में विभिन्न बुराइयों को दूर करने के लिए विभिन्न मुहिम चलाई. जिससे गरीब तबके के लोगों की मदद हो सके.गौरतलब है कि बीमारी से ग्रस्त होने के कारण तीन साल की उम्र में दिल्ली स्थित ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंस में पता चला कि दोनों भाई सेरेब्रल पाल्सी नामक असाध्य रोग से ग्रसित है. इस कारण उठने, बैठने, चलने, पेंसिल पकड़ने में दिक्कत होती थी. लेकिन माता-पिता ने भरपूर सहयोग किया.

    रिपोर्ट विशाल भटनागर मेरठ

    Tags: मेरठ

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