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Meerut: बूढ़ी गंगा के रहस्य पर अंतरराष्ट्रीय जनरल में प्रकाशित अनोखा शोध, जानें क्या है खास

Meerut: बूढ़ी गंगा के रहस्य पर अंतरराष्ट्रीय जनरल में प्रकाशित अनोखा शोध, जानें क्या है खास

रहस्यों से भरी बूढ़ी गंगा.

रहस्यों से भरी बूढ़ी गंगा.

Unique Research : हस्तिनापुर पर अध्यन कर रहे असिस्टेंट प्रोफेसर प्रियंक भारती का कहना है कि अगर बूढ़ी गंगा के अस्तित्व को बचाया जाए तो पांडवों की राजधानी रही हस्तिनापुर को बाढ़ मुक्त किया जा सकता है. मेरठ में शोभित विवि के असिस्टेंट प्रोफेसर और नेचुरल साइंसेज ट्रस्ट के अध्यक्ष प्रियंक भारती चिकारा का दावा है कि तैमूर आक्रमण के दौरान जिस गंगा का जिक्र किया गया है, वो बूढ़ी गंगा ही है.

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मेरठ. गंगा तो गंगा, लेकिन बूढ़ी गंगा! यह नाम सुनकर आप भी हैरत में पड़ गए होंगे कि आखिर बूढ़ी गंगा क्या है. लेकिन मेरठ में एक शख्स ने बूढ़ी गंगा के अस्तित्व को उजागर करने का दावा किया है. इस शख्स ने बूढ़ी गंगा पर शोध किया है. ये शोधपत्र अंतरराष्ट्रीय जनरल में प्रकाशित हुआ है. इस शख्स का कहना है कि अगर इस प्रोजेक्ट पर आगे कार्य हुआ तो पांडवों की राजधानी रही हस्तिनापुर बाढ़ से हमेशा के लिए मुक्त हो सकती है.

बूढ़ी गंगा के रहस्य को लेकर एक शख्स ने अनोखे शोध का दावा किया है. मेरठ के रहने वाले एक असिस्टेंट प्रोफेसर का कहना है कि उन्होंने प्रशासन के साथ मिलकर बूढ़ी गंगा को लेकर सर्वे किया है. इस सर्वे के बाद उनका शोधपत्र अंतरराष्ट्रीय जनरल में प्रकाशित हुआ है. हस्तिनापुर पर अध्यन कर रहे असिस्टेंट प्रोफेसर प्रियंक भारती का कहना है कि अगर बूढ़ी गंगा के अस्तित्व को बचाया जाए तो पांडवों की राजधानी रही हस्तिनापुर को बाढ़ मुक्त किया जा सकता है. मेरठ में शोभित विवि के असिस्टेंट प्रोफेसर और नेचुरल साइंसेज ट्रस्ट के अध्यक्ष प्रियंक भारती चिकारा का दावा है कि तैमूर आक्रमण के दौरान जिस गंगा का जिक्र किया गया है, वो बूढ़ी गंगा ही है.

प्रियंक के मुताबिक, शांतनु से विवाह के पश्चात कौरवों पांडवों का गंगा के तट पर खेलना, दुर्योधन का भीम को जहरीले लड्डू खिलाना, देवव्रत का भीष्म बनना, भीष्म की पुकार पर मां गंगा का अपने पुत्र से मिलने आना, वासुदेव श्री कृष्णा सहित पांडवों के युद्ध के बाद भीष्म से शिक्षा ग्रहण करने जाना – सम्भवतः ये सब वृतांत गंगा के इन्हीं किनारों पर घटित हुए थे. वे कहते हैं कि महाभारतकाल में गंगा की प्रवाह का यही रास्ता था. इससे कुछ ही दूरी पर कुरुकुल का राजमहल हुआ करता था. आज भी गंगा के पुराने रास्ते के पास उल्टा खेड़ा टीला मौजूद है. किवंदतियों के अनुसार इसी टीले पर कुरुकुल का महल होता था. गंगा के पास के जितने भी वृतांत महाभारत में पढ़ने को मिलते है वे सभी इसी गंगा के पुराने रास्ते के हैं.

प्रियंक का कहना है कि हस्तिनापुर में महाभारतकाल के उन्ही वृतांतों को जीवंत करने के लिए शायद बूढ़ी गंगा के किनारों पर द्रौपदी घाट, कर्ण घाट मंदिर और भीष्म गंगा मिलनस्थल जैसे स्थान निर्मित हुए हों. बूढ़ी गंगा नाम के पीछे एक तर्क और भी दिया जाता है कि गंगा का यह पुराना रूट है. इसलिए बूढ़ी गंगा कहा गया. पुराणों के अनुसार राजा निचक्षु के शासन काल में गंगा में भारी बाढ़ आने के कारण महाभारतकाल की यादोंवाला हस्तिनापुर छिन्न-भिन्न हो गया. जिसके बाद निचक्षु ने कौशाम्बी को अपनी राजधानी बनाया था. 1950 के दौर में हुए हस्तिनापुर उत्खनन में भी बाढ़ आने के प्रमाण मिले थे. हालांकि शोधकर्ता यह भी मानते हैं कि कौशाम्बी को राजधानी बनाने के पीछे कारण कुछ और रहा होगा, बाढ़ नहीं. हस्तिनापुर से इतनी दूर जाकर राजधानी बनाने की बात तर्कसंगत भी नहीं लगती. अगर राजधानी बनानी ही थी, तो नजदीक भी बनाई जा सकती थी.

शोधकर्ता प्रियंक भारती इस बाबत कमिश्नर और जिला वन अधिकारी से भी मिले. जिला वन अधिकारी राजेश कुमार का कहना है कि बू़ढ़ी गंगा के पुनरोद्धार के लिए टीम बनाई गई है और शासन को प्रोजेक्ट बनाकर रिपोर्ट भेजी जाएगी, ताकि लोग बूढ़ी गंगा के स्वरूप को जान सकें. प्रियंक का कहना है कि ये भी जानकारी मिलती है कि तैमूर के जरिए आक्रमण के लिए आर्मी का विभाजन किया गया. एक खंड को यमुना की ओर भेजा गया, दूसरे को काली नदी और तीसरे खंड को गंगा की ओर. गंगा की ओर जाने वाली आर्मी ने रात्रि में ग्राम मंसूरा (आज का मंसूरी गांव ) में डेरा डाला. अगले दिन तैमूर की फौज फिरोजपुर पहुंच गई. यहां जिस फिरोजपुर का जिक्र किया गया उसे गंगा के दाहिने किनारे पर बताया गया है. असल में जिसे यहां गंगा कहा गया है, वह आज की बूढी गंगा ही है. क्योंकि फिरोजपुर में यही स्थित है. तैमूर के समय तक भी गंगा का यह रूट पूर्ण रूप से चलता था या यह भी हो सकता है कि इस समय तक बूढी गंगा नाम ही न रखा गया हो. वे बताते हैं कि अकबर के शासन में मेरठ के सभी जिले दिल्ली के सूबे में आते थे, सभी परगना दिल्ली के सरकार में आते थे, सिर्फ सरधना इसमें शामिल नहीं था. अकबर के शासन में एक महल हस्तिनापुर में था. 1869 के एक दस्तावेज में यह वर्णन मिलता है कि अकबर के शासनकाल में गंगा के रूट में तबदीली हुई. यह भी वर्णन मिलता है कि तैमूर के समय तक गंगा इसी बूढ़ी गंगा के रूट पर बहती थी. देखने वाली बात होगी कि इस विषय पर शोध के बाद और कौन-कौन से रहस्य उजागर होते हैं.

Tags: Mahabharata, Meerut news today, River Ganga

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