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मेरठ में अनट्रेंड टीचर्स जांचेंगे यूपी बोर्ड की कॉपियां

मेरठ में अनट्रेंड टीचर्स जांचेंगे यूपी बोर्ड की कॉपियां

यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षाएं तो जैसे तैसे संपन्न हो गईं, लेकिन अब पैंसठ लाख कॉपियां जांचना भी दुनिया के सबसे बोर्ड के लिए किसी पहाड़ से कम नहीं। आपको जानकर हैरत होगी, लेकिन ये कड़वा सच है कि प्रदेश में जो शिक्षक कॉपियां जांचने जा रहे हैं वो ही अनट्रेंड हैं। उन्हें नई मूल्यांकन नीति के बारे में कुछ भी पता नहीं।

यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षाएं तो जैसे तैसे संपन्न हो गईं, लेकिन अब पैंसठ लाख कॉपियां जांचना भी दुनिया के सबसे बोर्ड के लिए किसी पहाड़ से कम नहीं। आपको जानकर हैरत होगी, लेकिन ये कड़वा सच है कि प्रदेश में जो शिक्षक कॉपियां जांचने जा रहे हैं वो ही अनट्रेंड हैं। उन्हें नई मूल्यांकन नीति के बारे में कुछ भी पता नहीं।

यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षाएं तो जैसे तैसे संपन्न हो गईं, लेकिन अब पैंसठ लाख कॉपियां जांचना भी दुनिया के सबसे बोर्ड के लिए किसी पहाड़ से कम नहीं। आपको जानकर हैरत होगी, लेकिन ये कड़वा सच है कि प्रदेश में जो शिक्षक कॉपियां जांचने जा रहे हैं वो ही अनट्रेंड हैं। उन्हें नई मूल्यांकन नीति के बारे में कुछ भी पता नहीं।

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यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षाएं तो जैसे तैसे संपन्न हो गईं, लेकिन अब पैंसठ लाख कॉपियां जांचना भी दुनिया के सबसे बोर्ड के लिए किसी पहाड़ से कम नहीं। आपको जानकर हैरत होगी, लेकिन ये कड़वा सच है कि प्रदेश में जो शिक्षक कॉपियां जांचने जा रहे हैं वो ही अनट्रेंड हैं। उन्हें नई मूल्यांकन नीति के बारे में कुछ भी पता नहीं।

एक तरफ अप्रशिक्षित गुरूजी हैं तो दूसरी तरफ शिक्षक संगठनों की राजनीति की पाठशाला अलग ही चल रही है। ऐसे में लाखों छात्र-छात्राओं का भविष्य रामभरोसे ही नजर आ रहा है। यूपी बोर्ड को एशिया का सबसे बड़ा बोर्ड कहा जाता है। इस बोर्ड ने एशिया की सबसे बड़ी लापरवाही का भी रिकॉर्ड बना दिया है।

यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाओं की कॉपियों का मूल्यांकन सोमवार से शुरू हो गया है। कॉपियां जांचने का काम अभी शुरू भी नहीं हुआ कि गुरूजी अपनी मांगों का ही पहाड़ा पढ़ने लगे। सूबे के माध्यमिक शिक्षक संगठनों ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए यूपी बोर्ड की परीक्षाओं के मूल्यांकन का बहिष्कार करने का एलान किया है।

शिक्षक संगठन से जुड़े परीक्षकों को पिछले साल के मूल्यांकन कार्य का भुगतान नहीं किए जाने को लेकर आक्रोश है। मूल्यांकन कार्य का बहिष्कार करने वाले संगठनों में उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ शर्मा गुट, माध्यमिक वित्तविहीन शिक्षक महासभा, यूपी माध्यमिक शिक्षक संघ ठकुराई गुट, चंदेल गुट और पाण्डेय गुट मुख्य रूप से शामिल हैं।

परीक्षाओं की तरह ही यूपी बोर्ड ने हाईस्कूल इंटरमीडिएट उत्तर पुस्तिकाओं की जांच के लिए भारी भरकम तैयारियां कीं, लेकिन सब धरी की धरी रह गईं। परीक्षार्थियों को अधिक से अधिक नंबर मिले, इसके लिए मूल्यांकन की नई नीति तैयार की गई थी। लेकिन इस संबंध में परीक्षकों को ट्रेनिंग ही नहीं दी गई। परीक्षकों को ट्रेनिंग देने का समय ही नहीं मिला।

शासन की तमाम कोशिशों के बावजूद हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के तकरीबन 65 लाख छात्र- छात्राओं की कॉपियां ऐसे हाथों में जा रही हैं, जिन्हें नए मूल्यांकन नियमों के बारे में कोई जानकारी नहीं है।   सभी शिक्षा अधिकारियों को 28 और 29 मार्च को प्रशिक्षण देने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन कहीं भी परीक्षकों को कॉपी जांचने की ट्रेनिंग नहीं दी गई। 28 मार्च को रामनवमी की छुट्टी थी जबकि 29 मार्च को रविवार को छुट्टी रही। ऐसे में सूबे के किसी भी जिले में परीक्षकों को ट्रेनिंग नहीं दी गई।

सूबे के तकरीबन डेढ़ लाख परीक्षक बिना ट्रेनिंग ही कॉपियों का मूल्यांकन शुरू कर देंगे। गौरतलब है कि यूपी बोर्ड की 2015 की परीक्षा के लिए हाईस्कूल में 34,98,430 और इंटरमीडिएट में 29, 24,768 यानि कुल 64,23,198 परीक्षार्थियों ने पंजीकरण कराया था। 1,35,946 परीक्षक कॉपियां जांच रहे हैं, लेकिन किसी भी जिले में कॉपी जांचने का प्रशिक्षण नहीं दिया गया।

इस लापरवाही को शिक्षक भी छात्र-छात्राओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ बता रहे हैं। वहीं यूपी बोर्ड ने सभी अधिकारियों को 13 अप्रैल तक हर हाल में मूल्यांकन पूरा करने के निर्देश दिए हैं। ऐसे में शिक्षकों की राजनीति और अप्रशिक्षित टीचर्स को देखते हुए देश के नौनिहालों का भविष्य कैसे होगा.ये आप आसानी से अंदाज़ा लगा सकते हैं।

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