UP Panchayat Chunav: जर्मनी में बिजेनस कर रहा शख्स गांव लौटकर लड़ रहा है पंचायत इलेक्शन, जानें कौन हैं इनके राजनीति के आदर्श

मेरठ में एक ऐसा शख्स ज़िला पंचायत सदस्य पद के लिए ताल ठोंक रहा है, जो पिछले पन्द्रह साल से जर्मनी में रहकर अच्छा ख़ासा व्यापार कर रहा था.

मेरठ में एक ऐसा शख्स ज़िला पंचायत सदस्य पद के लिए ताल ठोंक रहा है, जो पिछले पन्द्रह साल से जर्मनी में रहकर अच्छा ख़ासा व्यापार कर रहा था.

Uttar Pradesh Gram Panchayat Election: जर्मनी से लौटे शख्स गौरव का कहना है कि अब वो चुनाव जीतकर जनता की सेवा करना चाहता है. क्योंकि जो सुख अपने वतन की मिट्टी में है वो कहीं नहीं.

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उत्‍तर प्रदेश के मेरठ में पंचायत चुनाव का गाढ़ा रंग देखने को मिल रहा है. इसी कड़ी में जर्मनी में रहकर बिजनेस कर रहे शख्स को ये चुनाव इतना भाया कि वो विदेश से लौटकर गांव की मिट्टी में रम गया है. इस शख्स का कहना है कि अब वो चुनाव जीतकर जनता की सेवा करना चाहता है, क्योंकि जो सुख अपने वतन की मिट्टी में है वो कहीं नहीं.

आपको शायद फिल्म स्वदेश याद हो जिसमें दिखाया गया है कि कैसे वतन की मिट्टी चुम्बक की तरह शख्स को खींच लाती है. कुछ ऐसी कहानी पंचायत चुनावों में भी सामने आ रही है. मेरठ में एक ऐसा शख्स ज़िला पंचायत सदस्य पद के लिए ताल ठोंक रहा है, जो पिछले पन्द्रह साल से जर्मनी में रहकर अच्छा ख़ासा व्यापार कर रहा था. इस शख्स को इस बार पंचायत चुनाव का गाढ़ा रंग विदेश से स्वदेश खींच लाया.

मेरठ के रहने वाले गौरव चौधरी बीते दिनों विदेश से लौटे और फिर उन्होंने फैसला किया कि अब वो जि़ला पंचायत सदस्य पद का चुनाव जीतकर जनता की सेवा करेंगे. गौरव का कहना है कि जो सुख स्वेदश में है वो विदेश में नहीं. गौरव बताते हैं कि उनका जर्मनी में शानदार बिजनेस है और वह जिला पंचायत के चुनाव में इस बार अपनी किस्मत आजमाएंगे. इसे समाज सेवा का जज्बा कहे या फिर राजनीति का ग्लैमर. वजह जो भी हो, लेकिन जर्मनी में वर्षों से बिजनेस कर रहे गौरव चौधरी को जिला पंचायत की राजनीति इतनी भाई कि वो जर्मनी से अपने पैतृक गांव कुशेड़ी लौट आए हैं हैं. गौरव का कहना है कि वो इस बार ज़िला पंचायत सदस्य के लिए वार्ड 18 से चुनाव लडेंगे. इसके लिए वह दिन रात प्रचार कर रहे हैं. गौरव राजनीति में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को आदर्श मानते हैं. उनका कहना है कि उन्होंने हिन्दुस्तान की छवि समूचे विश्व में बदलकर रख दी है.

गौरव का फैमिली बैकग्राउंड हाई प्रोफाइल होने की वजह से उनके चुनाव लड़ने की ख़बर इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है. गौरव की पढ़ाई लिखाई कुरुक्षेत्र में हुई. वो बिजनेस मैनेजमेंट की पढ़ाई करने के बाद जर्मनी चले गए थे. और वहीं पर इंपोर्ट एक्सपोर्ट और कंस्ट्रक्शन का काम शुरू किया था. उनके विदेश से स्वदेश लौटने की बात को सभी अपने अपने नज़रिए से देख रहे हैं. दूसरे प्रत्याशी इसे राजनीतिक मुद्दा बना रहे हैं.
गौरव का कहना है कि वो जर्मनी में रहते भले ही रहे हों. लेकिन साल में 2 बार वो गांव जरूर आ जाते हैं. गौरव बताते हैं कि वह कई साल से अपने दादा चौधरी भीम सिंह मेमोरियल ट्रस्ट के नाम से संस्था चला रहे हैं. ट्रस्ट के माध्यम से जरूरतमंद बच्चों की मदद करते रहते हैं. वह जर्मनी में रहते जरूर है, लेकिन अपने गांव समाज के लिए कुछ करना चाहते हैं. इसी जज्बे ने जिला पंचायत जिला पंचायत सदस्य बनने का उत्साह जगाया और इस समय गांव आकर चुनाव लड़ने ही नहीं बल्कि जीत हासिल करने के लिए दिन रात मेहनत कर रहे हैं. वह चाहते हैं कि युवाओं के लिए रोजगार और गरीब तबके की अन्य सभी जरूरतें पूरी की जाए.कह सकते हैं कि वार्ड 18 में इस बार दिलचस्प घमासान देखने को मिलेगा.
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