एक भी मच्छर नहीं, न बाढ़ में कभी डूबेगा और गेट बंद होने पर नहीं हो सकता कोई दाख‍िल, जानें कैसा है रावण का सुसराल

देखें कैसा है रावण का सुसराल

देखें कैसा है रावण का सुसराल

Uttar Pradesh News: श्रवण कुमार यहां अपने मात-पिता को लेकर आए और उन्होंने इसी स्थान पर रावण के ससुराल के मयराष्ट्र अपनी यात्रा रोक दी थी. कहा था कि वो अपने माता-पिता को उठाने का किराया लेंगे.

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आमतौर पर अगर आप ऊंची से ऊंची छत पर पहुंच जाएं तो ज्यादा से ज्यादा पूरा मोहल्ला नज़र आ सकता है, लेकिन उत्‍तर प्रदेश के मेरठ में एक ऐसा मोहल्ला है जहां छत पर पहुंचते ही पूरा का पूरा शहर नज़र आता है. माना जाता है कि यह वही स्थान है जहां रावण की ससुराल हुआ करती थी. आप जब अपनी दो मंज‍िला या तीन मंज‍िला या फिर अपार्टमेंट की छत पर जाते हैं तो आपको ज्यादा से ज्यादा पूरा मोहल्ला नज़र आएगा लेकिन आज हम आपको ऐसे स्थान के बारे में बताने जा रहे हैं जहां से पूरा ज‍िला नज़र आता है. यह स्थान है मेरठ में और इस स्थान को रावण की ससुराल माना जाता है. हम बात कर रहे हैं मेरठ के मालीपाड़ा मोहल्ले की. इस मोहल्ले की किसी भी छत पर आप चले जाइए तो आपको पूरा शहर नजर आएगा.

रावण की सुसराल कहे जाने वाला ये इलाका इतना ऊंचा है कि यहां लोगों को ग्राउंड फ्लोर पर पहुंचने के लिए भी जीने का सहारा लेना पड़ता है. मेरठ के मालीपाड़ा में रहने वाले लोग गौरवान्वित महसूस करते हैं कि वो ऐसे स्थान के निवासी हैं, जहां मंदोदरी रहा करती थीं.

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न्यूज़ 18 की टीम जब रावण की ससुराल माने जाने वाले इस मोहल्ले में एक छत पर पहुंची तो हमें भी यकीन नहीं हुआ. क्योंकि पूरा का पूरा शहर एक झलक में नज़र आ रहा था. इस छत से हमें दूर-दूर तक की चीज़ें ऐसे दिखीं मानों हम किसी छत पर नहीं बल्कि हम ड्रोन व्यू देख रहे हों. इस मोहल्ले के एक घर की छत से हमें क्रांति का उदगम स्थल, औघड़नाथ मंदिर, बिल्लेश्वर नाथ महादेव मंदिर शहीद स्मारक लिसाड़ी गेट देहली गेट शाहपीर गेट आदि कई स्थान एक साथ एक ही जगह से नज़र आ गए. लोगों ने बताया कि इन गेट वाले मोहल्लों का भी यहां इतिहास है.
बताया जाता है कि मेरठ के मोहल्लों के नाम गेट शब्द से इसलिए रखे गए थे, क्योंकि शहर के सारे गेट एक ज़माने में अगर बंद हो जाते थे. तो मेरठ शहर के अंदर कोई दाखिल नहीं हो सकता है. रावण की सुसराल माने जाने वाले इस मोहल्ले से वो सारे गेट भी नज़र आते हैं.

मोहल्ले के लोगों का कहना है ईश्वर न करे कि कभी बाढ़ आए लेकिन अगर कभी बाढ़ आई तो पूरा शहर डूब सकता है ये स्थान कभी नहीं डूबेगा. लोगों ने एक और ख़ासियत बताई कि संकरा स्थान होने के बावजूद इस स्थान पर एक भी मच्छर नहीं रहता और तो और इस इस मोहल्ले में एक कोठरी के अंदर ऐसा मंदिर मौजूद हैं जहां ऐसी प्राचीन मूर्तियां हैं, जिन पर शोध किया जा रहा है. बताया जाता है कि ये मूर्तियां गुप्तकाल की हो सकती है. इस कोठरीनुमा मंदिर की भी निराली कहानी है.

वहीं एक ऐसा मंदिर भी हैं जहां रावण की पत्नी मंदोदरी पूजा करने के लिए जाती थी. पुजारी बताते हैं कि मेरठ के बिल्लेश्वर नाथ महादेव मंदिर में मंदोदरी भोलेनाथ की पूजा करने आती थीं. उन्होंने ये भी बताया कि इस शहर में कई ऐसे लोग हैं जो रावण को दामाद मानते हैं और आज भी वो दशहरे के दौरान उनका पुतला दहन नहीं देखते.



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उत्‍तर प्रदेश के मेरठ में एक ऐसा मोहल्ला है जहां छत पर पहुंचते ही पूरा का पूरा शहर नज़र आता है


पंडित जी बताते हैं कि कभी ये स्थान मयराष्ट्र कहलाता था और यहां सुरंगें हुआ करती थीं. वो कथा भी बताते हैं कि एक बार श्रवण कुमार यहां अपने मात-पिता को लेकर आए और उन्होंने इसी स्थान पर उन्होंने अपनी यात्रा रोक दी थी. कहा था कि वो अपने माता-पिता को उठाने का किराया लेंगे. तब उनकी माता ने पूछा था कि वो कहां पर हैं. जब श्रवण ने बताया कि वो मयराष्ट्र में है तो श्रवण कुमार की मां ने कहा कि वो उसे किराया देंगी लेकिन पहले वो मयराष्ट्र की सीमा उन्हें पार करा दे. जैसे ही मयराष्ट्र की सीमा पार हुई. श्रवण कुमार माता-पिता के पैरों में गिर पड़े थे और माफी मांगी. तब मां ने बताया कि ये उसका दोष नहीं बल्कि स्थान का दोष है. बाद में यही स्थान आज़ादी के आंदोलन में बगावत के लिए जाना गया और यहीं से क्रान्ति की ज्वाला फूटी थी. इसी शहर के बगावती तेवर ने हमें आज़ादी भी दिलाई. वाकई में मेरठ के रहस्य निराले हैं.
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