संभलकर बोलें! हेमा मालिनी, संगीत सोम जैसे नेताओं को अमित शाह की खरी-खरी

अमित शाह ने संगीत सोम, हेमा मालिनी, सुरेश राणा, मुरली मनोहर जोशी, संजीव बालियान और राजेंद्र अग्रवाल जैसे सांसदों को विशेष रूप से चेताया.

News18Hindi
Updated: August 12, 2018, 9:46 PM IST
संभलकर बोलें! हेमा मालिनी, संगीत सोम जैसे नेताओं को अमित शाह की खरी-खरी
अमित शाह
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Updated: August 12, 2018, 9:46 PM IST
बीजेपी के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष अमित शाह ने रविवार को अपनी पार्टी के नेताओं को 2019 के लोकसभा चुनावों से पहले विवादित बयान देने से बचने को कहा है. सूत्रों ने बताया कि सांसदों के साथ बंद कमरे में बैठक के दौरान शाह ने उनसे कहा कि वे अपने संसदीय क्षेत्रों में जाएं और जनता को सरकारी योजनाओं की जानकारी दें.

उन्‍होंने 2014 के लोकसभा चुनावों की तरह ही जमीनी स्‍तर पर लगातार प्रयास करने पर जोर दिया. शाह ने विधायकों और सांसदों से कहा कि वह अपने क्षेत्र के प्रत्‍येक गांव में जाएं और कम से कम 20 घरों में जाकर चाय पियें. खबरें हैं कि यूपी के आधे से ज्‍यादा वर्तमान बीजेपी सांसदों को दोबारा टिकट नहीं मिलेगा ऐसे में शाह की चेतावनी काफी अहम है.

सूत्रों ने बताया कि अमित शाह ने संगीत सोम, हेमा मालिनी, सुरेश राणा, मुरली मनोहर जोशी, संजीव बालियान और राजेंद्र अग्रवाल जैसे सांसदों को विशेष रूप से चेताया. बीजेपी के वरिष्‍ठ नेता मुरली मनोहर जोशी काफी कानपुर से गायब ही रहे हैं और लोगों में उनके खिलाफ नाराजगी की खबरें भी आ रही हैं.

फिल्‍मों से राजनीति में आईं हेमा मालिनी विवादित बयानों की वजह से चर्चाओें में रहती हैं. बीजेपी को लगता है कि ऐसे बयानों से उसे नुकसान हो सकता है. हेमा ने थोड़े दिनों पहले ही कहा था कि अगर वह चाहें तो एक मिनट में मुख्‍यमंत्री बन सकती हैं लेकिन उन्‍हें बंधन पसंद नहीं है. इससे पहले उन्‍होंने मुंबई में कमला मिल्‍स में लगी आग के लिए जनसंख्‍या को जिम्‍मेदार ठहराया था. संगीत सोम, सुरेश राणा और बालियान 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों में आरोपी हैं.

सूत्रों का कहना है कि कैराना में हार के बाद से बीजेपी 2019 को लेकर चिंतित है. वह सपा, बसपा और रालोद के महागठबंधन की काट ढूंढने में लगी हुई है. बीजेपी को पता है कि केंद्र की सत्‍ता में बने रहने का रास्‍ता यूपी से होकर ही गुजरता है ऐसे में यहां कि 80 सीटों पर पूरी मेहनत करने की जरूरत है. इसलिए पार्टी विवादों में समय जाया करने के बजाय विकास को मुद्दा बनाना चाहती है.
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