इस शिव मंदिर से मिल रहा है जल संरक्षण का खास संदेश, भोलेनाथ पर चढ़ने वाला बूंद-बूंद पानी आता है काम

आमतौर पर शिव मंदिर पर चढ़ने वाला जल बेकार हो जाता है, लेकिन मेरठ के औघड़नाथ मंदिर में इस जल को भी संरक्षित किया जाता है.

Umesh Srivastava | News18 Uttar Pradesh
Updated: July 25, 2019, 4:51 PM IST
इस शिव मंदिर से मिल रहा है जल संरक्षण का खास संदेश, भोलेनाथ पर चढ़ने वाला बूंद-बूंद पानी आता है काम
मेरठ के औघड़नाथ मंदिर में जल संरक्षण को लेकर सरहानीय पहल की गई है.
Umesh Srivastava | News18 Uttar Pradesh
Updated: July 25, 2019, 4:51 PM IST
आप किसी भी शिव मंदिर में जल चढ़ाने के बाद शायद ही सोचते होंगे कि ये जल कहां जाता होगा, इसका क्या होता होगा? ज्यादातर शिव मंदिरों में भोलेनाथ को चढ़ने वाले जल के संरक्षण की व्यवस्था नहीं होती है, लेकिन आज हम जिस शिव मंदिर के बारे में आपको बताने जा रहे हैं यहां भगवान भोलेनाथ पर चढ़ने वाला लाखों लीटर जल संरक्षित किया जाता है. अकेले सावन में ही महादेव के इस मंदिर में आठ लाख लीटर जल सहेजा जाएगा.

मेरठ के औघड़नाथ मंदिर ने की सराहनीय पहल
मेरठ के औघड़नाथ मंदिर में जल संरक्षण को लेकर सरहानीय पहल की गई है. यहां भोलेबाबा को चढ़ने वाला जल भी संरक्षित होता है. आमतौर पर शिव मंदिर पर चढ़ने वाला जल बेकार हो जाता है, लेकिन मेरठ के औघड़नाथ मंदिर में इस जल को भी संरक्षित किया जाता है. यहां महादेव जल संरक्षण का संदेश देते हुए नज़र आते हैं. इस बार ही सावन में यहां करीब आठ लाख लीटर जल सहेजा जाएगा. यहां चढ़ने वाले जल को संजोने के लिए मंदिर परिसर में पांच कुएं बने हुए हैं, जिसमें सारा जल संरक्षित होता है,जो हमारे भूजल के स्तर को भी सुधारता है.

सावन के महीने में यहां...

सावन का महीना भगवान शिव का महीना होता है. लाखों कांवड़िए गंगा जल लेकर आते हैं और भोलेनाथ को चढ़ाते हैं. यानि औघड़नाथ मंदिर में सावन के महीने के दौरान लाखों श्रद्धालु आते हैं और जलाभिषेक करते हैं. जलाभिषेक के बाद जो जल व्यर्थ चला जाता था, अब वही धरती को सींच रहा है. यहां जल व्यर्थ नहीं जाता बल्कि भूजल स्तर को बढ़ा रहा है. मंदिर परिसर में रेन हार्वेस्टिंग सिस्टम भी लगा हुआ है, जिससे बारिश का जल भी संरक्षित किया जाता है. मजेदार बात ये है कि यहां आने वाले लोग मंदिर की इस सराहनीय पहल की तारीफ करते नहीं थकते.

इस लिए पड़ा गंगाधर नाम
गंगा जी की धारा भी शिव की जटाओं से ही निकली है. इसलिए महादेव का एक नाम गंगाधर भी है. उनका रुप प्रकृति प्रेम का संदेश भी देता है. कह सकते हैं कि भगवान औघड़दानी भी जल संचय का संदेश देते हैं. ऐसे में देश के विभिन्न मंदिरों में जल संचय करने की पहल शुरू होनी चाहिए, क्योंकि जल ही जीवन है और बिन पानी सब सून.
Loading...

ये भी पढ़ें-क्या आप जानते हैं फसल बीमा की ये शर्तें, यूपी के किसानों को ऐसे मिलेगा लाभ!

लखनऊ यूनिवर्सिटी में पढ़ाया जाएगा 'ट्रिपल तलाक', धर्मगुरुओं ने जताया ऐतराज
First published: July 25, 2019, 4:50 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...