UP: समूह बनाकर की 65 लाख की कमाई, जानिए कैसे बदलने लगी ग्रामीण महिलाओं की जिंदगी

मेरठ की महिलाओं ने जिले में कुल एक सौ बीस समूह बनाए. हर समूह की महिलाओं में बीस लोगों को शामिल किया गया.

मेरठ की महिलाओं ने जिले में कुल एक सौ बीस समूह बनाए. हर समूह की महिलाओं में बीस लोगों को शामिल किया गया.

सात महीने में मेरठ की महिलाओं ने अलग -अलग समूह बनाकर कुल पैंसठ लाख रुपए की कमाई कर डाली.  इस कामयाबी को लेकर उप गन्ना आयुक्त का कहना है कि ये महिलाओं की मेहनत का नतीजा है.

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मेरठ. वेस्ट यूपी की महिलाओं ने समूह बनाकर करिश्मा करके दिखा दिया. गन्ना विभाग की मदद से महिला समूहों ( Womens Group ) ने गन्ना पौध नर्सरी (Sugarcane Plant Nursery) से न सिर्फ आमदनी बढ़ाई, बल्कि वह अपने पैरों पर खड़ी हो गईं. इन महिलाओं ने चंद महीनों में ही कामयाबी की इबारत लिख दी. आपको जानकर अच्छा लगेगा कि मात्र सात महीने में मेरठ की महिलाओं ने अलग -अलग समूह बनाकर कुल पैंसठ लाख रुपए की कमाई कर डाली.  इस कामयाबी को लेकर उप गन्ना आयुक्त का कहना है कि ये महिलाओं की मेहनत का नतीजा है. उप गन्ना आयुक्त राजेश मिश्र ने कहा कि मेरठ के साथ साथ हापुड़ बुलंदशहर बागपत गाजय़िाबाद की महिलाओं ने भी अपनी काबलियत का लोहा मनवाया है.

ख़ासतौर से मेरठ की महिलाओं ने जिले में कुल एक सौ बीस समूह बनाए. हर समूह की महिलाओं में बीस लोगों को शामिल किया गया. बड चिप के माध्यम से इन महिलाओं ने गन्ने की पौध तैयार की. इसके बाद शुरु हो गई गांव बैठे आमदनी. एक एक समूह की महिलाओं ने डेढ डेढ़ लाख रुपए कमा लिए. ऐसे ही बागपत में साठ समूह हैं. गाजियाबाद में बीस समूह, हापुड़ में चालीस समूह और बुलंदशहर में अस्सी समूह बनाकर समूचे मंडल में महिलाओं ने एक करोड़ रुपए से ज्यादा की आमदनी हुई. समूह का फायदा हुआ तो हर एक महिला की भी घर बैठे आमदनी हो गई.

मेरठ के साथ-साथ समूचे मंडल में आजकल महिलाएं यही आत्मनिर्भर अभियान चला रही है. महिलाओं का ये आत्मनिर्भर अभियान आजकल वेस्ट यूपी में चर्चा का विषय बना हुआ है. गांव बैठे लाखों रुपए की आमदनी कर रही महिलाएं इस नई बयार के लिए यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी धन्यवाद दे रही हैं. गन्ना बेल्ट में ये नई बयार नई बहार ला रही है.
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