PM मोदी की वजह से बदली किस्‍मत, अब ये युवा दूर करेगा देश की ये बड़ी 'परेशानी'

संदीप ने कैंपस में गंदे नाले के ऊपर प्रोजेक्ट लगाया, जिसमें पांच चरणों में से अंतिम में पानी का टीडीएस 70 मिला. जबकि नाले के पानी का टीडीएस 3000 से भी ज्यादा था.

Umesh Srivastava | News18 Uttar Pradesh
Updated: August 6, 2019, 9:48 PM IST
PM मोदी की वजह से बदली किस्‍मत, अब ये युवा दूर करेगा देश की ये बड़ी 'परेशानी'
पीएम की प्रेरणा से बदली किस्‍मत.
Umesh Srivastava | News18 Uttar Pradesh
Updated: August 6, 2019, 9:48 PM IST
इस युवा ने नाले के पानी को पीने लायक बना दिया है. जी हां, ये सच है, लेकिन आप शायद सोच में पड़ गए होंगे कि नाले के पानी को कैसे पीने के पानी में तब्दील किया जा सकता है. लेकिन, मेरठ के एक युवा शोधार्थी संदीप वर्मा ने नाले के पानी से साफ पीने का पानी तैयार कर सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को अपना आदर्श और मॉटिवेटर मानने वाले इस रिसर्च एसोसिएट का ये प्रोजेक्ट स्टार्ट अप इंडिया में भी शामिल हो गया है.

मेरठ के युवा शोधार्थी संदीप ने किया अऩोखा कारनामा
सफाई योजना में सीवरेज सबसे बड़ी समस्या है, जिसके निराकरण के लिए मेरठ के युवा वैज्ञानिक ने बड़ी उम्मीद जगाई है. सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट नालों के पानी को सिर्फ सिंचाई योग्य ही बना पाते हैं, लेकिन मेरठ की एक प्राइवेट यूनिवर्सिटी में रिसर्च एसोसिएट संदीप ने विशेष तकनीक से नाले के पानी को पेयजल में तब्दील कर दिया है. यही नहीं, छोटी टरबाइन से बिजली भी बना दी. स्टार्ट अप इंडिया में शामिल इस प्रोजेक्ट को आइआइटी मुंबई ने भी सराहा है. जबकि संदीप का कहना है कि इस यंत्र से वो 20 मिनट में 100 लीटर पेयजल उपलब्ध कराते हैं.

संदीप वर्मा ने नमामि गंगे प्रोजेक्ट को ध्यान में रखते हुए नाले की सफाई के लिए विशेष तकनीक विकसित की.


ऐसे शुरू किया प्रोजेक्‍ट
संदीप वर्मा ने नमामि गंगे प्रोजेक्ट को ध्यान में रखते हुए नाले की सफाई के लिए विशेष तकनीक विकसित की. 2016 में एमएसएमई ने इस प्रोजेक्ट को एप्रूव कर दिया. संदीप ने कैंपस में गंदे नाले के ऊपर प्रोजेक्ट लगाया, जिसमें पांच चरणों में से अंतिम में पानी का टीडीएस 70 मिला. जबकि नाले के पानी का टीडीएस 3000 से भी ज्यादा था. बीते दिनों डिप्टी सीएम डॉक्टर दिनेश शर्मा भी यह तकनीक देखने पहुंचे थे. शोधकर्ता का दावा है कि 20 मिनट में 100 लीटर शुद्ध जल तैयार किया जा सकता है और एसटीपी की तुलना में यह तकनीक बेहद सस्ती है. यूपी के इन्वेस्टर्स समिट में भी इसे सराहना मिली थी.

यूपी के इन्वेस्टर्स समिट में भी इसे सराहना मिली थी.

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संदीप ने यहां लगाया प्‍लांट
संदीप ने नाले के ऊपर सीढ़ी पर यह प्लांट लगाया है. इसमें नाले के पानी को पहले ऊपर वाले ड्रम में पहुंचाकर पानी का कचरा अलग किया गया. दूसरे चरण में पानी में पत्थर एवं धातु के छोटे टुकड़ों को अलग किया.. तीसरे चरण में टिकिंग फिल्टर लगाकर विशेष बैक्टीरिया पैदा किया, जो स्लज को खा गए. चौथे चरण में फिल्टर से इस पानी को अलग कर एरिएशन प्रोसेज कर पानी में ऑक्सीजन की मात्र बढ़ाई और यूवी प्रोसेज के जरिए पानी के खतरनाक बैक्टीरिया को रोक दिया. प्री कार्बन एवं पोस्ट कार्बन फिल्टर लगाकर अत्यंत सूक्ष्म बैक्टीरिया एवं विषाक्त कणों को साफ किया गया. बाद में पानी में मिनरल मिलाकर इसे पीने लायक बनाया गया.

मोदी बने प्रेरणा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग में भी ये युवा टीम मौजूद थी. 20 मिनट में 100 लीटर पानी साफ कर देने वाला ये प्रयोग यकीनन सराहनीय है. हैरानी की बात ये भी है कि अत्यंत कम लागत में बनी इस मशीन को नाले पर लगाकर गंदे पानी का सदुपयोग किया जा सकता है. अगर इस प्रयोग को प्रचार प्रसार मिले तो ये प्रयोग उन इलाकों के लिए वरदान साबित हो सकती है जहां लोग बूंद बूंद पीने के साफ पानी को तरस रहे हैं.

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First published: August 6, 2019, 8:38 PM IST
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