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कलयुगी मां ने नवजात बच्ची को मरने के लिए फेंका

    चलती फिरती आंखों से अज़ां देखी है..मैने जन्नत तो नहीं देखी मां देखी है. यह कहा गया है मां के लिए. मां को विश्वास की देवी कहा जाता है. मां और बच्चे का प्रेम सारी परिभाषाओं से परे है. लेकिन लेकिन मेरठ की एक मां ने इस पवित्र रिश्ते को कलंकित किया है.

    इस भीषण सर्दी में इस मां ने अपनी ही नवजात मासूम बच्ची को जंगलों में मरने के लिए छोड़ दिया. लेकिन कहते हैं न कि मारने वाले से बड़ा बचाने वाला होता है. एक युवक जंगल में मौत से जंग लड़ रही इस बच्ची के लिए फरिश्ता बनकर आया. उसने इस बच्ची को अस्पताल में भर्ती कराया, जहां वो जिन्दगी और मौत से जंग लड़ रही है.

    इस बच्ची को उसकी मां ने तो नहीं अपनाया लेकिन कई हाथ बच्ची का मासूम उंगलियां थामने के लिए बढ़ रहे हैं.

    बस एक मां है जो मुझसे खफा नहीं होती...शायर मुनव्वर राणा की लिखी ये पंक्तियां मेरठ में एक नवजात बच्ची के लिए बेमानी साबित हुईं. इस दुनिया में आंख खुलने से पहले ही मासूम की मां उससे ऐसी खफा हुई कि हमेशा के लिए उसे खुद से जुदा कर दिया. जिस मासूम को मां के आंचल की गर्माहट मिलनी चाहिए थी, उसे भीषण ठंड में सड़क किनारे मरने के लिए छोड़ दिया.

    इस मां का दिल तनीक भी नहीं पसीजा. घंटों बर्फीली ओस पर नवजात ठिठुरती रही. जिसे बेटी होने की सजा मिली या कुछ और वजह रही? बहरहाल, समाज का यह चेहरा विचलित करने वाला है.

    सरधना के जंगलों में ये नवजात बालिका सड़क किनारे ठंड में ठिठुर रही थी, जिसकी अभी तक आंख भी नहीं खुली थी. राह से गुजर रहे संदीप नाम का युवक उसके लिए फरिश्ता बनकर आया. उसने 102 नंबर पर कॉल कर घटना की सूचना दी.  मासूम को कुछ देर सीएचसी में रखने के बाद जिला अस्पताल भेज दिया गया. चिकित्सकों के मुताबिक बच्ची एक दिन की है और पूरी तरह सेहतमंद है.

    लेकिन इस बच्ची की मासूम आंखे और उसका रोम-रोम अपनी मां से यही सवाल कर रहा है...मां मेरा क्या कसूर था जो मेरे जन्म पर तुम ख़ुश न हुई? आखिर क्यों तुमने अपने जिगर के टुकड़े को कांटों में फेंक दिया? भला हो संदीप नाम के व्यक्ति का जो इस बच्ची के लिए किसी फरिश्ते से कम नहीं. अब इस बच्ची के मिलने की सूचना पर अस्पताल में लोगों का तांता लग गया है.

    आपके शहर से (मेरठ)

    Tags: Meerut news, मेरठ

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