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हाईकोर्ट ने ग्राम विकास अधिकारी परीक्षा में चयनित अभ्यर्थियों को दी बड़ी राहत

हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार की नियुक्ति रद्द करने वाले आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर फैसला सुनाते हुए चयनित सभी अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र जारी करने का आदेश दिया है.

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को सुनाए एक फैसले में मिर्जापुर जिले में वर्ष 2014 में 62 पदों के लिए हुई ग्राम विकास अधिकारी भर्ती परीक्षा के चयनित अभ्यर्थियों को बड़ी राहत प्रदान किया है.

हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार की नियुक्ति रद्द करने वाले आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर फैसला सुनाते हुए चयनित सभी अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र जारी करने का आदेश दिया है. कोर्ट ने भर्ती रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले को गलत ठहराया है.

दरअसल, राज्य सरकार के भर्ती परीक्षा निरस्त करने के फैसले को याचिकाकर्ता धर्मेन्द्र कुमार पाण्डेय और 20 अन्य अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. दोनों पक्षों की बहस पूरी होने के बाद जस्टिस आर.एस.आर मौर्या की एकलपीठ ने गत 22 दिसम्बर 2017 को फैसला सुरक्षित कर लिया था.



उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने ग्राम विकास अधिकारी के 62 पदों पर हुई भर्ती में अनियमितता और धांधली की शिकायत के आधार पर परीक्षा को निरस्त कर दिया था. सरकार ने भर्ती रद्द करने में आरोप लगाया था कि एक ही दिन में 800 ज्यादा अभ्यर्थियों के साक्षात्कार और शारीरिक परीक्षा कराई गई, जिसे कोर्ट ने गलत माना.
कोर्ट में पेश किए गए रिकार्ड में के मुताबिक एक दिन में अधिकतम 124 अभ्यर्थी और न्यूनतम 67 अभ्यर्थी साक्षात्कार और शारीरिक परीक्षा में सम्मिलित हुए थे और यह भर्ती मिर्जापुर के तत्कालीन जिला विकास अधिकारी बंशीधर सरोज ने कराई थी, जिसे कोर्ट ने अपने फैसले में वैध घोषित किया है.
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