मिर्जापुर: गंगा के तट पर प्रसिद्ध विंध्याचल मंदिर, जहां कभी कोई खाली हाथ नहीं लौटता
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मिर्जापुर: गंगा के तट पर प्रसिद्ध विंध्याचल मंदिर, जहां कभी कोई खाली हाथ नहीं लौटता
गंगा के तट पर प्रसिद्ध विंध्याचल मंदिर (file photo)

कालांतर से पीतल नगरी के नाम से मशहूर मिर्जापुर (Mirzapur) की ख्याति दूर-दूर तक फैली थी. यह केवल संपूर्ण देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी लोकप्रिय था.

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  • Last Updated: August 28, 2020, 1:14 PM IST
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मिर्जापुर. उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर (Mirzapur) जिले का एक धार्मिक दृष्टिकोण से प्रसिद्ध शहर है. यहां मां विन्ध्यवासिनी देवी का मंदिर है. मार्कण्डेय पुराण के अनुसार, मां विन्ध्यवासिनी ने महिषासुर का वध करने के लिए अवतार लिया था. यह नगर गंगा के किनारे स्थित है. मान्यताओं के अनुसार कहा जाता है कि जो मनुष्य इस स्थान पर तप करता है, उसे अवश्य सिद्दि प्राप्त होती है. ऐसा कहा जाता है कि यहां आने वाला कोई भी व्यक्ति खाली हाथ लौटकर नहीं जाता और मां विंध्यवासिनी हर ज़ायज मनोकामना जरूर पूरी करती हैं.

मंदिर का इतिहास

ऐसा माना जाता है कि सृष्टि के रचयिता ब्रह्माजी ने सबसे पहले अपने मन से मनु और शतरूपा को उत्पन्न किया था. विवाह के बाद मनु ने अपने हाथों से देवी की मूर्ति बनाकर लगभग 100 सालों तक तपस्या की. उनकी तपस्या से संतुष्ट होकर देवी ने उन्हें निष्कण्टक राज्य, वंश-वृद्धि एवं परम पद पाने का आशीर्वाद दिया. वर देने के बाद महादेवी विंध्याचल पर्वत पर चली गई. तब से विंध्यवासिनी की पूजा होने लगी.



एयरपोर्ट और रेल मार्ग की सुविधा
वाराणसी में लाल बहादुर शास्त्री यहां का निकटतम एय़रपोर्ट है जहां से विंध्याचल की दूरी 72 किलोमीटर है. विंध्याचल नज़दीकी रेलवे स्टेशन है. लेकिन बहुत सारी ट्रेनें यहां नहीं रूकती तो बेहतर होगा कि मिर्जापुर तक की ट्रेन लें. यहां से विंध्याचल की दूरी लगभग 9 किमी है.

विदेशों में लोकप्रिय हैं मिर्जापुर के पीतल (file photo)
विदेशों में लोकप्रिय हैं मिर्जापुर के पीतल (file photo)


कालांतर से पीतल नगरी के नाम से मशहूर मिर्जापुर की ख्याति दूर-दूर तक फैली थी. यह केवल संपूर्ण देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी लोकप्रिय था. यहां बनने वाले खास किस्म के बर्तनों में उकेरी जाने वाली कला-कृतियों को बहुत लोकप्रियता मिली. यहां पर वैवाहिक कार्यक्रमों में पीतल के बर्तन थार, परात, हण्डा व लोटा आदि दिए जाने की बहुत ही पुरानी परंपरा है. यह परंपरा सदियों से चली आ रही है. यही वजह है कि यहां थार, परात, हण्डा व लोटे का निर्माण व्यापक पैमाने पर होता रहा है.

मिर्जापुर की जनसंख्या

जानकारी के मुताबिक 2011 की जनगणना के अंतिम आंकड़ों के अनुसार, मिर्जापुर-सह-विंध्याचल शहरी समूह की आबादी 245,817 थी, जिनमें से पुरुषों की संख्या 131,534 और महिलाओं की संख्या 114,283 थी.
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