यूपी के किसानों के लिए बड़ी सौगात है एशिया की सबसे बड़ी बाणसागर नहर परियोजना

171 किलोमीटर की कुल लंबाई वाली इस नहर परियोजना पर 3420.24 करोड़ रुपये की कुल लागत आई है. बाणसागर परियोजना से मिर्जापुर व इलाहाबाद के लाखों किसानों को सीधे तौर पर फायदा मिल सकता है.

Ajayendra Rajan | News18 Uttar Pradesh
Updated: July 15, 2018, 11:40 AM IST
यूपी के किसानों के लिए बड़ी सौगात है एशिया की सबसे बड़ी बाणसागर नहर परियोजना
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Ajayendra Rajan
Ajayendra Rajan | News18 Uttar Pradesh
Updated: July 15, 2018, 11:40 AM IST
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को एशिया की सबसे बड़ी बाणसागर नहर परियोजना का उद्घाटन किया. यह परियोजना उत्तर प्रदेश के लाखों किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने इस योजना की शुरुआत की थी. बाणसागर नहर परियोजना 1997 में शुरू हुई  थी और 21 साल बाद यह पूरी हुई है.

यूपी, बिहार और मध्यप्रदेश की संयुक्त सिंचाई परियोजना है बाणसागर

सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह के अनुसार, इस योजना की शुरुआत तत्कालीन बीजेपी शासनकाल में की गई थी. परियोजना का मुख्य बांध मध्यप्रदेश के शहडोल जिले में बनाया गया था. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने इसका उद्घाटन किया था. बता दें कि बाणसागर परियोजना तीन राज्यों की संयुक्त सिंचाई परियोजना है. 39 वर्ष पहले एमपी, बिहार और यूपी के सिंचाई को लेकर परियोजना का आधार तैयार किया गया था.

इसमें तय किया गया कि परियोजना का 50 प्रतिशत पानी मध्य प्रदेश सरकार उपयोग करेगी. इसलिए मध्य प्रदेश परियोजना की लागत का 50 प्रतिशत धन खर्च करेगा. परियोजना का 25 प्रतिशत पानी यूपी और इतना ही बिहार को देने पर मसौदा बना था. इसलिए दोनों राज्यों को लागत का 25-25 प्रतिशत खर्च करना था. लेकिन सरकारें बदलती रहीं और यूपी के हिस्से में पानी आने में लंबा वक्त लग गया. अब जाकर पीएम के हाथों लोकार्पित होकर परियोजना का पानी किसानों के खेतों में पहुंचेगा.

171 किलोमीटर लंबी ये नहर यूपी की करीब डेढ़ लाख हेक्टेयर जमीन सींचेगी

सिंचाई मंत्री के अनुसार, इस परियोजना के अंतर्गत उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में 75,309 हेक्टेयर जमीन और इलाहाबाद में 74,803 हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी और लगभग 1,70,000 किसान सीधे लाभान्वित होंगे. 5.54 टन खाद्यान्न का अतिरिक्त उत्पादन भी इससे बढ़ने का अनुमान है. धर्मपाल सिंह ने बताया कि 171 किलोमीटर की कुल लंबाई वाली इस नहर परियोजना में 3420.24 करोड़ रुपये कुल लागत आई है.

दरअसल 1997 में शुरू हुई ये योजना प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद ठंडे बस्ते में चली गई थी. 2017 में योगी सरकार के आने के बाद वर्षों से अधूरी पड़ी परियोजनाओं को रफ्तार मिली. मुख्यमंत्री ने सचिवालय से इन परियोजनाओं के दैनिक प्रगति की मॉनिटरिंग शुरू कराई. इसी कारण एक साल में बुंदेलखंड की 6 सिंचाई परियोजनाएं पूरी हुईं और विंध्याचल की बाणसागर परियोजना भी पूरी हो गई. राज्‍य शासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मुख्यमंत्री प्रदेश की वर्षों से अधूरी पड़ी उन सभी सिंचाई परियोजनाओं का प्रधानमंत्री से उद्घाटन कराना चाहते हैं, जो इस सरकार के प्रयास से पूरी हुई हैं.

बाणसागर के साथ कई और प्रोजैक्ट पर काम कर रही योगी सरकार

बाणसागर परियोजना से मिर्जापुर व इलाहाबाद के लाखों किसानों को सीधे तौर पर फायदा मिलने का दावा किया जा रहा है. करीब डेढ़ लाख हेक्टेयर खेत की सिंचाई हो सकेगी. इसके अलावा मिर्जापुर के अजवा बैराज का अधूरा काम भी पूरा हो गया है.

इस योजना के अलावा योगी सरकार ने वर्षों से लंबित सरयू नहर परियोजना पर भी अपना ध्यान केंद्रित कर लिया है. मुख्यमंत्री के निर्देश पर 453 हेक्टेयर जमीन खरीदी जा रही है. सिंचाई विभाग के निर्माण मंडलवार अधिशासी अभियंता जमीन खरीद की रिपोर्ट रोज मुख्यमंत्री कार्यालय को कर रहे हैं. जानकारी के अनुसार इसके तहत अब तक 275.61 हेक्टेयर जमीन खरीदी जा चुकी है.

बाणसागर परियोजना

परियोजना शुरू- 1997-98
मूल लागत- 330.19 करोड़
पुनरीक्षण/लागत- 2017/3420.24 करोड़
केंद्रीय सहायता- 995.56 करोड़

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