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मिर्जापुरः छठे दिन मां कात्यायिनी के दर्शन के लिए उमड़े श्रद्धालु

मार्कण्डेय पुराण के अनुसार जब राक्षस राज महिषासुर का अत्याचार बढ़ गया, तब देवताओं के कार्य सिद्धि के लिए देवी मां ने महर्षि कात्यान के तपस्या से प्रसन्न होकर उनके घर पुत्री रूप में जन्म लिया.

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चैत्र नवरात्रि के छठे दिन शुक्रवार को मां विंध्यवासिनी धाम में मां दुर्गा के छठवे स्वरूप मां कात्यायिनी के दर्शन के लिए भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे. मां की एक झलक के लिए कतारबद्ध श्रद्धालुओं ने मंगला आरती के बाद पूजा-अर्चना की. यहां आधी रात के बाद से ही श्रद्धालुओं का तांता लगना शुरू हो गया था.

नवरात्रि के छठे दिन आदिशक्ति मां दुर्गा की षष्ठम रूप और असुरों व दुष्टों का नाश करने वाली मां कात्यायिनी की पूजा की जाती है. मार्कण्डेय पुराण के अनुसार जब राक्षस राज महिषासुर का अत्याचार बढ़ गया, तब देवताओं के कार्य सिद्धि के लिए देवी मां ने महर्षि कात्यान के तपस्या से प्रसन्न होकर उनके घर पुत्री रूप में जन्म लिया.

चूंकि महर्षि कात्यान ने सर्वप्रथम अपने पुत्री रुपी चतुर्भुजी देवी का पूजन किया इसलिए माता का नाम कात्यायिनी पड़ा. मान्यता है कि यदि कोई श्रद्धा भाव से नवरात्रि के छठे दिन माता कात्यायिनी की पूजा  करता है तो उसे आज्ञा चक्र की प्राप्ति होती है, जो भूलोक में रहते हुए भी अलौकिक तेज़ से युक्त होता है और उसके सारे रोग, शोक, संताप, भय हमेशा के लिए विनष्ट हो जाते हैं.



एक यह भी मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण को पति रूप में प्राप्त करने के लिए रुक्मिणी ने इनकी ही आराधना की थी, जिस कारण मां कात्यायनी को मन की शक्ति  भी कहा जाता है.
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