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Corona Warrior: RPF सिपाही और उनकी पत्नी गरीबों के लिए बना रहे मास्क

सिपाही विभूति नारायण सिंह व उनकी पत्नी मीरा अब तक सैकड़ों मास्क बनाकर निशुल्क वितरित कर चुके हैं
सिपाही विभूति नारायण सिंह व उनकी पत्नी मीरा अब तक सैकड़ों मास्क बनाकर निशुल्क वितरित कर चुके हैं

मास्क बनाने के दौरान जहां पत्नी मीरा सिलाई का काम करती हैं, तो वहीं RPF सिपाही विभूति नारायण कपड़े की कटिंग और मास्क (Mask) को सही करने का काम करते हैं. इस तैयार मास्क को वह रेलवे स्टेशन (Railway Station) के आस-पास के इलाकों में गरीबों में बांट देते हैं.

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मिर्ज़ापुर. वैश्विक महामारी (Pandemic) कोरोना वायरस (Coronavirus) के संक्रमण से बचाव के चलते देशव्यापी लॉकडाउन (Lockdown) है. सरकार से लेकर प्रशासनिक अमला और आम आदमी भी इस महामारी से लड़ने में अपना योगदान दे रहा है. ऐसे समय में कुछ लोग ऐसे भी हैं जो सीमित संसाधनों के बावजूद दूसरों के लिए प्रेरणा बने हैं. ऐसे ही एक कोरोना वारियर हैं मिर्जापुर रेलवे स्टेशन (Mirzapur Railway Station) पर तैनात आरपीएफ (RPF) सिपाही व उनकी पत्नी.

पत्नी के संग मिलकर बनाते हैं मास्क
बता दें कि मिर्ज़ापुर जिले के रेलवे स्टेशन पे तैनात रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के सिपाही विभूति नारायण सिंह इन दिनों दोहरी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं. वह सुबह अपने ड्यूटी टाइम पर रेलवे स्टेशन पहुंचते हैं ड्यूटी के बाद जब वो खाली होते हैं तो घर पर अपनी पत्नी मीरा की मदद करने पहुंच जाते हैं. पति-पत्नी दोनो साथ मिल कर लोगों के लिए मास्क (Mask) तैयार करते हैं. अब तक सैकड़ों मास्क बना चुके पति-पत्नी हर रोज मिल कर 25 से 30 मास्क तैयार करते हैं. मास्क बनाने के दौरान जहां पत्नी मीरा सिलाई का काम करती हैं, तो वहीं विभूति नारायण कपड़े की कटिंग और मास्क को सही करने का काम करते हैं. इस तैयार मास्क को वह रेलवे स्टेशन के आस-पास के इलाकों में गरीबों में बांट देते हैं.

इस तरह से वह अब तक सैकड़ों मास्क तैयार कर निःशुल्क गरीबों में बांट चुके हैं. वो बताते हैं कि दरअसल इसकी शुरुआत लॉकडाउन लगने के बाद तब हुई जब रेलवे स्टेशन पर तैनात उनके साथियों को मास्क की जरूरत पड़ी. हर रोज मास्क थाने पर मंगाया जाता था लेकिन इस्तेमाल के बाद फेंक दिया जाता था अगले दिन फिर मास्क की जरूरत पड़ती थी इस परेशानी को देख उन्होंने अपने साथियों के लिए मास्क बनाने का फैसला किया और अपनी पत्नी के साथ घर पर मास्क तैयार कर साथियों को देने लगे इसके बाद वह बचे मास्क को रेलवे स्टेशन के आस-पास के गरीबों को भी बांटने लगे.
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