मिर्जापुर: इस फसल में एक पौधे से 30 साल तक फसल काट सकते हैं फसल, हर साल लाखों में कमाई

प्रदेश के किसानों की किस्मत बदलेगा ड्रेगन फ्रूट, एक बार लागत और 30 साल तक कमाई  

प्रदेश के किसानों की किस्मत बदलेगा ड्रेगन फ्रूट, एक बार लागत और 30 साल तक कमाई  

मिर्जापुर में होने वाली ड्रेगन फ्रूट की खेती अब पूरे प्रदेश में की जाएगी. किसानों द्वारा इसमें एक बार लागत लगा कर तीस साल तक फसल से पैसा कमाया जा सकता है. इसीलिए ड्रेगन की खेती किसानों के लिए बहुत फायदेमंद साबित हो रही है.

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मिर्जापुर. उत्तर प्रदेश ( Uttar Pradesh) के मिर्जापुर ( Mirzapur) में होने वाली ड्रेगन फ्रूट (Dragon fruit) की खेती अब पूरे प्रदेश में की जाएगी. किसानों द्वारा इसमें एक बार लागत लगा कर तीस साल तक फसल से पैसा कमाया जा सकता है. इसीलिए ड्रेगन की खेती किसानों के लिए बहुत फायदेमंद साबित हो रही है. एक एकड़ में ड्रेगन की खेती करने में करीब पांच लाख रुपये खर्च आता है. पांच लाख लागत लगने और थोड़ी ही मेहनत में 15 महीनों बाद फसल तैयार हो जीती है. इसकी खास बात ये है कि इस फसल में एक पौधे से तीस साल तक फसल काट सकते हैं. इससे हर साल करीब पांच से छह लाख रुपये किसान को आमदनी होती है.

दरअसल ड्रेगन फ्रूट की डिमांड बाजार में हमेशा रहती है. ड्रेगन फ्रूट बाजार में दो सौ से तीन सौ रुपये में एक किलो बिकता है. सबसे बड़ी खासियत एक फल में है कि ड्रेगन फल खाने से इंसान के शरीर की इम्युनिटी बढ़ती है. साथ कि यह कई बीमारियों से भी बचाता है. इम्युनिटी बढऩे से कोरोना जैसी बीमारी से बचा जा सकता है. इस समय मिर्जापुर जनपद के राजगढ़ सहित कई क्षेत्रों  में लगभग 11 हेक्टेअर में ड्रैगन फ्रूट की खेती कर किसान मालामाल हो रहे हैं.

राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने बीते दिनों जनपद में आयोजित कार्यक्रम के दौरान ड्रैगन फ्रूट हब घोषित कर चुकी हैं. कृषि सचिव भारत सरकार संजय अग्रवाल ने भी ड्रेगन फ्रूट के बारे में जानकारी लेते हुए  पूरे प्रदेश में खेती कराने का निर्णय लिया है.

जिला उद्यान अधिकारी मेवाराम के अनुसार जनपद मिर्जापुर में लगभग 11 हेक्टेयर में ड्रेगन फ्रूट की खेती की जा रही है और यहां के क्लाइमेट बहुत अच्छे हैं. उत्पादन भी हमारा अच्छा हो रहा है. इसको देखते हुए माननीय मुख्यमंत्री ने भी इसकी सराहना की और राज्यपाल ने 3 मार्च को इस जिले को ड्रैगन हट घोषित किया.भारत सरकार के कृषि सचिव संजय अग्रवाल ने इस खेती को देखने के बाद इसे पूरे प्रदेश में फैलाने की बात कही है. विभाग इसके लिए अगले साल से सब्सिडी भी देने की तैयारी में है.
ड्रैगन फूड के फल की तीन वेरायटी हैं. इसका वजन लगभग 1 किलो के आसपास आता है. यह फल बहुत महंगा बिकता है. एक फल सौ सवा सौ के आस -पास आता है. एक बीघे में जो लागत आती है जो शुरुआती एक साल केवल रहती है वह 3 से साढ़े तीन लाख है. लागत एक साल ही लगती है और उसके बाद 30 साल तक छह से सात लाख रुपये हर साल यह इनकम देने लगता है. देगी इस तरह से देखा जाए तो किसानों को आय दुगनी नहीं 10 गुनी कर देगी.

किसान आसाराम कहते हैं कि वह ड्रैगन फ्रूट की खेती कर रहे हैं. हम लोग पहले पारंपरिक खेती करते थे लेकिन इस समय ड्रैगन फ्रूट की खेती उन्हें फायदा दे रही है. कर रहे हैं एक पौधे में लागत लगभग 400 रुपए के करीब आती है. 300 रुपये का पिलर 100 रुपये पेड़ लगाने में लग जाता है. एक बार जब पेड़ लग जाती है, फिर कोई विशेष देखरेख नहीं करना पड़ता है. न रासायनिक खाद देना पड़ता है. यह 20 वर्ष से 25 वर्ष तक फल देता रहता है. एक पौधे से एक पौधे से लगभग 100 फल निकलते हैं और व्यपारी एक फल 100 रुपये में खरीदता है. पांच से सात लाख रुपये एक एकड़ में मिलने की उम्मीद रहती है.
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